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Thursday, November 15, 2012



डूबते हुए जहाज कांग्रेस की कमान राहुल को सोंप कर क्यों जश्न मना रहे हैं कांग्रेसी मठाधीश 

राहुल की राह रोकने के साथ साथ जनादेश का अपमान कर रहे हैं आत्मघाती कांग्रेस मठाधीश

कांग्रेसी राहुल गांधी को 2014 के आम चुनाव की कमान देने को ऐसे प्रचार कर रहे हैं कि मानों उन्होंने राहुल के राजतिलक की पूरी तैयारी कर दी है। हकीकत यह है कि गांधी नेहरू परिवार की बची खुची साख की बदोलत हासिल जनादेश का घोर अपमान मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व वाली सरकार में करके देश के साथ साथ देश की आम जनता का जीना ही दुश्वार कर रखा है। ऐसे में जब जनता का कांग्रेस से पूरी तरह से मोह भंग हो गया और कांग्रेस पार्टी एक डुबता हुआ जहाज बन गयी है, उसकी पतवार को राहुल गांधी के हाथों में सौंपने का एक ही अर्थ होता है कि राहुल के भविष्य पर भी ग्रहण लगाना। आज जो जरा सी भी कांग्रेस की राजनीति को करीब से जानता है उसे मालुम है कि आज भी कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के ही पास है। परन्तु राहुल गांधी इतना असहाय कांग्रेसी मठाधीशों जो उनके साथ 2014 के उस तथाकथित समन्वय समिति में भी प्रमुखता से सदस्य हैं ने बना रखा है कि उनको देश की जनता को दिये गये कांग्रेस के वचनों को पूरा करने का दायित्व तक नहीं सौंपा जा रहा है। आखिर किस मुंह से राहुल गांधी 2014 में कांग्रेस के लिए जनादेश मांगेगे? क्या आम जनता को मंहगाई से जीना हराम करने के नाम पर या देश में एक के बाद एक भ्रष्टाचार का कलंक लगाने वाली सरकार के कारनामों के बल पर?
आज जिस प्रकार से कांग्रेसी मठाधीशों ने राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाने का ऐलान करके राहुल गांधी को महत्वपूर्ण दायित्व देने की बात समाचार चैनलों व पत्रों में बडी प्रमुखता से प्रचार किया वह एक प्रकार देश की जनता की आंखों में धूल झोंकने के साथ साथ राहुल गांधी के नेतृत्व पर ग्रहण लगाने के साथ साथ जनादेश का घोर अपमान भी है।
कांग्रेसी एक तरफ यह प्रचार कर रहे हैं कि 2014 के लोकसभा के आम चुनाव की कमान राहुल गांधी के हाथों में है। जबकि हकीकत यह है कि मनमोहन सिंह सरकार  अपने कुशासन, भ्रष्टाचार, मंहगाई व आतंकी दहशत से देशवासियों व देश को इतना परेशान व पतन की गर्त में धकेल देंगे कि 2014 में आम जनता कांग्रेस का नाम से धृणा सा करने लगेंगे।
 अगर कांग्रेस पार्टी के दिग्गजों को जरा सी भी देश, आम जनता व कांग्रेस से ही सहानुभूति रहते तो वे 2014 से कई साल पहले ही देश की आम जनता का जीना अपने कुशासन से बेहाल करने वाले मनमोहन सिंह को बनाये रख कर एक प्रकार से कांग्रेस के पक्ष में मिले जनादेश का अपमान किया। जनादेश में कांग्रेस नेतृत्व को देश की सरकार का नेतृत्व करने का जनादेश था न की अमेरिकी परस्त मनमोहन सिंह को देश का प्रधानमंत्री बना कर आम जनता के साथ साथ भारत के हितों पर ग्रहण लगाने का। कांग्रेसियों ने  सोनिया गांधी को इतना असहाय व कमजोर बना कर आम जनता से पूरी तरह से काट दिया है। न तो आम जनता से सोनिया गांधी का सीधा संवाद है व नहीं राहुल गांधी का। केवल उन्हीं लोगों को राहुल व सोनिया गांधी से मिलाया जाता है जो कांग्रेसी नेतृत्व को गुमराह करके अपने निहित स्वार्थ पूरा करने वाली कटोरी की पसंद हो। यह कटोरी नहीं चाहती है कि देश में कांग्रेस अपने बल पर सरकार बनाये व और मजबूत हो। इसी कारण उन्होंने ऐसा ताना बाना बुना हुआ है कि कांग्रेस आम आदमी से दूर हो जाये। इसके साथ ही देश व कांग्रेस पार्टी के हितों पर भी जो कुठाराघात हो रहा है उसको जनता से कटे रहने के कारण न तो सोनिया गांधी व नहीं राहुल गांधी को इसका अहसास हो रहा है। मनमोहन सिंह, मोंटेक, चिदम्बरम व कपिल सिब्बल जैसे हुक्मरानों को न तो इस देश की आम जनता का ही भान है व नहीं देश का। कांग्रेस पार्टी रहे या न रहे इनको इससे भी कोई लेना देना नहीं है। ऐसा ही कांग्रेस में अधिकांश महासचिवों का है। इनको न तो कांग्रेस से कुछ लेना देना है व नहीं देश तथा नहीं आम जनता से। न हीं अधिकांश जो लोग सरकार व संगठन में काबिज है उनका कहीं कभी समाजसेवा का जमीनी अनुभव नहीं रहा। यही नहीं आम जनता से कभी आम जीवन में संवाद करने को ये लोग अपनी शान के खिलाफ समझते है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के इन मठाधीशों द्वारा राहुल गांधी को 2014 के आम चुनावों की कमान सौंपना किसी षडयंत्र से कम नहीं। अगर वे हितैषी होते तो वे मनमोहन को सत्ता से बेदखल कर राहुल गांधी के हाथों में कांग्रेस पार्टी द्वारा जनादेश मांगते समय किये गये वायदों को पूरा करने का दायित्व सोंपते।


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