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Monday, February 6, 2012

कागजों में चल रही फेक्टरियों व एनजीओं का आवंटित जमीने व अनुदान जब्त करे सरकार

कागजों में चल रही फेक्टरियों व एनजीओं का आवंटित जमीने व अनुदान जब्त करे सरकार
-गुनाहगारों को बेनकाब करने के लिए नयी सरकार करे श्वेत पत्र जारी

देहरादून (प्याउ)। प्रदेश में जो भी सरकार 6मार्च के चुनाव परिणाम निकलने के बाद प्रदेश की सत्ता में आसीन हो वह सबसे पहले उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद यहां के भ्रष्ट राजनेताओं व नौकरशाहों के शह पर प्रदेश में उद्योगों को मिल रही विशेष छूट में लूट मारने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में उद्योग धन्धे खोलने के नाम पर यहां पर कागचों पर जो फेक्टरियों, चल रही है उनको मिली छूट व जमीन को जब्त करने के लिए अविलम्ब कार्यवाही करेे सरकार। इस नव गठित प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए मिली विशेष छूट, जमीन इत्यादि को हडपने के लिए यहां पर सत्ता पर काबिज भ्रष्ट लोगों ने अनैक ऐसे लोगों को यहां पर करोड़ों रूपये की छूट व लाखों करोड़ों रूपये मूल्य की जमीनें कोडियों के भाव से आवंटित की गयी। यह मामला तब प्रकाश में आया जब आयकर विभाग द्वारा गत सप्ताह पंजाब, उप्र व उत्तराखण्ड में शराब व जमीन इत्यादि के अग्रणी कारोबारी पौटी चड़डा व अन्य उद्यमियों के आवास, फेक्टरियों आदि स्थानों पर छापेमारी के दौरान उत्तराखण्ड  की आदित्य पावरटेक फेक्टरी पर छापामारी की। इस कम्पनी के दस्तावेजों के अनुसार सेलाकुई में फेक्टरी में ट्रांसफार्मर में प्रयोग में आने वाली लेमिनेशन सीट का उत्पादन किया जाता है और इसको बाद में हरिद्वार भेजा जाता है। आयकर विभाग का छापामार दस्ता जब सेलाकुई में उक्त फेक्टरी के पते पर पंहुचा तो वहां पर केवल एक टीन शेड बना हुआ था और उस में मात्र तीन कर्मचारी ही आराम कर रहे थे। तीनों से पूछताछ और कागजात की जांच के बाद करोड़ों के घालमेल का खुलासा हुआ। पता चला कि उत्तराखंड में उद्योगों को मिलने वाली छूट का फायदा उठाने के लिए इस फैक्टरी को केवल कागजों में ही खोला गया। कागजों में दिखाया जा रहा था कि लेमिनेशन शीट सेलाकुई फैक्टरी में बनाकर हरिद्वार भेजी जाती है जबकि वास्तव में लेमिनेशन शीट का उत्पादन जयपुर में किया जा रहा था और वहीं से यह शीट हरिद्वार भेजी जाती थी। जांच के बाद आयकर अधिकारियों ने जयपुर निवासी फैक्टरी मालिक आशीष मंगल से संपर्क किया। करोड़ों के कारोबार को दिखाने वाले इस उद्यम के जयपुर निवासी मालिक आशीष मंगल ने बाद में आयकर विभाग द्वारा पूरी तरह से बेनकाब किये जाने के बाद अपनी गलती को स्वीकार करते हुए यह रहस्योदघाटन किया कि वह पिछले तीन-चार सालों से उत्तराखंड में उद्योगों को मिल रही छूट का दुरुपयोग कर रहा है। उसने दस करोड़ रुपए के दुरुपयोग को स्वीकारते हुए इस राशि पर कर अदा करने की बात कही है। आयकर विभाग ने मामला दर्ज कर लिया।
परन्तु यह एक अकेला ऐसा उद्यम नहीं है जो उत्तराखण्ड के भ्रष्ट नेताओं व नोकरशाहों के कारण प्रदेश के हक हकूकों पर शर्मनाक ढ़ग से डाका डाल रहा हो, ऐसे यहां पर अनैक ऐसे अन्य उद्यम भी है। जो केवल छूट व यहां की सबसिडी तथा जमीन को कब्जाने के लिए यहां पर इस प्रकार से हवाई फेक्टरियां व उद्यम चला रहे है। इसके अलावा कई ऐसी जनहित की समाजसेवी संस्थायें भी सुनने में आयी जिनको प्रदेश की बहुकीमती जमीन को कोडियों के भाव में आवंटित की गयी, परन्तु ये संस्थायें भी केवल कागचों में ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। लोगों की जुबानों पर यह भी है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में दिल्ली दरवार के राजनीति पर पकड़ रखने वालों ने अपने रिश्तेदारों व समर्थकों के एनजीओ को बड़ी मात्रा में जमीनें लुटवायी गयी।
    प्रदेश में जो भी सरकार 6 मार्च को होने वाली मतगणना के बाद गठित हो वह सबसे पहले ऐसी संस्थाओं व उद्यमों की कड़ी जांच करके उनको प्रदान की गयी भूमि व सबसिड़ी को जब्त करे। प्रदेश में सुनने में यह आया कि अधिकांश उद्यमियों के यहां प्रदेश में उत्पादन केवल कागचों में ही हो रहा है और उनके यहां के नाम के लेबल वाले डिब्बे ही इन समानों पर लगाये जाते हैं, इनका उत्पादन अधिकांश इनकी प्रदेश से बाहर की फेक्टरियों में ही हो रहा है। अगर इन बातों में जरा सी भी सच्चाई है तो प्रदेश सरकार को बहुत ही गंभीरता से इस दिशा में काम करना चाहिए और प्रदेश के संसाधनों व सबसिडी पर खुला डाका डालने वाले इस गुनाहगारों को शिकंजे में जकड़ना चाहिए। अगर प्रदेश सरकार इस दिशा में काम नहीं करती हे तो प्रदेश के जागरूक लोगों को अविलम्ब ही इस दिशा में मजबूती से आंदोलन चलाना चाहिए। अगर यह ईमानदारी से यह काम किया गया तो इस प्रकरण में प्रदेश के कई राजनेता व नौकरशाही तथा उद्यमी व समाजसेवी बेनकाब हो जायेंगे।

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