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Wednesday, May 29, 2013

खूंखार नक्सलियों व आतंकियों से अधिक खतरनाक हो गये है खुदगर्ज हुक्मरान


अपनों पर पड़ी तो पाताल से भी ढूढ कर दबोचने की हुंकार भर रहे हैं हुक्मरान


छत्तीसगढ़ के दरभा में शनिवार 25 मई को हुए नक्सली हमले में कांग्रेसी नेताओं सहित 29 लोगों को निर्मम ढ़ग से हत किये जाने के बाद अब तक नक्सलियों को आतंकी न मानने वाली केन्द्र सरकार ने अब नक्सलियों को अब लोकतंत्र पर हमला करने वाला खुखार खतरा मानते हुए इन नक्सलियों को देश से उखाड़ फेंकने के लिए उन्हें पाताल से भी दबोचने के लिए कमर कस ली है। सुत्रों के अनुसार इससे पहले पांच दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों  व आम जनता को एक साथ मारने तथा जिला अधिकारी जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का भी अपहरण करके देश की पूरी व्यवस्था को खुली चुनौती का दुशाहस करने वाले खुखार नक्सलियों को आतंकी तक मानने के लिए तैयार नही था। यही नहीं देश की लोकशाही को उखाड फेंक कर पशुपति से तिरूपति तक यानी नेपाल से पूरे भारत को नक्सली राज कायम करने के लिए सशस्त्र हिंसा का तांडव मचाने वाले नक्सलियों के खिलाफ अब तक की कोई भी सरकार मजबूती से इस समस्या के निदान के लिए विकास के असंतुलन को दूर करके व दूरस्थ पिछडे क्षेत्रों में विकास की नयी धारा बहाने तक के लिए तैयार नहीं हुई। विकास के नाम पर इन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जमीन पर विकास होने के बजाय कागचों में हवाई विकास करके भ्रष्टाचार का तांडव मचता रहा। यही असंतुलित विकास व भ्रष्टाचार नक्सलियों को आम उपेक्षित व पीड़ित जनता को देश में लालझण्डा फेहराने के लिए बैताब  नक्सली ही तारनहार व सच्चे हमदर्द नजर आने लगते है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इन सबके खतरनाक मंसूबों को जानने के बाबजूद देश के तमाम हुक्मरान देश की लोकशाही की रक्षा करने के अपने दायित्व का निर्वहन करने के बजाय अपने निहित दलगत स्वार्थो में अंधे हो कर कबूतर की तरह इनको पलने व बढ़ने देते रहे। हालत आज यह हो गयी कि देश के सवा सो से अधिक जनपदों में आज नक्सलियों ने अपने पांव मजबूती से पसार दिये है। इन नक्सलियों को भारत जैसे प्राचीन व समृद्ध संस्कृति वाले देश में बढ़ने देने के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो यहां की अब तक की तमाम जनविरोधी भ्रष्ट सरकार व दिशाहीन राजनैतिक दल।
लोकशाही के नाम पर यहां के हुक्मरानों ने जो खुली लूटशाही का तांडव देश में मचा रखा है, उससे देश की आम जनता न केवल मंहगाई, आतंक व भ्रष्टाचार से त्राही-त्राही कर रही है। यही नहीं आज देश की आम जनता से शिक्षा, चिकित्सा व न्याय तथा रोजगार ही नहीं सम्मान भी कोसों दूर हो गया है। देश की लोकशाही में मनमोहन जैसे संवेदनहीन, पदलोलुपु व जनता से कटे हुए लोगों का कब्जा हो गया है। जाति व धर्म के नाम पर अंधा तुष्टिकरण करने वाले निहित स्वार्थी तत्व देश के रहनुमा बने हुए है। आज अमेरिका व चीन दोनों अपने सांझे प्यादे पाकिस्तान का अंध समर्थन करके उससे भारत को तबाह करने के लिए आतंक की ज्वाला में धकेल रहे है। वहीं चीन भारत की हजारों वर्ग किमी भू भाग कब्जा करने के बाद अब दोस्ती के नाम पर भारत की सीमाओं में मीलों अंदर कब्जा जमाने व भारतीय भू भाग पर अपने टेण्ट ही नहीं मोटर मार्ग का निर्माण कर रहा है। परन्तु क्या मजाल है देश की एकता व अखण्डता पर चीन द्वारा खुले आक्रमण का मुहतोड़ जवाब देने के बजाय भारत की वर्तमान मनमोहनी सरकार चीन के आगे शर्मनाक आत्मसम्र्पण कर रही है, चीन से तुरंत राजनयिक व आर्थिक सम्बंध तोड़ने का सम्मान रक्षा हेतु कार्य करने के बजाय भारत सरकार बेशर्मी से चीन में ही नहीं भारत में भी चीन के आगे मेमना बन कर उसके लिए लालकालीन बिछा रही है।
