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Sunday, November 4, 2012


गैरसैण पर सरकार के निर्णय स्वागतयोग्य पर स्थाई राजधानी ही बने गैरसेंणः सांसद प्रदीप टम्टा

स्थाई राजधानी गैरसेंण तक संघर्ष जारी रहेंगे आन्दोलनकारी 

नई दिल्ली(प्याउ)।उत्तराखण्ड सरकार द्वारा गैरसेंण में विधानसभा भवन बनाने व साल का एक सत्र का आयोजन गैरसेंण में करने के निर्णय को सकारात्मक कदम बताते हुए अल्मोडा संसदीय क्षेत्र के जन संघर्षो से जुडे रहे कांग्रेसी सांसद प्रदीप टम्टा ने दो टूक शब्दों मेें कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदेश सरकार को गैरसेंण में ही प्रदेश की स्थाई राजधानी की घोषणा करनी चाहिए। सांसद प्रदीप टम्टा ने उक्त विचार 4 नवम्बर को दिल्ली स्थित अपने संसदीय आवास में उत्तराखण्ड राज्य गठन के प्रमुख संगठन उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत व महासचिव जगदीश भट्ट, उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद के पूर्व महासचिव दाताराम चमोली व वरिष्ट राजनैतिक समीक्षक ताराचंद गौतम से गैरसेंण पर प्रदेश सरकार के निर्णय पर अपने विचार प्रकट करते हुए कही। सांसद प्रदीप टम्टा के विचारों से सहमति प्रकट करते हुए राज्य गठन आंदोलनकारी देवसिंह रावत ने प्रदेश सरकार के कदम को अब तक की तमाम सरकारों के कदम से बेहतर व जन हितों को साकार करने की दिशा में सराहनीय कदम बताया। इसके साथ उन्होंने साफ किया कि प्रदेश की जनता व आंदोलनकारी गैरसेंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में नहीं अपितु स्थाई राजधानी के रूप में ही देखना चाहती है और इसके लिए हम सब आंदोलनकारी तब तक निरंतर संघर्ष किया जायेगा जब तक प्रदेश सरकार गैरसेंण में स्थायी राजधानी गठित न कर दे। पत्रकार दाता राम चमोली व जगदीश भट्ट ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को इसे ग्रीष्म कालीन के चक्र में न फंसा कर इसे तुरंत ही स्थाई राजधानी घोषित करे। इस अवसर पर सांसद प्रदीप टम्टा को उनके गैरसेंण पर प्रदेश की जनांकांक्षाओं के अनरूप विचारों के लिए धन्यवाद देते हुए आशा प्रकट की कि वे प्रदेश की राजधानी गैरसेंण में बनाने के लिए निरंतर चट्टान की तरह डटे रहेंगे।

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