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Tuesday, December 18, 2012




पेरामेडिकल की 23 वर्षीय छात्रा से सामुहिक बलात्कार से शर्मसार हुआ भारत



राजनीति के अपराधिकरण से बढ रहा है अपराध

देश की राजधानी दिल्ली में पेरामेडिकल की 23 वर्षीय छात्रा से रविवार को हुए सामुहिक बलात्कार की घटना से सवा करोड़ से अधिक दिल्लीवासी ही नहीं अपितु पूरा देश शर्मसार है। देश की राजधानी दिल्ली में विगत 11 दिनों में बलात्कार के 8 मामले प्रकाश में आये। जिसमें 16 दिसम्बर को चांदनी महल तुर्कमान गेट क्षेत्र की  अबोध बच्ची से लेकर 6 दिसम्बर को तिमारपुर क्षेत्र में विदेशी युवती से हुआ सामुहिक बलात्कार है। जब देश की राजधानी जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर सेनाध्यक्ष सहित तमाम सर्वोच्च अधिकारी रहते हैं वहां यौन अपराध का इतना खौपनाक स्थिति है तो देश के दूर दराज के क्षेत्रों की हालत का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता। इसमें यह तथ्य भी सर्वविदित है लोकलाज के कारण इस अपराध के दस फिसदी मामले भी पुलिस के समक्ष नहीं आते है।
उत्तराखंड के एक संस्थान से फीजियोथेरेपिस्ट का कोर्स करने के बाद वह दिल्ली के एक अस्पताल से इंटर्नशिप ले रही पेरामेडिकल की छात्रा जब रविवार 17 दिसम्बर की देर रात दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार से चार्टर्ड बस से अपने मित्र के साथ द्वारका स्थित घर जा रही थी। इस दौरान चाटर्ड बस ड्राइवर व उसके साथियों ने सामुहिक बलात्कार करके महिपालपुर के पास फेंक दिया। दोनों पीडि़तो को पीसीआर द्वारा चिकित्सालय में भर्ती किया गया। पीडि़ता को सफदरजंग चिकित्सालय के सघन चिकित्साकक्ष में भर्ती किया गया। उसकी हालत बेहद खराब है मंगलवार 18 दिसम्बर को उसकी तबियत ज्यादा बिगड जाने से उसको जीवन रक्षक यंत्रों (वेंटिलेटर)पर रखा गया है। उसके सिर का आप्रेशन किया गया, इसके साथ उसकी रीड़ की हड्डी व कूल्हे में फेक्चर के साथ पूरे शरीर जख्मी है। उसको 23 टांके लगाये गये। उसके मित्र को भी बुरी तरह से घायल अवस्था में चिकित्सालय के सघन चिकित्सा कक्ष में भी भर्ती किया गया है।  पीडि़ता के परिजन व रिश्तेदार बेहद आहत हैं। इस घटना से दिल्ली की आम जनता ही नहीं संसद भी उद्देल्लित व आक्रोशित हो गया। आक्रोशित छा़त्र-छात्राओं ने वसंत बिहार थाने पर प्रदर्शन किया। चारों तरफ दिल्ली सरकार व दिल्ली पुलिस के खिलाफ लोगों में आक्रोश है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस के आयुक्त नीरज कुमार ने 18 दिसम्बर मंगलबवार को दोपहर एक विशेष प्रेस कांफ्रंेस करके घटना को बयान किया कि रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे पीडि़त लड़की और उसका दोस्त मुनिरका बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहे थे। रविवार को छुट्टी होने के कारण मस्ती के मूड में निकले चार्टर्ड बस के ड्राइवर राम सिंह और उसके साथियों ने दोनों को आवाज देकर बस में बैठा लिया। दोनों आम बस समझकर बैठ गए।
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक बस में राम सिंह के भाई मुकेश के अलावा उनके दोस्त विनय शर्मा, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और एक अन्य बैठे हुए थे। उन्होंने दोनों से 10-10 रुपये बस का किराया लिया। करीब 10 मिनट बाद छेड़छाड़ शुरू हो गई। लड़के ने ऐतराज जताया तो उसको मारा पीटा गया। उसने बहादुरी से लड़ने की कोशिश की। इस बीच लड़की ने भी बीच-बचाव की कोशिश की। लड़के को बेसुध कर युवती को बस के पीछे ले जाया गया। जहां उससे गैंगरेप किया गया। बस का पिछला गेट सील था। आगे वाले गेट से दोनों को बाहर गिरा दिया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अपराधियों को शिकंजे में जकडने के लिए 13 टीमें जांच मे ंलगायी । बसंत बिहार से  रास्ते के एक पेट्रोल पंप और दो होटलों के बाहर लगे सीसीटीवी से मिले घटना में प्रयुक्त चार्टर्ड बस के फुटेज की सहायता ली गयी। पुलिस कमिश्नर के अनुसार बस की सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों को पकड़ने में काफी मदद मिली। बस पर यादव नाम लिखा हुआ था। इसके बाद करीब 370 बसों की जांच की गई। आखिरकार यह बस आर.