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Thursday, May 16, 2013



कांग्रेस व लालू के चक्रव्यूह में फंस कर कहीं चैबे से दुबे न बन जाएं नीतीश



एक तरफ पटना के गांधी मैदान में लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार को आर एस एस का तौता बता कर उनको अवसरवादी बता कर फटकार लगा रहे थे वहीं दूसरी तरफ योजना आयोग बिहार राज्य के पिछड़े जिलों के विकास के लिये चालू वित्त वर्ष के दौरान 2,500 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर रही थी। राजनीति के मर्मज्ञ इसे कांग्रेस गठबंधन की केन्द्रीय सरकार की इसे  कोरी उदारता नहीं अपितु केन्द्र सरकार के प्रमुख घटक कांग्रेस का आगामी लोकसभा चुनाव में राजग गठबंधन से जदयू को दूर करने का एक सोची समझा राजनैतिक दाव ही मान रहे है। गौरतलब है कि 15 मई को जब पटना में लालू यादव जदयू के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गांधी मैदान रेली में फटकार रहे थे उसी दिन योजना भवन में योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह आलुवालिया , बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बैठक कर 12वीं योजना में राज्य के लिये घोषित 12,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज में से 2013.14 के दौरान राज्य के पिछडे इलाकों के विकास हेतु 2,500 करोड़ रुपये जारी करने का ऐलान कर रहे थे।
गौरतलब है कि  कांग्रेस पार्टी को इस बात का अहसास हो गया है कि मनमोहन सरकार के कुशासन से देश की जनता कांग्रेस से काफी आक्रोशित है। आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की रक्षा का चुनाव होगा। इसीलिए वह बहुत ही तिकड़मों का सहारा ले कर राजग गठबंधन के अतिमहत्वाकांक्षी ने
ता नीतीश कुमार को हवा दे रहे है। सुत्रों के अनुसार वर्तमान राजनीतिक हालात को देख कर नीतीश कुमार भी चन्द्र शेखर की तरह प्रधानमंत्री बनाये जाने के लिए कांग्रेस की तरफ आशा भरी नजरों से निहार रहे है।
नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षा को भांपते हुए कांग्रेस ने जो चक्रव्यूह बुना है उसमें नीतीश कुमार काफी हद तक घिरते जा रहे है। परन्तु कांग्रेस व नीतीश कुमार की जुगलबंदी पर जिस प्रकार से लालू यादव मूक हैं वह केन्द्र सरकार को कटघरे में खडा करने से निरंतर बच रहे है। पटना के गांधी मैदान में भी वे केवल नीतीश कुमार पर ही बरसते रहे और केन्द्र पर किसी प्रकार से निशाना साधने से बचते रहे। राजनीति के मर्मज्ञों के अनुसार नीतीश कुमार की मंशा को भांप कर लालू यादव भी नीतीश कुमार की हालत चैबे से दुबे बनाने में जुट गये है। वह कांग्रेस से सीधे दुश्मनी लेने के बजाय नीतीश कुमार को ही कटघरे में रख कर नीतीश के समर्थकों में एक संदेश पंहुचाना चाहते हैं कि नीतीश फिरकापरस्तों को मजबूत करने में जुटे है। अगर नीतीश से बिहार का अल्पसंख्यक वर्ग व पिछड़ा वर्ग दूर होता है तो नीतीश की हालत उस चैबे की तरह होनी निश्चित है जो छबे बनने चले थे पर दुबे बन कर लोटे। क्योंकि कांग्रेस से पींगे बढाते देख कर राजग के प्रमुख घटक भाजपा भी अब अंदर से नीतीश को सबक सिखाने का मन बना चूकी है। वहीं कांग्रेस का कोई भरोसा नहीं। नीतीश कुमार अभी न तो भाजपा से बाय बाय कर सकते हैं व नहीं सीधे कांग्रेस के साथ गलबहियां कर सकते है। इस कारण वह बेहद दुविधा में है। इसी दुविधा का लाभ उठाते हुए लालू यादव निरंतर नीतीश पर प्रहार कर रहे है। उन्होंने नीतीश को आर एस एस का तोता बताते हुए कहा कि  जब तक लालू और बिहार की धमनी में खून का एक भी कतरा बचा रहेगा तब तक दिल्ली की गद्दी पर फिरकापरस्त ताकतों को काबिज नहीं होने देंगे। राजद प्रमुख लालू ने याद दिलाया  कि जेपी आंदोलन के समय भी इसी गांधी मैदान में उन्होंने यह कसम खायी थी कि भारत को तोड़ने और टूटने नहीं देंगे और सभी धर्म के लोग साथ रहेंगे तथा इस बखिया को उजाड़ने वाली ताकत को मुंहतोड़ जवाब देंगे।
लालू यादव कांग्रेस से अभी सीधे टकराव नहीं चाहते हैं। वह लोकसभा चुनावों में अपनी ताकत बढाने में सारा ध्यान लगा रहे है। उनको इस बात का भान है कि बिहार की जनता अभी कांग्रेस को घास नहीं डालने वाली। इसलिए वह नीतीश पर पूरा ध्यान लगाना चाहते है। उनकी नजर में आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार में होने वाली चुनावी जंग भी लालू व नीतीश के बीच ही होगी। भाजपा जहां नीतीश को विश्वासघात का सबक सिखायेगी। वहीं कांग्रेस मनमोहन के कुशासन के दंश से आहत देश की जनता के साथ साथ बिहार की जनता के कोप का भाजन बनेगी। इन समीकरणों को देखते ही लालू का नीतीश को दुबे बनाने का अभियान कहां तक सफल होगा यह आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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