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Wednesday, May 22, 2013

स्वागत समारोह में गढ़वाल भवन में मुख्यमंत्री बहुगुणा  आते तो नहीं होता विवाद


क्या निशंक प्रकरण से भयभीत है आज भी उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री !

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अगर आज सांयकाल साढ़े पांच बजे दिल्ली में उत्तराखण्ड की सबसे समृद्ध व सबसे पुरानी सामाजिक संस्था गढ़वाल हितैषिणी संस्था द्वारा आयोजित अपने स्वागत सम्मान में पंहुचते तो आज जो विवाद गढ़वाल भवन में बलात कब्जा जमाने वाले से इतना विवाद नहीं होता। बताया गया कि यह विवाद गढ़वाल भवन के बाहर सडक में जबरन भवन में काबिज सेल वाले के बेनर को हटाने पर हुआ। यह छोटा से विवाद इतना गहरा हुआ कि मामला मंदिर मार्ग थाने में दोनो पक्षों को जाना पडा। पहली बार सैकडों की संख्या में गढ़वाल हितैषिणी सभा के सदस्यों ने इस जबरन भवन के एक भाग पर कब्जा करने वाले के खिलाफ मंदिर मार्ग थाने पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। रात के साढ़े नो बजे तक मंदिर मार्ग थाने में जमे उत्तराखण्डी समाज के भारी जमवाडे से पडे  जनदवाब के कारण ही पुलिस द्वारा मिली संरक्षण के बाबजूद सेल वाले को इस पर माफी मांगना पडा। इस विवाद को सुलझाने में बृजमोहन उप्रेती, समाजसेविका गीता चंदोला, श्री भट्ट सहित तमाम पदाधिकारियों को विशेष योगदान रहा।
 इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के सबसे करीबी सिपाहेसलार विधायक सुबोध उनियाल भी पंहुच गये थे । पर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के ना आने पर मुख्यअतिथि के रूप में सम्मानित किया गया। मुख्यमत्री के अंतिम समय तक कार्यक्रम में न पंहुचने से आयोजक निराश हुए अपितु मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए पंहुचे कई लोगों को भी निराशा हाथ लगी। वहीं लोग यह भी मान रहे थे कि अगर मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम को अंतिम समय में रद्द नहीं करते तो गढ़वाल भवन में हुआ विवाद टल जाता। क्योंकि उस समय वहां पर सभी मुख्यमंत्री के आवागमन पर जुटे रहते।  सुत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने बाद में प्रधानमंत्री के रात्रि भोज का बहाना बना कर इस कार्यक्रम में सम्मलित नहीं हुए। बहुगुणा की सामाजिक संगठनों को नकारने की प्रवृति पर दो टूक टिप्पणी करते हुए प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत ने कहा कि जब तक ऐसे आम जनता से दूर रहने वाले व उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं को रौंदने वाले हुक्मरानों का सामाजिक संगठन सम्मान के लिए आतुरू रहेगे तब तक न तो उनको ऐसे राजनेता सम्मान देगे व नहीं जनहितों के लिए ही काम होगा। सामाजिक संगठनों को  हमेशा जनहितों पर कुठाराघात करने वाले नेताओ ंको सम्मान नहीं दुत्कारना चाहिए और जनहित में समर्पित समाजसेवियों को सम्मानित करना चाहिए। तभी समाज में विकास व नैतिक मूल्यों का भी विकास होगा।