के. पुरम सेक्टर 6 में मिली। पुलिस आयुक्त ने बताया कि आरोपियों ने अपने बचाव के लिए सबूत मिटाते हुए बस को धोने की चालाकी भी काम नहीं आयी। बस मिलने के बाद इसके ड्राइवर राम सिंह को उठाया गया। उसने शुरू में घटना से इनकार किया, लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया। उसने अपने दूसरे साथियों के नाम भी उगल दिए। रामसिंह के अलावा उसका भाई मुकेश ,दिनेश शर्मा और फल विक्रेता पवन गुप्ता को पुलिस ने दबोच लिया। दो फरार आरोपियों को दबोचने में पुलिस जुटी हुई है। इसमें से एक बिहार के ओरंगाबाद का है। लोकसभाध्यक्ष, गृहमंत्री, नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित तमाम नेताओं ने इस प्रकरण के दोषियों को कड़ी सजा की मांग की। वहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बहुगुणा ने पीडि़ता के इलाज के लिये पांच लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की. सफदरजंग अस्पताल में 6 सदस्यीय चिकित्सकों का विशेष दल पीडि़ता की स्थिति पर बराबर नजर रखे हुए है।
इस प्रकरण ने पूरे देश के बुद्धिजीवियों को अंदर तक हिला कर रख दिया। देश में तमाम प्रकार के अपराधों का निरंतर बढ़ते ग्राफ से एक ही बात स्पष्ट हो रहा है कि हमारा समाज में नैतिक मूल्यों के ह्रास के साथ साथ अपराधी दिन प्रति दिन बेखौप हो रहे है। उनको न तो कानून व्यवस्था का भय है व नहीं समाज का। पूरी तरह से समाज अनैतिक ताकतों के शिकंजे में जकड़ा हुआ है। इसका सबसे बडा कारण एक तरफ तो शिक्षा में नैतिक मूल्यों का ह्रास जिम्मेदार है दूसरी तरफ शासन प्रशासन में नैतिक ताकतों का कमजोर होना भी इसका बडा कारण है। जब लोग देखते हैं अपराधिक प्रवृति के लोग भ्रष्टाचार, अपराध व रातों रात अकूत सम्पति ऐन केन प्रकार से अर्जित करके समाज व शासन में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होते हैं या राजनैतिक दलों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हो जाते हैं या बडे नेता व नौकरशाहों के करीबी बने होते हैं तो आम आदमी का कानून व नैतिकता से मोह भंग हो जाता है और वह भी किसी भी प्रकार से धन अर्जित करके तमाम प्रकार के अपराधों को बेखोप करता है। जब समाज में एक बार अपराधिक प्रवृति व दागदार छवि के लोगों को जनप्रतिनिधि बनते देखता है या किसी संरक्षण प्राप्त अपराधी को अकूत दौलत के साथ ऐशो आराम करते देखता है और जब वह भ्रष्ट व अपराधियों को कानून को धत्ता बता कर खुले आम घूमते देखता है तो समाज में कानून व्यवस्था का खौप अपराधिक प्रवृति के लोगों के दिलो दिमाग से उठ जाता है। इससे बचने के लिए जरूरत है देश में राजनीति का सुधिकरण करने की। आज जब अपराधी ही माननीय, उद्यमी व भाग्य विधाता बन जाते है तो कौन अपराधी इस रास्ते को अपनाने से दूर रहेगा। जब अपराधी देखेंगे की मंत्री से संतरी तक सभी आर्थिक अपराध व हत्यारे जनप्रतिनिधी बन कर मौज मा रहे हैं तो कानून का आदर कौन करेगा। जरूरत है आज देश में नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा, राजनीति व समाज की। इसके बिना कोई कानून अपराध को रोकने से सबल नहीं होगा।  इसके लिए अपराधियों को कडे दण्ड व समाज के हित में सलंग्न व्यक्तियों को पुरस्कार जब तक नहीं मिलता देश व समाज को इसी प्रकार से निरंतर शर्मसार होते रहने पडेगा।

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