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Friday, December 14, 2012


अमेरिका व चीन के विद्यालय में 14 दिसम्बर की हिसंक हमलों से स्तब्ध विश्व

नैतिक शिक्षा व अनैतिक विकास के कारण विक्षिप्त हिंसक हो रहा है आधुनिक विकसित समाज

विश्व को कल्याणकारी देने में नकाम रहा अमेरिका की विकसित पश्चिमी व्यवस्था व चीन का साम्यवाद भी 


14  दिसम्बर को दुनिया के सबसे विकसित व महाशक्ति बने अमेरिका व चीन के प्राथमिक स्कूलों में अबोध विद्यार्थियों पर हमलावर द्वारा अकारण किये गये हमलों से पूरा विश्व स्तब्ध है। अमेरिका के प्राथमिक विद्यालय में हमले में 20 बच्चों सहित 27 लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी। वहीं चीन में एक महिला सहित 22 बच्चों को हमलावर ने चाकू से ताडबतोड़ हमला करके घायल कर दिया।  एक ही दिन संसार के सबसे विकसित,सभ्य, शिक्षित व महाशक्ति होने का दम्भ भरने वाले इन दो देशों में इस प्रकार की हिंसक घटना से पूरे विश्व को सोचने के लिए विवश कर दिया कि आखिर हम पूरी दुनिया को किस दिशा में ले जा रहे हैं? अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा स्तब्ध हो कर आंसू बहा रहे हैं वहीं चीन ऐसी खबरों को दबाने में लगा है। क्या आज हमारा तथाकथित विकसित दुनिया की शिक्षा व्यवस्था व विकास का ढांचा इतना अनैतिक हो गया कि कोई भी आदमी अपनी सनक अबोध बच्चों का कत्लेआम करने के लिए उतारू हो जाता है? 14 दिसम्बर को अमेरिका व चीन में घटित इस प्रकार की घटना ने पूरे विश्व के प्रबुद्ध लोगों को इस विषय पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया। चीन के हमलावर के पास अगर अमेरिकी हमलावर की तरह बंदूकें होती तो वह भी इन बच्चों को मौत के घाट उतार देता। चीन में अवैध हथियारों पर कडा नियंत्रण होने से अमेरिकी की तरह आसानी से लोग हथियारों को नहीं रख सकते है। दोनों के इरादों में यही समानता थी कि दोनों हिंसक मनोवृति का शिकार अबोध बच्चों की निर्मम हत्या करने के लिए आमदा थे। परन्तु दोनों घटनाओं ने इन देशों के हुक्मरानों, बुद्धिजीवियों को अपने विकास व शिक्षा व्यवस्था पर सोचने के लिए विवश कर दिया।  काले शुक्रवार 14 दिसम्बर की प्रातः को दुनिया के इन दोनों वर्तमान व भविष्य समझी जाने वाले देशों में ऐसी घटनायें घटी जिसने विश्व को सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि  यह शिक्षा, सभ्यता व विकास वर्तमान संसार को किस दिशा में ले जा रहा है?  क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था व समाज इतना कमजोर व असुरक्षित हो गया कि वह यकायक अकारण ही निर्दोष बच्चों का भी सामुहिक हत्या करने के लिए उतारू हो जाता हैं।

