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Tuesday, May 7, 2013


84 के दंगों के गुनाहगारों को मिले कड़ी सजा 


पंजाब को फिर से आतंक की गर्त में झोंकने वालों पर अंकुश लगाये बादल व मनमोहन सरकार 


नई दिल्ली।(प्याउ)। दिल्ली की एक अदालत द्वारा 84 के दंगों में सज्जन कुमार की संलिप्तता से मुक्त करने के खिलाफ सिखों का आक्रोष निरंतर बढ़ रहा है। सज्जन कुमार सहित तमाम दोशियों को सजा देने की मांग को लेकर सिखों ने संसद की चैखट राश्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर अनिष्चितकालीन धरना षुरू कर दिया है। इसमें सैकडों की तादाद में सिख व अन्य राजनैतिक दलों के लोग भाग ले रहे है। जंतर मंतर पर अरविन्द केजरीवाल की आम पार्टी द्वारा धरना की षुरू किये जाने के बाद भाजपा ने भी इस आंदोलन में चढ़ बढ़ कर भाग ले रही है। आंदोलनकारियों ने न केवल संसद मार्ग पर अपितु सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री के आवास के साथ साथ राश्ट्रपति भवन के समीप विजय चैक पर भी प्रदर्षन किया।
सिखों में इस बात का गहरा आक्रोष है कि 84 के दंगो के दोशियों को आज कई वर्श बीत जाने के बाबजूद सजा नहीं मिली। जबकि दिल्ली में ही हजारों की संख्या में निर्दोश सिखों का कत्लेआम किया गया था। वहीं आम आदमी भी चाहता है कि इस काण्ड के दोशियों के साथ साथ पंजाब में खालिस्तान के नाम पर निर्दोश लोगों का कत्लेआम करने वालों व उनके आकाओं को सजा दी जाय। आम जनता का मानना है कि कोई भी मांग कितनी भी जायज क्यों न हो किसी को भी निर्दोश लोगों का कत्लेआम करने का कोई हक नहीं है। इस प्रकार का कृत्य करने वाले मानवता के सबसे बड़े अपराधी है।
ऐसे  घिनोने अपराधियों को महिमामण्डित करने वाले व संरक्षण देने वाले भी उतने ही दोशी होते है। गौरतलब है कि अमेरिका व पाक सहित पष्चिमी देष दषकों से भारत की एकता व अखण्डता को तबाह करने के लिए खालिस्तान, उल्फा, कष्मीर व नागा अलगाववादियों को संरक्षण व हथियार देते रहे। इन्हीं तत्वों ने पंजाब में भी अलगाववाद का तांडव मचा कर सैकडों निर्दोश लोगों की निर्मम हत्या की। इन्हीं आतंकियों के सफाये करने के लिए की गयी कार्यवाही से क्रुद्ध हो कर अपने आका के इषारों पर आतंकियों ने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इंदिरा की हत्या के बाद गुमराह लोगों ने निर्दोश सिखों का कत्लेआम किया। जो 84 काण्ड भारत के माथे पर बडा कलंक है। पंजाब में आतंक को रौदने का काम बेअंत सिंह की सरकार ने सफलता पायी परन्तु उनको भी आतंकियों ने मौत की घाट उतार दिया। अब पंजाब में आतंकवाद को रोकने में पहले विफल रही अकाली दल बादल की सरकार है। सज्जन प्रकरण की आड में आतंकी फिर सर उठाने का काम कर रहे है। इनको अमेरिका व पाक हवा देने में लगे है।
पंजाब की अकाली सरकार ने जिस प्रकार से विधानसभा में जगजीत सिंह चैहान की मौत पर श्रद्धांजलि देने का काम किया और पंजाब में आतंकवाद के खलनायकों को जो षहीद बताने कर गौरवान्वित करने का काम किया जा रहा है उस पर मूक रह कर भाजपा सहित केन्द्र सरकार भी फिर वहीं गलती दोहरा रही है जो इंदिरा सरकार व बादल सरकार ने 1984 से पहले अलगाववादी तत्वों को नजरांदाज करके किया। 84 के गुनाहगारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए । पर इसके साथ इस आंदोलन के संचालकों को भी अपने आंदोलन से ऐसे तत्वों से दूर रखने की सख्त जरूरत है।

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