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Monday, November 5, 2012


विश्व शांति व मानवता के लिए कल्याणकारी है ओबामा को दोबारा राष्ट्रपति बनना

वाशिंगटन(प्याउ)। विश्व का स्वयंभू थानेदार बना अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 6 नवम्बर को अमेरिकी मतदाताओं ने अपने साथ साथ विश्व लोकशाही के भाग्य का फैसला किया। विश्व लोकशाही को प्रभावित करने वाले इस चुनाव में अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति यानी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी ओबामा व रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी मिट रोमनी के बीच हुआ। अमेरिका में 16.90 करोड़ मतदाताओं है। जो सीधे अमेरिकी के राष्ट्रपति के साथ साथ  एक नए हाउस आॅफ रिप्रजेंटेटिव्स, 33 सीनेटरों और हजारों स्थानीय जनप्रतिनिधि अधिकारियों का चुनाव करते है। यहां राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्येक राज्य में आबादी के आधार पर निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कालेज) के मतों की कुछ तय संख्या होती है। इस व्यवस्था के तहत 538 निर्वाचक मंडल के मत उपलब्ध हैं और जीतने के लिए इनमें से 270 मत हासिल करना जरूरी है।यहां पर जहां ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति होने के साथ साथ विश्व मानवता व लोकशाही के लिए कल्याणकारी मानते हुए अमेरिकी अधिकांश मतदाताओं के साथ साथ विश्व के अधिकांश शांतिप्रिय लोग उनको राष्ट्रपति के रूप में दोबारा विजयी होते देखना चाहते है। क्योंकि आज भी लोगों के जेहेन में रिपब्लिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश के कार्यकाल के जख्मों का दंश रह रह कर विश्व मानवता को रूला रहा है। गौरतलब है सोवियत संघ के विखराव कराने में सफल होने के बाद जिस ढ़ग से पूरे विश्व की लोकशाही व शांति पर ग्रहण लगा कर स्वयंभू थानेदार बन गया है। उससे विश्व मानवता पीडि़त है। अमेरिकी राष्ट्रपति बुश के कार्यकाल में जिस प्रकार से अफगानिस्तान, इराक में विश्व जनमत को रौंदने का कार्य अमेरिका ने किया उससे पूरी मानवता व लोकशाही आज भी शर्मसार है। आज अमेरिका अपनी सामरिक ताकत के बल पर लीबिया सहित 70 से अधिक देशों में अपनी उपस्थिति बना कर वहां की हुक्मरानों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से हांक रहा है उससे लोग चाहते हैं कि किसी प्रकार से अमेरिका का नेतृत्व बुशवादी पार्टी रिपब्लिकन के हाथों में न आये। आज अमेरिका के हाथों में प्रत्यक्ष रूप से संयुक्त राष्ट्रसंघ से लेकर नाटो सहित विश्व के तमाम देशों के हुक्मरान है। संसार भर में चाहे फिलीस्तीन हो या कश्मीर, अफगानिस्तान हो या कोरिया, पाक हो या अन्य अशांत क्षेत्र सभी जगह असंतोष को हवा देने में अमेरिका का प्रत्यक्ष हाथ है। विश्व मानवता के लिए आतंक की फेक्टरी बन चूके पाकिस्तान को शर्मनाक संरक्षण देने में अगर किसी का हाथ है तो वह अमेरिका। यही नहीं जिस आतंकवाद के नाम पर दुनिया को भयभीत करके उसकी आड में पूरे विश्व को अपने शिकंजे में जकड़ा हुआ है उस ओसमा के नेतृत्व वाले अलकायदा व तालिबान को पाल पोष कर इतना खुंखार बनाने में किसी और का नहीं अपितु अमेरिका का ही पूरा हाथ है। आज विश्व लोकशाही को जहां एक तरफ अमेरिका द्वारा पोषित व संरक्षित  आतंकी पाक, अलकायदा व तालिबान से खतरा है वहीं दूसरी तरफ इससे भी अधिक खतरा अमेरिका की बलात विश्व का थानेदार बनने की विस्तारवादी प्रवृति से खतरा है। आज अमेरिका के इस खतरे के साथ साथ आज चीन भी विश्व लोकशाही के लिए खतरा बन गया है। उसकी भी अमेरिका की तरह प्रभुतवादी प्रवृति बेहद खतरनाक है। इसलिए विश्व जनमत चाहता है कि अमेरिका का नेतृत्व बुशवादी रिपब्लिकन पार्टी के हाथों में न हो कर ओाबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों में रहे।  अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में कम से कम  छह अरब डालर खर्च हो रहा है।

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