अमेरिका के लिए काला शुक्रवार यानी ब्लेक फ्राइडे साबित होने वाला 14 दिसम्बर की प्रातः 9.41 बजे 2 स्वचालित बंदूक लिए इस विक्षिप्त आतंकी व्यक्ति ने इस विद्यालय में पढ़ाने वाली अपनी माॅं, स्कूल की प्रद्यानाचार्या, मनोचिकित्सक  सहित स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अपनी गोली का शिकार बनाने के बाद खुद को भी गोली मार कर आत्महत्या कर ली। पहली से चोथी कक्षा तक की शिक्षा प्रदान करने वाले इस विद्यालय में 600 विद्यार्थी पढ़ते थे इसी स्कूल में हमलावर का बेटा भी पढ़ता था।  इस खबर से पूरा अमेरिका स्तब्ध है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने समाज में बढ़ रही इस प्रकार की त्रासदी की खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाये। सवाल यह है कि क्यों आद्युनिक शिक्षा, विकसित सम्भ्यता के चकाचैध में भी अमेरिकी और अन्य विकसित समाज आज विक्षिप्तता की तरफ बढ़ रहा है।
अमेरिका में 14 सितम्बर शुक्रबार की प्रातः 9.41 बजे एक  24 वर्षीय युवा द्वारा क्नेक्टीकट राज्य के एक विद्यालय में अंधाधुंध गोली चला कर 20 बच्चों सहित 27 लोगों की निर्मम हत्या करके खुद की भी जीवन लीला समाप्त कर दी। इस घटना से अमेरिकी राष्ट्रपति सहित पूरा विश्व स्तब्ध है। क्यों आधुनिक विकसित समाज में भी लोग अचानक इतने हिंसक हो रहे हैं जो निर्दोष लोगों को अपनी सनक का शिकार बनाने के लिए उतारू हैं।
मध्य चीन के हेनन प्रांत के चेंनपेंग गांव में प्राथमिक स्कूल के मुख्य गेट के पास एक 36 वर्षीय हमलावर ने  चाकू से ताडब तोड हमला करके एक बुजुर्ग महिला सहित 22 बच्चों को घायल कर दिया। निर्दोष अबोध बच्चों पर चाकू से ताडबतोड हमला कर रहे इस स्थानीय हमलावर को स्कूल के सुरक्षा गार्डो ने दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया। घायल बच्चों को निकटवर्ती अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीबीसी के अनुसार एपी व शिन्हुआ द्वारा इस सम्बंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार चीन में कुछ समय से बच्चों पर लगातार हमले की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है।  2010 में भी पूर्वी चीन में बच्चों के एक स्कूल में एक व्यक्ति ने 28 छोटे बच्चों, उनके दो शिक्षकों और एक सुरक्षा गार्ड पर चाकू से हमला करने की घटना के बाद विद्यालयों में सुरक्षा गार्डो की तैनातगी कर दी गयी थी। अमेरिका में एक 24वर्षीय युवा रायन लांजा ने क्नेक्टीकट प्रांत कें एक विद्यालय में अंधाधुंध गोलीवारी करके 20 बच्चों सहित 27 लोगों की निर्मम हत्या की।

