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Saturday, February 25, 2012

अपने हक हकूकों व सम्मान के लिए जागृत हो उत्तराखण्डी

अपने हक हकूकों व सम्मान के लिए जागृत हो उत्तराखण्डी
नई दिल्ली(प्याउ)।  ’उत्तराखण्ड समाज को अपनी दलगत, जातिगत व क्षेत्रवादी संकीर्णता से उपर उठ कर अपने प्रदेश की समग्र विकास, संस्कृति के साथ साथ अपने हक हकूकों की रक्षा के लिए सामुहिक रूप से संगठित होना चाहिए। इसके साथ सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे उत्तराखण्ड, दिल्ली सहित देश के हर प्रांत में मुख्य धारा के विकास में अपना योगदान देते हुए उत्तराखण्डी समाज के हित के प्रति समाज को राजनैतिक जागरूक करने की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करे।’  यह विचार
‘उत्तराखंड के सामाजिक एंव राजनितिक जीवन पर प्रवासी उत्तराखंडियों की भूमिका’ नाम विषय पर दिल्ली  में आयोजित एक विचार गोष्ठी में उभर कर सामने आये। 25 फरवरी को दिल्ली के गढ़वाल भवन में दोपहर में आयोजित इस गोष्ठी में  उत्तराखण्ड के अग्रणी जनकवि बली सिंह ‘चीमा’बली का जनगीत ‘तय करो आदमी की और हो या आदमखोर की तरफ.....’ से इस गोष्ठी का समापन हुआ। इस गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी  ने की तथा संचालन म्यर उत्तराखण्ड के अध्यक्ष मोहनसिंह बिष्ट ने की। सभा में पत्रकार सुरेश नौटियाल, उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के अग्रणी संगठन उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष व प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत, दिल्ली नगर निगम की पार्षद व भाजपा नेत्री उषा शास्त्री, कार्यकारी सम्पादक चारू तिवारी, जनसंघर्षो से जुड़े पत्रकार भूपेन सिंह, उत्तराखण्ड चिंतन के के एम पाण्डे, महासचिव प्रेम सुन्दरियाल, भूपाल सिंह बिष्ट, समाजसेवी हरिपाल नेगी, अखिल भारतीय उत्तराखण्ड महासभा के गिरीश बलूनी, सार्थक प्रयास से उमेश पंत, प्रबंधन विशेषज्ञ प्रकाश पंत, देवेन्द्र बिष्ट, भाजपा नेत्री श्रीमती गुसांई, पत्रकार रावत,  युवा नेता दीपक बिष्ट, सहित अनैक प्रतिष्ठित लोगों ने अपने विचार प्रकट किये। इस सभा में समाजसेवी विक्रम सिंह रावत, म्यर उत्तराखण्ड के महासचिव सुदर्शन सिंह रावत, हरीश रावत, पत्रकार सतेन्द्र रावत, हुकमसिंह कण्डारी, कवि पृथ्वीसिंह केदारखण्डी व दिनेश ध्यानी, सहित अनैक प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।

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