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Sunday, May 19, 2013



 दो टके के लालच में नेताओं व नौकरशाहों ने बना दिया देवभूमि उत्तराखण्ड को शराब का गटर एवं माफियाओं का अभ्याहरण


शराब न पीने देने पर दो भाईयों ने तीन पडोसियों को घर सहित जला मारा


उत्तरकाशी(प्याउ)। पडोसी द्वारा और शराब न पीने देने से शराब के लिए हैवान बने दो भाईयों ने गहरी नींद में सोते अपने तीन पडोसियों के घर में आग लगा कर मार डाला। बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तरस रही प्रदेश की जनता यह देख कर हैरान व स्तब्ध हे कि यह बेशर्म सरकार व प्रशासन गंगा यमुना के पावन देवभूमि उत्तराखण्ड को शराब का गटर बनाने को तुली हुई है। प्रदेश के शहर व कस्बों के कोने कोने से लेकर दूर दराज के गांव -गांव तक सरकार शराब पंहुचाने में उतारू हो रखी है। वहीं शराब की लत में पूरा प्रदेश तबाही के गर्त में तबाह हो रहा है। हर जगह हत्या, मार पीट, चोरी व व्यभिचार शराब के कारण होने से जनता त्रस्त है। गांव हो या शहर जन्मदिन से मरण दिन के कार्यक्रमों पर शराब ने पूरी तरह से ग्रहण लगा दिया है। परन्तु सरकार इस पर अंकुश लगाने के बजाय शराब को बढावा दे रही है।
पूरे प्रदेश को स्तब्ध करने वाली उक्त घटना गत सप्ताह सीमान्त जनपद उत्तरकाशी में घटित हुई। जहां  शराबी साथियों को ओर शराब न पीने देने से गुस्से में अंधे हुए दो सगे भाईयों ने बृहस्पति वार 16 मई की रात को अपने घर में गहरी नींद में सोये हुए पडोसी व उसके परिवार का जला कर मार डाला। इन शराब के लिए शैतान बन गये हैवानों ने पहले पडोसी का दरवाजा बंद किया और खिड़कियों से अंदर मिट्टी तेल छिड़कने के बाद आग लगा कर पडोसी, उसकी पत्नी व उसके भाई की इस आग में जलने से दर्दनाक मौत हो गयी। वहीं पडोसी का दूसरा भाई भी घायल अवस्था में चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
सुत्रों के अनुसार यह घटना इस सीमान्त जनपद मुख्यालय उत्तरकाशी के चंद किमी दूरी पर स्थित कोटियाल गांव में घटित हुई । उस गांव के इस दुर्घटना में मारे गाये व्यक्ति का नाम लाल बहादूर, उसकी पत्नी सीता व भाई रोहित व राजू सोये हुए थे। आग लगाने वाले पडोसी जिनके साथ लाल बहादूर ने शराब पी वह थे करण बहादूर व चंद बहादूर । पहले इन तीनों ने शराब पी। देर होने के बाद लाल बहादूर ने जब और अधिक न पीने व सोने की बात कह कर दोनों शराबी भाईयों को मना किया तो वे नाराज हो गये। शराबी करण व चंदू ने शराब न पीने देने से इतना अंध गुस्से हो गया और दोनों ने थोडी देर बाद जब लाल बहादूर का पूरा परिवार गहरी नींद में सो गया उन्होंने उनका दरवाजा बाहर से बंद कर घर में मिट्टी तेल छिडक कर आग लगा दी। तेजी से फेली इस आग से इस अभागे परिवार को कोई नहीं बचा पाया। इस काण्ड से पूरा क्षेत्र गहरे शोक से स्तब्ध रह गया। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्या हमने इसी शराब के लिए क्या राज्य का गठन किया था। प्रदेश को शराब का गटर बनाने को तुली अब तक की सरकारों के कृत्यों को देख कर आज जरूर राज्य गठन के लिए शहीद हुए राज्य गठन आंदोलनकारियों की आत्मा दुखी हो रही होगी। प्रदेश सरकार को प्रदेश में शराब के कारण हो रही तबाही की रत्ती भर भी चिंता नहीं है। उनकी नजर शराब माफियाओं से मिल रही उनकी तिजोरियों को भर रही दौलत पर टिकी हुई है। सरकारी खजाने की बात तो केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। असल में शराब माफियाओं से इनके सम्बंधों के कारण मात्र 12 साल में उत्तराखण्ड के इन हुक्मरानों ने प्रदेश को पूरी तरह शराब माफियाओं की झोली में धकेल दिया है। प्रदेश के पूरे संसाधनों व तंत्र पर शराब के कारोबारियों का कब्जा हो गया है। प्रदेश की सरकारे बनाने व गिराने में इनका हाथ हो गया है। इनके लिए ही प्रदेश की आबकारी नीतियां ही नहीं अन्य प्रमुख नीतियां भी बन रही है। ये सतह ही आरोप नहीं अपितु ये बाते भाजपा के शासन काल में जल विद्युत परियोजनाओं की जिस प्रकार बंदरबांट में शराब लोबी का बर्चस्व देखा गया और गत वर्ष ही बहुगुणा की सरकार के एक दर्जाधारी नामधारी के कारनामें व उसको संरक्षण दे रहे राजनेताओं व नौकररशाहों की जुगलबंदी से प्रदेश की पूरी राजनीति अपने आप में बेनकाब हो गयी। मुजफरनगर काण्ड