संसार स्तब्ध है विकसित दुनिया की शिक्षा व्यवस्था व विकास का ढांचा इतना अनैतिक हो गया कि कोई भी आदमी अपनी सनक अबोध बच्चों का कत्लेआम करने के लिए उतारू हो जाता है? यह समस्या केवल अमेरिका व चीन की ही नहीं अपितु पूरा संसार इस समस्या से जुझ रहा है। चारों तरफ हिंसक समाज दिन प्रतिदिन मजबूत हो रहा है। कोई राष्ट्र के नाम पर तो कोई धर्म के नाम पर अपने वर्चस्व को स्थापित करने के लिए संसार में कत्लेआम कर रहा है। देशों में धर्म, जाति, क्षेत्र, दल व व्यक्ति के नाम पर लोग समाज में आपस में एक दूसरे का शोषण करने के लिए हिंसा को ही हथियार बना रहे है। पश्चिमी देशों सहित भारत छोड कर अधिकांश दुनिया में दिशाहीन सत्तालोलुपु शासकों ने कभी सिकंन्दर, हिटलर , कभी विक्टोरिया, कभी चंगेज, कभी मुगलिया तो कभी बुश  के रूप में दुनिया को अपनी हिंसक मनोवृति का शिकार बनाया। आज भी अमेरिका जहां अफगानिस्तान, इरान, लीबिया में भारी तबाही मचाये हुए है। 70 से अधिक देशों में अपनी सामरिक ताकत के बल पर वहां की लोकशाही पर अंकुश लगाये हुए है। एक तरफ अतिवादी  इस्लामिक  हिंसा से पूरा विश्व त्राही त्राही कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका व चीन जैसे देशों की विस्तारवादी शोषक प्रवृति विश्व शांति पर ग्रहण लगाये हुए है।
दिशाहीन व अनैतिक शासकों के कुशासन के कारण चारों तरफ अमर्यादित व असुरक्षित समाज हो गया है। एक तरफ चंद लोगों के पास अकूत सम्पति की अटालिकायें खड़ी हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ अरबों लोग जीवन बसर करने के लिए मोहताज है। संसार को अनादिकाल से दिव्य ज्ञान, विकास व कल्याणकारी समाज से आलौकित करने वाला भारत भी पश्चिमी फिरंगी समाज का अंधानुशरण करके आज अमेरिका व चीन की तरह अनैतिकता के दंश से पीडि़त है। अपनी दिव्य सनातन मूल्यों को छोड़ कर पश्चिमी समाज के अंधानुशरण के कारण भारत में भी मनमोहन, मोंटेक, चिदम्बरम जैसे शासकों द्वारा किये जा रहे कुशासन से देश के आम जनता से न केवल शिक्षा, चिकित्सा, न्याय व रोजी रोटी से एक प्रकार से वंचित हो गये हैं। हालत यह है कि इनके कुशासन से जहां मंहगाई, आतंकवाद व भ्रष्टाचार से पूरी व्यवस्था पतित हो गयी है वहीं आम आदमी का जीना ही दूश्वार हो गया है। परन्तु आम आदमी की बात कहने वाली कांग्रेस पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी व उनकी सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सहित किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है। यही हालत अन्य दलों की हो रखी है। आम आदमी से देश के शासक वर्ग ही नहीं  आम राजनैताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों व समाजसेवियों का कहीं दूर दूर तक सरोकार नहीं रहा। इससे आम आदमी अपने आप को बेहद असुरक्षित पा रहा है। ऐसे में ही विक्षिप्ता व हिंसक मनोवृति जन्म लेती है। हमारे समाज व देश में खुद को समर्पित कर सर्वजन सुखाय व सर्वजनहिताय का समाज रहा था। व्यक्ति हमेशा समाज व राष्ट्र के साथ नैतिक मूल्यों के लिए अपने आप को कुर्वान कर देता था। परन्तु आज उल्टा हो गया, देश व समाज के हितों को दाव पर लगा कर व्यक्ति अपने निहित स्वार्थ, पद व तिजेारी को वरियता दे रहा है। आज जरूरत है विश्व शांति व अमन के लिए कि हमें नैतिक मूल्यों जिसमें सर्वभूतहितेरता यानी सबके कल्याण के लिए कार्य करने वाला शासन व्यवस्था व शिक्षा व्यवस्था हो उसको आत्मसात करने की। आज संसार भ्रष्टाचार से नैतिकता विहिन शिक्षा से ऐसा दंश झेल रहा है कि तमाम विकास के बाबजूद समाज व व्यक्ति घोर हिंसा से आक्रांत हो रखा है। व्यक्ति आज या तो अपने आप को घोर अकेला व असुरक्षित समझ रहा है या अन्य समाज को हेय समझ कर उनको कत्लेआम करने के लिए उद्दत है। आज जरूरत है विश्व को प्राणीमात्र के कल्याण की राह दिखाने वाली व शास्वत दिव्य ज्ञान का बोध कराने वाली भारतीय संस्कृति का अनुशरण करने की। इसी पथ में जा कर ही विश्व का भौतिक विकास समाज के शांति पर ग्रहण लगाने वाला कारक नहीं बनेगा। आज स्पष्ट हो गया कि चीन के साम्यवाद व अमेरिका का पश्चिमीवाद दोनों मानव  समाज को एक चिर कल्याणकारी व्यवस्था देने में नकाम है। इन व्यवस्था में व्यक्ति अपने आप में अकेला व असुरक्षित महसूस करता है। इन समाजों में परिवार नाम संस्था इतनी गौण हो गयी कि व्यक्ति को अपने बच्चों व परिजनों का कोई महत्व नहीं है। जबकि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति खुद से बढ़कर अपने परिवार, समाज, देश व मूल्यों के साथ जुडा पाता है। यहां पर अपनत्व का समावेश है जबकि अन्य में व्यक्ति हर मोड़ में अपने आप को अकेला पाता है। भारत में भी पश्चिमी शिक्षा व समाज का अंधानुशरण करने से यह विकास काफी पैर पसार रहे है। इससे समाज में टूटन दिख रही है। परन्तु  इस विश्व में केवल भारतीय प्राचीन जातिवाद रहित व्यवस्था की चिर कल्याणकारी साबित हो सकती है। जिस संस्कृति को भारत के वर्तमान शासक, राजनेता व बुद्धिजीवी हेय समझ रहे है वही प्राचीन भारतीय संस्कृति ही भटके व हिंसक मनोवृति से ग्रसित भौतिक विकास का मद में चूर समाज को कल्याणकारी मूल्यों युक्त व्यवस्था दे सकता है। शेष श्री कृष्णाय् नमो। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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