भारी विरोध के बाद मंत्री हरकसिंह रावत को छोड़ना पडा तराई बीज विकास निगम की  अध्यक्षता


भाजपाई ही नहीं कांग्रेसी भी इस इस्तीफ से खुश, पर तबविनि के अध्यक्ष पद पर नौकरशाह की नियुक्ति से खुश नहीं कांग्रेसी

देहरादून (प्याउ)। प्रदेश सरकार में कबिना मंत्री होने के बाबजूद तराई बीज विकास निगम सहित दो अन्य अध्यक्षों के पद पर भारी विरोध के बाबजूद बने रहने के लिए अनैक तर्क देने वाले कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने आखिरकार तराई बीज विकास निगम के पद से इस्तीफा दे ही दिया।
भले ही प्रदेश सरकार में कबिना मंत्री के पद पर आसीन डा. हरकसिंह रावत द्वारा तीन विभागों के अध्यक्ष पद पर भी आसीन होने का भारी विरोध विपक्षी दल भाजपा कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश पोखरियाल निशंक ने इस विरोध की कमान संभाली हुई थी। भाजपा ने न केवल विधानसभा में अपितु राज्यपाल से लेकर उच्च न्यायालय में डा. हरक सिंह रावत को मंत्री होते हुए लाभप्रद पदों पर आसीन होने के कारण विधानसभा सदस्यता से निरस्त करने की मांग की।
हालांकि सरकार को तीनों विभागों के अध्यक्ष पद पर बने रहने की अपने तेजतरार मंत्री के दो टूक हट से उनकी विधानसभा सदस्यता को बचाने के लिए तराई बीज विकास निगम के अध्यक्ष पद को लाभप्रद पदों की सूचि से हटाने के लिए अध्यादेश लाने तक का कदम उठाना पडा।  इसके बाद भाजपाा ने उच्च न्यायालय मे भी यह मामला ले गयी। इसके बाबजूद डा हरक सिंह बड़ी मजबूती से अध्यक्ष के पदों से इस्तीफा न देने की हुकार भरते रहे।
भले ही कांग्रेस बाहर से अपने मंत्री के समर्थन में भाजपा की मांग को ठुकरा रही थी और मंत्री के इन अध्यक्ष पदों पर आसीन रहना न्यायोच्चित बता रही थी परन्तु अंदर अंदर कांग्रेस के दिग्गज नेता ही नहीं आम वरिष्ठ कार्यकत्र्ता जिन्हें न तो विधानसभा का टिकट ही पार्टी ने दिया व नहीं सरकार बनने पर लालवत्ती युक्त दायित्व धारी के पद से नवाजा, अधिकांश इस प्रकरण में हरक सिंह रावत के तर्क से नाखुश थे। वहीं हरक सिंह रावत जैसे वरिष्ठ नेता अन्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जो विधायकी व दायित्वधारी बनने से अभी तक वंचित रह गये उनकी सहभागिता बढ़ाने के लिए सरकार पर दवाब डालने की जगह खुद ही तीन पदों पर कुण्डली मार कर आसीन रहे।
अब न्यायालय में अपना कमजोर पक्ष को भांप कर या केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा इस प्रकरण पर नाराज होने की संभावना के दवाव में आ कर हरक सिंह रावत ने आखिरकार 9 मई बृहस्पतिवार को इस विवाद का मूल कारण बने तराई बीज विकास निगम के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे देने के बाद हरक सिंह रावत ने तराई बीज विकास निगम के अध्यक्ष बनने को उचित ठहराते हुए भाजपा की मांग को गलत बताया। उन्होंने इस पद से इस्तीफा देने का मूल कारण कानूनी पचड़ों में न उलझने व अधिक कार्यभार होना बताया। वहीं भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक सहित पूरी भाजपा इसे भाजपा के भारी विरोध के बाद ही डा हरक सिंह रावत इस पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हुए। इसे भाजपा की जीत बताते हुए हरक सिंह रावत के मंत्री रहते हुए इस पद पर आसीन रहने को भी भाजपा न्यायोचित नहीं मान रही है।
इसके साथ तराई बीज विकास निगम के अध्यक्ष पद पर प्रमुख सचिव व एफआरडीसी बीपी पांडेय को आसीन करने से इस पद पर आसीन होने के सपने देख रहे कांग्रेसी वरिष्ठ नेता नोकरशाह को इस पद पर आसीन करने से बेहद आहत है। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा दायित्वधारियों के ऐलान करने में बार-बार टालने की प्रवृति से इन पदों पर आसीन होने के लिए बैताब कांग्रेसी नेताओं में जहां एक तरफ गहरी निराशा छायी हुई हैं वहीं आक्रोश दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। कांग्रेसी नेता प्रदेश में हो रही कांग्रेस की दुर्गति के लिए समर्पित नेताओं की इस प्रकार से बार-बार उपेक्षा करने को भी प्रमुख कारण मान रहे हैं।

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