Pages

Sunday, December 30, 2012


दामिनी प्रकरण पर पूरे विश्व के समक्ष खुद नपुंसक बन गयी मनमोहन सरकार 


बलात्कारियों को मृत्यु देने के लिए क्यों नपुंसक बन रही है मनमोहन सरकार 

जिस प्रकार से खबरों में जो सुनने में आ रहा है कि कांग्रेस गठबंधन वाली सप्रंग सरकार बलात्कारियों को मृत्यु दण्ड देने की जनता की प्रबंल मांग को मांगने के बजाय उनको नपुंसक बनाने का विकल्प ढूढ रही है। वहीं दामिनी प्रकरण से उपजे देशव्यापी भारी जनाक्रोश से मनमोहन सरकार की पूरे विश्व में मनमोहन सरकार की इस नपुंसकता के कारण भारत की छवि को गहरा धक्का लगा है। जिस प्रकार से दामिनी की मौत पर जहां पूरा भारत आंसू बहा रहा है वहीं भारतीय जनाक्रोश से भले ही सत्तांध मनमोहनी सरकार की कुम्भकर्णी खुमार को न तोड़ पायी हो परन्तु इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र संघ सहित पूरे विश्व में गूंज गयी है। पूरा विश्व मनमोहन सरकार की जनभावनाओं के अनुकुल काम न करने की सत्तांध नपुंसकता से हैरान है। भारत की आम जनता ही नहीं पूरा विश्व अचम्भित है कि भारत में क्यों सरकारें आजादी के 65 साल बाद भी गुलामी के दिनों में बने कानूनों में बदलाव करने को तैयार नहीं है। क्यों जनता के इतने आक्रोश के बाबजूद फिरंगी काल में बने कानून, भाषा ही नहीं अपितु उसकी हर हूठन को सरमाथे पर लगाये हुए है। क्यों मनमोहन सिंह व उसकी सरकार देश की जनभावनाओं के अनुरूप बलात्कारियों को मृत्युदण्ड का कानून बनाने में क्यों नपुंसक बनी हुई हैं। हालांकि देश की जनता मनमोहन सिंह सरकार सहित देश के हुकमरानो ंसे देश के स्वाभिमान, जनहितों के साथ राष्ट्रहितों की रक्षा करने के अपने दायित्व का निर्वहन तक नहीं कर पा रहे है। देश पाकिस्तानी आतंकियों ने संसद तक हमला कर के दोषी अफजल गुरू को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फांसी की सजा पर मुहर लगाने के कई सालों बाद भी मनमोहन सरकार उस आतंकी अफजल गुरू को फांसी देने में नपुंसक बनी हुई है। देश की आम जनता सरकार की नपुंसकता से बढ़ रही काला बाजारी, मिलावट खोरी व मंहगाई व भ्रष्टाचार से परेशान है परन्तु क्या मजाल मनमोहन सरकार इन पर अंकुश लगाने के लिए भी नपुंसक बनी हुई है। देश की जनता भ्रष्टाचारियों व बलात्कारियों को सजा दिलाने के लिए कानून में बदलाव चाहती है वह जनलोकपाल चाहती है व बलात्कार पर फांसी की मांग कर रही है। देश की जनता मांग कर रही है कि देश को लूटने वालों ने विदेशों में जमा किये हुए काला धन भारत में वापस लाया जाय परन्तु सरकार, देशहित के लिए जनभावनाओं के अनुरूप काम करने के बजाय देश हित के लिए सरकार से काम करने की मांग करने वालों पर फर्जी मुकदमें, लाठी, आंसू गैस, पानी की बौछारें आदि दमन करके जनता का मुंह बंद करना चाहती है। अब जनता चाहती है कि देशहित के लिए सरकार जाग कर लोकशाही का सम्मान करे तो वह 22 व 23 दिसम्बर की तरह पुलिसिया दमन का कहर से जनता का मुंह बंद करना चााहती है। पर अब सरकार असफल हे। क्या मनमोहन सरकार व उनकी कांग्रेस को जो खुद को 127साल की पार्टी बताती है उसको लोकशाही का सम्मान करना नहीं आता।  अगर आता तो वह बलात्कारियों को मृत्युदण्ड का कानून बनाने के लिए इतना ना नुकुर क्यों कर रही हे। जबकि वोटो की राजनीति करते हुए इसी कांग्रेस ने शाह बानों कैसे में सर्वोच्च न्यायालय के फेसले को पलटने के लिए तनिक सी भी देरी नहीं लगायी थी। तो अब क्यों नपुंसक बनी हुई है। निर्दोष कोई फंसे नहीं और दोषी कोई छूटे नहीं ऐसा कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा है। हकीकत यह हे देश के लिए आज कांग्रेस पाटी व उसकी मनमोहनी सरकार खुद नपुंसक बन कर न केवल देश के विकास, सम्मान व जनभावनाओं की रक्षा करने में नपुंसक बन गयी है। आखिर 16 दिसम्बर से देश त्राही त्राही कर रहा है और सरकार के पास घडियाली आंसू बहाने, जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए मरणासन्न दामिनी को सिंगापुर भेजने व जनभावनाओं को पुलिसिया कहर ढाने के अलावा क्या लोकशाही का सम्मान करना क्यों नहीं आता? ऐसे प्रधानमंत्री व सरकार की देश को एक पल के लिए भी कोई जरूरत नहीं  है जो न जनभावना समझ पाये व नहीं देश के हितों  व सम्मान की रक्षा कर पाये।

No comments:

Post a Comment