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Friday, February 17, 2012

आजादी के सूर्यादय के लिए तरसता भारत



आजादी के सूर्यादय के लिए तरसता भारत
आखिर 15 अगस्त 1947
से गंगा और यमुना का
कितना पानी गंगा सागर में
मिल चूका है पर
हम आजादी को हासिल
करके के कई दशकों बाद भी,
भारत आजादी के सूर्यादय के लिए
दशकों बाद भी तरस रहा है
भारत अपने नाम व जुबान का भी
अपने ही देश में तरस रहा है।
आजादी के नाम पर मिली देश को
इंडिया, इंग्लिश व इंडियागेट की गुलामी
 हम इतने महान आज हो गये कि
भारत को भारत कहने के लिए भी
अपने ही देश में तरस गये
गुलामी के मोह में इतने
इतने नपुंसक बन गये है हम
आज भी वंदेमातरम् कहने वाले भी
बच्चों को टाई पहनवा कर
देशप्रेम में गुलामी का पाठ पढ़ा रहे हैं
हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान का जाप करके
सत्ता की चैखट पर नाक रगड़ने वाले भी
इंडिया इंज साइंनिग व राइजिंग नाव
कह कर अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं
इंडिया, इग्लिश व इंडिया गेट का गीत
गा कर महारानी को सलाम ठोक रहे हैं
माना फिरंगी के प्यादों ने बनाया हमे गुलाम
पर स्वयं सेवक भी क्यों बन गये सियार।
आज भारत को आजाद करना है
इन कालनेमियों व फिरंगियों के प्यादे से
भारत को जो इंडिया बोले ऐसे गुलामों से
जो शहीदों की शहादत को अपमान करे
ऐसे राष्ट्रमण्डल के दुलारे स्वानों से
देश पर फिरंगी कलंक लगाने वालों से
-देवसिंह रावत (18 फरवरी 2012 प्रातः 9.53 बजे)

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