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Thursday, February 9, 2012

सपा, बसपा व भाजपा के लिए आसान नहीं है वर्तमान विधानसभा चुनाव, अप्रत्याषित परिणाम होगे उप्र के विधानसभा चुनाव के

उप्र चुनावी जंग की आंच जंतर मंतर तक 
-सपा, बसपा व भाजपा के लिए आसान नहीं है वर्तमान विधानसभा चुनाव, अप्रत्याषित परिणाम होगे उप्र के विधानसभा चुनाव के
आजकल उप्र विधानसभा की 403 सीटों के लिए आम चुनाव हो रहा है। इसके परिणाम मणिपुर, पंजाब व उत्तराखण्ड की विधानसभा चुनाव परिणामों के साथ ही 6 मार्च को घोशित हो जायेंगे। परन्तु भले ही चुनावी जंग का असली मैदान उप्र में हों परन्तु देष की राजधानी दिल्ली में लोकषाही के सर्वोच्च सदन ‘संसद’ की चैखट पर स्थित राश्ट्रीय धरना स्थल ‘जंतर मंतर’ पर भी इन दिनों राजनेताओं, पत्रकारों, समाजसेवियों के बीच रह रह कर इन चुनावों पर गहरा विचार विमर्ष होता रहता है। आज 9 फरवरी की सांय जब में जंतर मंतर पर पंहुचा तो वहां पर से आम धरना प्रदर्षन वाले जा चूके थे। धरना स्थल पर चल रही चाय की दुकान पर देष के दलित राजनीति के मर्मज्ञ ताराचंद गौतम बैठे थे। आज उस समय चंद पत्रकार, समाजसेवी व टीसी गौतम के अलावा मै व मेरे साथी मोहन सिंह रावत भी थे। चर्चा पर भाग लेते हुए जब गौतम जी ने कहा कि इस समय उप्र के चुनाव परिणाम चैकन्ने वाले होगे। उनके अनुसार उप्र में 18 प्रतिषत दलित में 8-9 प्रतिषत जाटव मतों को छोड़ कर सारे दलित मायावती से अधिक अब कांग्रेस के साथ हैं। वही 18 प्रतिषत ब्राहमण समाज आज भाजपा व कांग्रेस के साथ है। मायावती के साथ उन्हीं स्थान पर साथ हो सकता है जहां बसपा के ब्राहमण प्रत्याषी है। 20 प्रतिषत मुस्लिम समाज का आज अधिकांष भागेदारी कांग्रेस के साथ है। दूसरे स्थान पर सपा के साथ होंगे। बसपा में बहुत कम और भाजपा में ना के बराबर। इसके अलावा 35-40 प्रतिषत के करीब उप्र की जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाला ओबीसी समाज एक बड़ा तबका जो 8 प्रतिषत जाट जो केवल जाट प्रतिनिधियों के साथ ही खड़ा रहेगा। जो दस प्रतिषत से कम ठाकुर मतदाता है वह अब कांग्रेस व भाजपा में थोड़ा बहुत बंटेगा। टीसी गौतम इस बात से हैरान थे कि देष के पत्रकारों को जमीनी राजनीति के गणित का ज्ञान तक नहीं है और वे देष की जनता को भ्रमित करने वाली खबरें प्रकाषित कर रहे है। उनके अनुसार उप्र के चुनाव में ब्राहमण व दलित समाज का अधिकाष मत सपा को नहीं पड़ता। वहीं इस बार अमर सिंह के सपा से दूर जाने से व मोहन सिंह के अपमान करने से रहा सहा ठाकुर समाज का मत भी सपा के साथ नहीं पडेगा। मुस्लिम मतदाता को इस समय रूझान फिर से कांग्रेस की तरफ बढ़ने से सपा को नुकसान होगा। उनके हिसाब से सपा को केवल अपने 8 प्रतिषत यादव मतदाताओं का अधिकांष मत ही हासिल होंगे। इस समय उसको, इस कारण जो मीडिया जमीनी तत्थयों को जाने बीना दिल्ली में बैठ कर सपा को प्रदेष में प्रथम स्थान पर दिखा रहा है उसे जमीनी सच्चाई का भान तक नहीं है। सपा के कुषासन के दंष आज भी लोगों के जेहन से नहीं उतरे है। इसलिए सपा के साथ गैर यादव ओबीसी, दलित, ब्राहमण समाज का एक प्रकार से दूरी होगी। मुस्लिम व ठाकुर मतदाताओं की भी दूरी होगी। मुलायम सिंह के षासन को जहां गुण्डा राज के नाम से आज भी उनके विरोधी चिल्लाते रहते। वहीं मायावती का मतदाता आज उससे खिसक रहा है, जाटव छोड़ कर अधिकांष दलित उससे दूरी बनाये हुए है। जाटव मतों का धु्रवीकरण भी चुनाव आयोग की नादानी के कारण हुआ। मायावती व हाथियों की मूर्तियों को ढ़कने के कारण समाज में मायावती के प्रति सहानुभूति बढ़ीं परन्तु उसका कुषासन लोगों की नजरों में मुलायम के कुषासन का प्रतिक बन गया है। भाजपा के कृत्य ही आज भाजपा को पतन के गर्त में धकेलना के लिए काफी है। कांग्रेस ने अगर समझदारी से ये सही चुनावी पाषे चलाये तो चुनावी जंग को जीत सकती है।
टीसी गौतम के नाम से जाने जाने वाले ताराचंद गौतम देष में दलित राजनेताओं में अग्रणी रहे जगजीवन राम के सबसे करीबी साहयकों व उनकी पार्टी के राश्ट्रीय सचिव भी रहे । खुद आज देष की अग्रणी दलित नेत्री व उप्र की मुख्यमंत्री मायावती भी जब कहीं नहीं थी, वामसेफ के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थी, जगजीवन राम की पार्टी से दिल्ली में पार्शद के चुनाव में टिकट लेने के लिए इन्हीं गौतम जी के पास आयी थी। यही नहीं जगजीवन राम के निधन के बाद खुद गौतम जी ने मायावती के सांसद चुनाव का मार्गदर्षन भी किया था।
आज की जमीनी समीकरणों के गहन विषलेशण के बाद मैं इस चर्चा अपने सुधि मित्रों के समक्ष पेष करता हैू कि वे इन बिन्दुओं पर गौर करके अपने विचार भी हमें प्रेषित करेंगे।

उप्र के चुनाव में

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