यह प्रवृति दिल्ली में उत्तराखण्ड राज्य गठन के समय देखी गयी। उस समय, आंदोलनकारियों के राजनेताओं के प्रति भारी जनाक्रोश के कारण ही जहां कांग्रेसी नेता हरीश रावत सहित तमाम सपा, बसपा व भाजपा के नेताओं को भी जंतर मंतर ही नहीं दिल्ली में अन्य जगहों में कई बार कोप भाजन का शिकार होना पडा था। वहीं राज्य गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री निशंक को राज्य आंदोलनकारियों द्वारा समारोह से खदेड़े जाने की पुरानी घटना के बाद से उत्तराखण्ड का कोई भी मुख्यमंत्री दिल्ली में प्रमुख सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में सम्मलित होने से बचते रहते है। लगता है मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को उनके सलाहकारों ने इन कार्यक्रमों से दूर रहने की सलाह दी है या स्वयं मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा इन सामाजिक संगठनों को कोई महत्व ही नहीं देते हैं। वेसे भी उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री  विजय बहुगुणा पर आम जनता ही नहीं कांग्रेसी कार्यकत्र्ता भी दूरी बनाने का आरोप लगाते रहते है।
दिल्ली में उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद के कार्यक्रम में लगभग तीन साल पहले संसद के समीप काॅस्टीटयूशन क्लब में हुए कार्यक्रम में मैं और मेरे राज्य आंदोलन के साथियों ने तत्कालीन उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को उनकी सरकार के प्रदेश की जनांकांक्षाओं के खिलाफ किये जा रहे कार्यो के लिए उनके अलोकतांत्रिक रवैये व आंदोलनकारियों को मंच से खुली चुनौती देने के कारण बीच भाषण में ही सभागार से बाहर खदेड़ने का काम किया।
आज भी इस निशंक प्रकरण की दहशत उत्तराखण्ड के राजनेताओं के दिलो दिमाग में छाया हुआ है। हरीश रावत व भगतसिंह कोश्यारी को छोड़ कर अधिकांश नेता जनता से दूरी बनाये रहते हैं। दिल्ली में इन दोनों नेताओं के पास आम उत्तराखण्डी काम हो या न हो अपने दुख दर्द को सुनाने जाता है।
22 मई की सांयकाल जेसे ही मैं और मेरे आंदोलन के साथी जगदीश भट्ट गढ़वाल भवन पंहुचे वहां पर गढ़वाल हितैषिणी सभा के तमाम पदाधिकारी व अन्य समाज के प्रमुख लोग गढ़वाल भवन के द्वार पर मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए गाजे बाजों के साथ कतार लगाये खडे थे। थोडी देर बाद मुख्यमंत्री के सिपाहेसलार सुबोध उनियाल भी इटीवी के तेजतरार पत्रकार पवन लालचंद के साथ मुख्यमंत्री के आगमन की इंतजारी में बाहर ही खडे थे। इसी दौरान यह सेल बेनर विवाद भी हुआ। अगर मुख्यमंत्री समय पर आते तो शायद यह विवाद भी नहीं होता। आज गढ़वाल हितैषिणी सभा के समारोह में सभा के अध्यक्ष गम्भीर सिंह नेगी, उपाध्यक्ष प्रताप सिंह असवाल, महासचिव महादेव प्रसाद बलूनी, उदय राम ढौडियाल, द्विवेदी, प्रताप राणा, महावीर राणा, गायककार चन्द्रसिंह राही,  तिवारी, देवेश्वर जोशी, पवन कुमार मैठाणी, रामेश्वर गोस्वामी, दलवीर रावत, मोहब्बत राणा, आर एस नेगी सहित अधिकांश     पदाधिकारी उपस्थित थे। वहीं समाजसेवी व उद्यमी बीएस भण्डारी, पत्रकार सुनील नेगी, अनिल पंत, एसीपी शर्मा, आई एस रावत, कैलाश द्विवेदी,महेश प्रकाश, बृजमोहन सेमवाल, पत्रकार नीरज जोशी, सतेन्द्र रावत, पोखरियाल, डेसू रावत, शिवचरण मुण्डेपी, सागर पुण्डीर बीडी भट्ट, श्री गैरोला, अजय सिंह बिष्ट, एस एस रावत, सहित अनैक प्रतिष्ठित पदाधिकारी उपस्थित थे। 

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