को दोषियों को दण्डित करने व प्रदेश में शराब माफिया के राजनेताओं-नौकरशाहों के नापाक गठजोड़ से मुक्ति के लिए सीबीआई जांच कराने की मांग को नजरांदाज करने वाले मुख्यमंत्री बहुगुणा को तो प्रदेश की चिंता कहां रही उन्हें तो केवल सोनिया गांधी को खुश करने के लिए बाबा रामदेव के लापता गुरू की जांच करना ही प्रमुख समस्या दिखाई दे रही थी। इसीलिए उन्होंने शराब कारोबारी पौटी व उनके गुर्गे नामधारी के साथ प्रदेश के राजनेताओं व नौकरशाहों के नापाक गठजोड़ की सीबीआई से जांच की हिम्मत ही कहा है अगर वे निष्पक्ष जांच करते तो उनकी सरकार ही नहीं प्रदेश के अधिकांश दलों के नेता भी पूरी तरह बेनकाब हो जाते। जो अपने निहित स्वार्थ के लिए प्रदेश को शराब माफियाओं का अभ्याहरण बनाने को उतारू हैं।
आज उत्तराखण्ड को इस त्रासदी से कोन उबारेगा। सैनिक व पूर्व सैनिक बाहुल्य इस प्रदेश को शराब का गटर बनाने में केन्द्र सरकार का भी बडा हाथ रहा । जो पूर्व सैनिकों व सैनिकों का कल्याणार्थ सही योजनाओं को लागू करने के बजाय उनको शराबी बना कर तबाह कराने के लिए उनको शराब का कोटा प्रदान कर रही है। इसी शराब के कोटे के लिए कई पूर्व सैनिक इस शराब को ऊंचील दामों में अपने अपने गांवों या शराब मिलने वाली जगहों पर खुले आम बेच रहे है। यहीं नहीं पूर्व सैनिक के निधन के बाद उनकी विधवाओं को भी शराब का कोटा यह बेशर्म सरकार दे रही है। इसे देख कर दो पैसे के लालच में कई विधवायें शराब ला कर इसको अपने गांव या कस्बे में बेच रही है। अनैक पूर्व सैनिक जेसे देशभक्तों को सरकार ने आज शराब का तस्कर बना डाला है। मैने इस शराब के कोटे को खत्म करने के लिए कई बार अपने समाचार पत्र में प्रमुखता से लिखा परन्तु क्या मजाल है सरकार की कानों में जूं तक नहीं रेंगी। कुछ साल पहले मैने जब यह लिखा कि शराब के कोटे को बंद करो, देशभक्त सैनिकों की विधवाओं को शराब परोसने वाली सरकार शर्म करो’ जैसे प्रखर समाचार प्रकाशित किये तो मैने उस लेख में सोनिया गांधी, खण्डूडी व जनरल रावत को धिक्कारा था। इस पर मेजर जनरल खण्डूडी की धर्मपत्नी अरूणा खण्डूडी ने मुझसे कहा कि रावत जी खण्डूडी जी तो शराब को छूते तक नहीं आपने उनको क्यों लिखा, मैने कहा खण्डूडी जी छूये या न छूये शराब इससे मुझे कोई लेना देना नहीं, परन्तु एक जनप्रतिनिधी होने व सैनिक अधिकारी से देश के नेता होने के कारण उनका पहला दायित्व बनता है कि पूर्व सैनिकों व उनकी विधवाओं को बर्बाद करने वाली इस योजना को तत्काल बंद करने के लिए उन्होंने कोई कदम जो उन्हें उठाने चाहिए थे नहीं उठाया, इस लिए उनको धिक्कारा जा रहा है। वे देश की जनता को इस प्रकार से शराब न पिलायें। इसी लेख को कांग्रेसी नेत्री रीता बहुगुणा को कांग्रेस मुख्यालय में पढाते समय उनसे सोनिया जी से तत्काल इस महिला विरोधी कृत्य को रोकने की मांग की तो वह मुह बना कर इस बात के लिए नाराज हुई कि मैने इस लेख में सोनिया जी को इसके लिए धिक्कारा था। रीता बहुगुणा ने मुझसे कहा आपने सोनिया जी के खिलाफ क्यों लिखा... इसके लिए तो तिवारी जी जो उस समय उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री थे उनसे मांग करनी चाहिए थी। मैने रीता बहुगुणा को बताया कि यह मामला उत्तराखण्ड का नहीं अपितु देश का है। इसके लिए केन्द्र सरकार ही जिम्मेदार है। परन्तु इतने साल बाद भी यह समस्या ज्यों की त्यों अपितु इससे और बिकराल बन गयी है। इस की तरफ किसी राजनेता का ध्यान नहीं अधिकांश राजनेता चुनाव में शराब को परोसने में लगे रहते है। सांसद या विधायक के चुनाव में ही नहीं प्रधान के चुनाव तक शराब से पूरा गांव देहात व शहर गटर बना दिये जाते है। कार्यकत्र्ताओं को शराब तो पानी की तरह पिलाई जाती है। युनाव यानी शराब की बाढ़, इस बाढ़ में लोकशाही के साथ साथ समाज की शांति व नैतिकता सब डूब कर दम तोड़ देती है। इस समस्या के निदान के लिए महिला संगठन सहित समाजसेवी लोग आगे आयें तभी इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। जरूरत है उत्तराखण्ड में माओ की तर्ज पर मजबूत नेतृत्व की, जो नशे व राजनैतिक माफियाओं के गठजोड़ से समाज को मुक्ति दिला पाये। शेष श्रीकृष्ण। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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