चीन के गत माह भारतीय सीमा के मीलों अंदर कई दिनों तक कब्जा जमाने व चीन के प्रधानमंत्री के भारत आगमन के बाद जिस प्रकार से नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 30 लोगों की निर्मम हत्या करने का दुशाहस करके भारतीय हुक्मरानों को खुली चुनौती दी है। ये दोनों घटनायें बिना कहे ही बहुत कुछ रहस्य खुद बेपर्दा कर रही है। आज भी अगर भारत सरकार ने नक्सली समस्या सहित देश की तमाम समस्याओं के प्रति कबूतरी दृष्टिकोण रखा तो वह दिन दूर नहीं जब नक्सली भारत के बडे भू भाग पर लाल झण्डा लहराने में सफल हो सकता है वहीं चीन व अमेरिका की शह पर पाकिस्तान भारत के अंदर एक ओर पाकिस्तान बना देगा। आज पाक व नक्सलियो से अधिक देश के लिए खतरनाक साबित हो रही है दिशाहीन पदलोलुपु भ्रष्ट सरकार। आज देश को जरूरत है एक मजबूत नेतृत्व वाली सरकार की, जो अपने निहित दलगत स्वार्थ व पदलोलुपता के लिए देश को बर्बादी की गर्त में धकेलने के लिए उतारू प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसी सरकारों की तरह अपने कर्तव्यों के निर्वहन करने से विमुख न हो। आज मनमोहन सिंह जैसे  पदलोलुपु व खुदगर्ज कमजोर नेतृत्व के कारण जहां सरकारें बेहद कमजोर हो गयी है। शर्मनाक हालत यह है कि सरकार देश की अखण्डता व हितों की रक्षा करने के अपने दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय भ्रष्टाचार का खेल खेलने में ही रत है। इस कारण देश की सुरक्षा के लिए खतरा बच चूके नक्सली व पाक समर्थित आतंकियों से भी अधिक खतरनाक देश के लिए ऐसा कमजोर नेतृत्व व भ्रष्ट सरकार खुद ही  बन गयी है। देश के दुश्मन बने नक्सली व पाक समर्थित आतंकियों का सफाया तो देश के जांबाज सुरक्षा बल पलक झपकते हुए कर सकते हैं परन्तु देश को तबाही के गर्त में धकेलने के लिए उतारू आस्तीन के सांप बन चूके देश के पथभ्रष्ट राजनैतिकों व उनकी भ्रष्ट सरकारों से देश केसे मुक्ति पायेगा,यही चुनौती देश के तमाम देशभक्तों के समक्ष आज है। आज इन पथभ्रष्ट नेतृत्व ने अपने प्यादों को देश के अधिकांश तंत्र पर काबिज कराकर पूरा तंत्र पथभ्रष्ट बना कर आम जनता की पंहुच से बेहद दूर बना दिया है। इनकी सरकारें कहीं जातिवाद के दंश से इस देश को मुक्त करने के बजाय जातिवादी जहर को और फेला रहे है। यही नहीं धर्म के आधार पर देश के विभाजन के बाद भी देश में एक समान कानून व सबको समान अवसर देने के बजाय अंध धार्मिक तुष्टिकरण करने को उतारू है। हालत इतनी शर्मनाक हो गयी कि वोटों के मोह में देश में हिंसा का तांडव मचाने वाले गुनाहगारों को भी सरकार न्यायालय से वाद वापस ले कर उनको रिहा करने की धृष्ठता कर रही है। सरकारों की इस प्रकार की प्रवृति से जहां न्यायालय ही नहीं सुरक्षा बल भी नाखुश है।
शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमों। 

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