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Thursday, May 16, 2013



केजरीवाल के खुलासे के बाद फिर घिरे कानून मंत्री सहित मनमोहन सरकार 


नई दिल्ली। (प्याउ)। लगता है कानून मंत्री के पद पर ग्रहण लग गया हे। कुछ समय पहले सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोयला आवंटन घोटाले पर सीबीआई जांच में दखल नदाजी करने पर कड़ी फटकार से सरकार की जो किरकिरी हुई। उसने न केवल कानून मंत्री अपितु प्रधानमंत्री सहित पूरी सरकार ही कटघरे में खड़ी हो गयी है। उससे उबरने के लिए कांग्रेस ने मनमोहन सरकार से कानून मंत्री का इस्तीफा दिला कर मंत्री अश्वनी कुमार को बलि का बकरा बनाया गया। कानून मंत्रालय ठीक ठाक से संभालने के लिए कांग्रेस ने कानून के प्रकाण्ड विद्धान कपिल सिब्बल को यह मंत्रालय सोंपा गया। परन्तु यह मंत्रालय मिलते ही नये कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने जिस प्रकार से वोडाफोन मामले में पहला निर्णय लिया उस निर्णय से वे खुद कटघरे में खडे हो गये है। आप पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने 15 मई बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सिब्बल ने कानून मंत्री बनते ही ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन को 11 हजार करोड़ के टैक्स चोरी मामले में फायदा पहुंचाने की कोशिश की है। सिब्बल ये सब अपने बेटे अमित सिब्बल के लिए कर रहे हैं। ताकि सरकार वोडाफोन के खिलाफ 11 हजार करोड़ रुपए टैक्स चोरी का मामला कोर्ट के बाहर निपटा सके। केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने पूछा कि आखिर कानून मंत्री बनने के 24 घंटे के भीतर कपिल सिब्बल ने वोडाफोन के पक्ष में ये फैसला क्यों ले लिया? खुद ही जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा कि दरअसल कपिल सिब्बल के बेटे अमित सिब्बल वोडाफोन की सहयोगी कंपनी हचिंसन के वकील हैं। इसलिए कपिल सिब्बल कंपनी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। केजरीवाल ने कहा कि उनके पास आरोप साबित करने के लिए दस्तावेज भी हैं।
इन आरोपों पर सफाई देते हुए कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए स्पष्ट किया कि उनका बेटा अमित बतौर वकील वोडाफोन से 2007 से 2009 के बीच जुड़े थे। जबकि टैक्स विवाद का मामला पिछले साल आया है। सिब्बल ने कहा कि उनके टेलीकॉम मंत्री बनने के बाद उनके बेटों ने टेलीकॉम से जुड़ा कोई केस नहीं लिया है। इस बीच अमित सिब्बल ने कहा है कि आखिरी बार वह किसी टेलीकॉम कंपनी की सुनवाई में 22 अप्रैल 2010 को कोर्ट में गए थे। जबकि कपिल सिब्बल इसके बाद टेलीकॉम मंत्री बने हैं। गौरतलब है कि कानून मंत्री का पद संभालते ही कपिल सिब्बल ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलासे करने का बडे जोरों से दावा किया था। यह दावा तो कपिल कब पूरा करेगे अब अरविन्द के इस खुलासे से न केवल कपिल अपितु पूरी कांग्रेस पार्टी व उसकी सरकार कटघरे में खडी हो गयी है।

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