देश व समाज से विश्वासघात है अन्याय को मूक सहना

देश व समाज से विश्वासघात है अन्याय को मूक सहना
विरोध हमेशा नीतिगत व संस्कारित ही नहीं  सत्य पर आधारित मर्यादित होना चाहिए, जो व्यवहार हम दूसरों से अपने साथ किये जाने पर सहज ही स्वीकार नहीं कर सकते हैं उसी प्रकार का व्यवहार हमें किसी दूसरे के साथ कभी नहीं करना चाहिए। सत्य व नैतिकहीन कृत्य हमेशा मानव को पथभ्रष्ट बना कर पूरी व्यवस्था को आरजकता के गर्त में डालता है। इसी के साथ सत्य व अन्याय को निहित स्वार्थ के साथ मूक रह कर सहना भी कायरता के साथ अधर्म है। यह देश समाज के साथ विश्वासघात ही नहीं उसकी नींव पर कुठाराघात करना भी है। - देवसिंह रावत www.rawatdevsingh.blogspot.com

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