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Saturday, February 18, 2012

पत्रकार ही नहीं पत्रकार संस्थान व जनता भी जिम्मेदार है पत्रकारिता के पतन के लिए

पत्रकार ही नहीं पत्रकार संस्थान व जनता भी जिम्मेदार है पत्रकारिता के पतन के लिए 
आज ईमानदार पत्रकार व निष्पक्ष लिखने वाले पत्रकार की किसी भी समाचार पत्र में कोई जगह नहीं हे। आज समाचार पत्र या चैनल का मालिक पत्रकारिता के लिए समर्पित या देश-समाज, लोकशाही, नैतिकता व जनहित की रक्षा के लिए नहीं अपितु अपना व्यापार, प्रभाव व दौलत बढ़ाने के लिए पत्रकारिता को अपना मोहरा बनाना चाहता है। ऐसी स्थिति में उसे अपने व्यवसाय व प्रभाव को बढाने वाले नेताओं, नौकरशाहों व उद्यमियों का भरपूर दोहन करने वाले चाटुकार चाहिए होता है न की निष्पक्ष लिखने वाले कलम के सिपाई पत्रकार की जरूरत होती है। अगर ऐसे व्यापारी को भय होता है कि अगर उसने सही खबरे प्रकाशित अपने समाचार संस्थान में प्रकाशित करायी तो व्यवस्था भी उसके तमाम अवैध कारोबार की कमर तोड़ सकती है। इसलिए आज पत्रकारिता में पत्रकारों की नहीं चाटुकारों व दोहन करने वालों को ही स्थान दिया जाता है। इसीकारण आज दम तोड़ चूकी व्यवस्था में भी धारदार पत्रकारिता किसी भी स्थापित समाचार जगत में नहीं दिखाई दे रही है।
भ्रष्टाचार की प्रतीक सरकारी विज्ञापनों को ही अगर बंद कर दिया जाय तो देश में पत्रकारिता में एक प्रकार से 99 प्रतिशत भ्रष्टाचार पर अंकुश लग जायेगा। सरकारी विज्ञापन की आड़ में देश में भ्रष्टाचार की आंधी चल रही है। इसलिए सरकारी विज्ञापन को अविलम्ब बंद कर दिया जाय और डीएबीपी के तमाम कर्मचारियों व उनके रिश्तेदारों के समाचार पत्रों की जांच करने के साथ इनकी सम्पति की भी जांच की जानी चाहिए।
आज समाज के पतन के लिए लोग ही जिम्मेदार हैं जो लोग सही अर्थोेे में कहीं ईमानदारी से पत्रकारिता करना च.ाहते हैं उनको न तो कोई संस्थान नौकरी देना चाहता है व अगर कोई अपना अखबार ही निकाल कर इस दिशा में मजबूती से कदम उठाये तो समाज उसको न तो सहारा देता है व साथ। जब ईमानदारी से काम करने वाला पत्रकार समाज के लिए अपना सबकुछ दाव पर लगाकर समाज द्वारा अपनी उपेक्षा व दलाल टाइप के पत्रकारों व भ्रष्टाचारियों को सम्मान करते हुए देखता हे तो उसका साहस जवाब दे देता है। बहुत कम ही ऐसे लोग निकल पाते हैं जो पूरी कुव्यवस्था से टकरा कर अपने आप को तबाह करने का जोखिम लेते है। भ्रष्ट पत्रकारिता के लिए नेता, नौकरशाह व समाजचार जगत से अधिक जनता भी जिम्मेदार है। अगर जनता सही पत्रकार का सम्मान करना व साथ देने का काम करे तो देश में भ्रष्टाचार का खात्मा होने में देर नहीं लगेगी। ईमानदार व मूल्यों के लिए अपने आप को दाव पर लगाने वाला पत्रकार जब समाज से उपेक्षा व असहयोग पाता है तो उसकी संघर्ष करने की शक्ति कुंद हो जाती है।

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