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Thursday, November 15, 2012


राहुली चक्रव्यूह का कैसे मुकाबला करेगी अपनों के ही चक्रव्यूह में फंसी भाजपा 
एक तरफ देश की प्रमुख विपक्षी दल भाजपा न तो अभी अपने प्रधानमंत्री पद के दावेदार का नाम ही सार्वजनिक कर पा रही है वह नहीं वह पार्टी अध्यक्ष की कमान किसके हाथों में 
रहेगी इसकी भी घोषणा नहीं कर पा रही है। भाजपा की राह में इस बार सबसे बडा अवरोधक भ्रष्टाचार व मंहगाई आदि से जनता की नजरों में बेनकाब हो चूकी सत्तारूढ़ कांग्रेस नहीं अपितु अतिमहत्वाकांक्षी, सत्तालोलुपु, आत्मघाति नेता ही है। जो मैं बनूंगा प्रधानमंत्री तू नहीं के द्वंद में चुपचाप अपने ही दल के नेताओं के गुप्त कारनामों को बेनकाब करके भाजपा की जगहंसाई करा रहे है। इसी कारण आज विवादों में घिरे गडकरी को फिर से अध्यक्ष के पद पर चाहते हुए भी संघ ताजपोशी कर पा रही है और नहीं आम कार्यकत्र्ताओं एंव आम जनता में प्रधानमंत्री के सबसे पसंदीदा उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के नाम का ऐलान भाजपा भावी प्रधानमंत्री के रूप में ही कर पा रही है। कांग्रेस को पटकनी देने के लिए आज देश में कोई ऐसा मजबूत सांझा विपक्ष भी नहीं दिखाई दे रहा है। कुल मिला कर एक भाजपा वह भी आपसी द्वंद में इतनी बंटी हुई है। यह ही प्रबुद्ध जनों को चिंता का विषय है। इससे भाजपा कार्यकत्र्ताओं व कांग्रेस के कुशासन से व्यथित जनता में भाजपा नेताओं की इस आत्मघाती कुनीति से गहरी निराशा है। कांग्रेस का सत्ता में काबिज होने का अनुभव व अकूत संसाधनों के बल पर अंदर से बिखरी भाजपा कैसे मुंहतोड जवाब देगी यही लोगों के बीच चिंता का विषय है।
वहीं दूसरी तरफ देश की सत्ता में काबिज कांग्रेस ने चुनावों के लिए राहुल गायी के नेतृत्व में अपनी तस्वीर ही नहीं अपितु अपना चक्रव्यूह का ऐलान भी कर दिया है। गौरतलब है कि इसी नवम्बर माह में हरियाणा के सुरजकुण्ड में आयोजित हुए संवाद शिविर में लिये गये निर्णय के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर 15 नवम्बर बृहस्पतिवार को कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव समन्वय समिति के गठन के साथ साथ तीन उप समितियों के गठन का भी ऐलान किया। चुनाव समन्वय समिति में राहुल गांधी के अलावा अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह, मधुसूदन मिस्त्री व जयराम रमेश है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कांग्रेस को 2014 में फिर से सत्तासीन करने के उदेश्य से बनायी गयी चुनाव समन्वय समिति व तीन उपसमितियों का ऐलान किया गया। तीन उप समितियों में चुनाव पूर्व गठबंधन उप समिति में ए के एंटनी, वीरप्पा मोइली, मुकुल वासनिक, सुरेश पचोरी, जितेन्द्र सिंह व मोहन प्रकाश है। चुनाव पूर्व गठबंधन उपसमिति में एके एंटनी, वीरप्पा मोइली, मुकुल वासनिक, सुरेश पचैरी, जितेंद्र सिंह और मोहन प्रकाश सदस्य होंगे। दूसरी उपसमिति को संचार एवं प्रचार उपसमिति के नाम से बनाया गया है इसमें दिग्विजय सिंह,अंबिका सोनी, मनीष तिवारी, दीपेंद्र हुड्डा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजीव शुक्ला एवं भक्त चरणदास को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा चुनाव घोषणा पत्र एवं सरकारी कार्यक्रम उप समिति बनायी गयी है इसमें एके एंटनी , पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, आनंद शर्मा, सलमान खुर्शीद, संदीप दीक्षित, अजित जोगी, रेणुका चैधरी, पीएल पुनिया और मोहन गोपाल (विशेष आमंत्रित) शामिल किए गए हैं।
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1 comment:

  1. None of the political parties deserve to be favoured firstly. UPA has proved deaf and dumb, and even paralysed in tackling with black money and Lokpal bill both. Also, your favour of Bal thackerey is to laugh at. He was a threat to the nation's unity.

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