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Wednesday, December 5, 2012


राजधानी गैरसेंण के लिए एकजूट हों राजनेता व आंदोलनकारी 

प्रदेष की स्थाई राजधानी गैरसेंण में बनायी जानी चाहिए। इस आषय के लिए कई संगठन राज्य गठन से पहले ही से लेकर आज तक निंरतर आंदोलन कर रहे है। सत्ता में रहते हुए इस मांग पर मूक रहने वाला उक्रांद (डी) भी इस मांग के समर्थन में आंदोलन की हुकार भरने लगा है। विधानसभा सत्र के पहले दिन विधानसभा के समक्ष अनषन से अपने गैरसेंण राजधानी बनाओं आंदोलन की पुन्न षंखनाद कर रहा है। इस आंदोलन के समर्थन में उक्रांद के तमाम घटक, रक्षा मोर्चा, परिवर्तन पार्टी, उत्तराखण्ड जनता संघर्श मोर्चा, महिला मंच, पूर्व सैनिक संगठन, छात्र व कर्मचारी संगठन सहित तमाम आंदोलनकारी संगठन इस मांग के समर्थन में लामबंद है। अनैक सामाजिक संगठन भी निरंतर इस मांग को उत्तराखण्ड की अस्मिता से जोड़ कर आंदोलन कर रहे हे। दिल्ली हो या देहरादून, लखनऊ हो या मुम्बई हर जगह गैरसेंण की मांग की अलख जगाने वाले लखनऊ के अधिवक्ता दानसिंह रावल इस मुद्दे को मंजील तक पंहुचाने के लिए कमर कसे हुए है।  हालांकि सरकार ने भी गैरसेंण में विधानसभा भवन बनाने का ऐलान कुछ समय पहले यहां पर हुई मंत्रीमण्डल की बैठक के बाद बडे जोरषोर से ऐलान करके किया था। परन्तु जिस प्रकार से यहां पर अटकलें लगायी जा रही है कि राजधानी देहरादून में ही थोपे जाने के लिए गैरसेंण में केवल षीतकालीन राजधानी या एक सत्र की विधानसभा का चलाने का झूनझूना पकडाने का काम सरकार कर रही है। इससे राज्य गठन आंदोलनकारियों में गहरा असंतोश भी है। परन्तु समय व परिस्थितियों को देखते हुए अधिकांष आंदोलनकारी राजधानी गैरसेंण की मांग को तेज करते हुए सरकार द्वारा गैरसेंण में विधाानसभा भवन बनाये जाने का स्वागत इसी आष से कर रहे हैं कि चलो इसी बहाने गैरसेंण राजधानी बनाने की दिषा में यहां के नौकरषाह, नेताओं व आम जनता का ध्यान आकृश्ठ होगा।
ऐसा नहीं कि राजधानी गैरसेंण बनाने के पीछे भाजपा व कांग्रेस के मजबूत तबके का हाथ है। यहां पर अधिकांष विधायक व नौकरषाह सुविधाभोगी होने के कारण देहरादून का मोह नहीं छोड पा रहे हैं। जनता की बदहाली व विकास की जरूरतों को नजरांदाज करके जिस प्रकार से राज्य गठन के 12 साल तक यहां की
सरकारों ने गैरसेंण के बजाय देहरादून में राजधानी थोपे रखने का काम किया जो एक प्रकार किसी प्रकार जनद्रोह व उत्तराखण्ड द्रोह से कम नहीं है। जिस प्रकार से प्रदेष की जनता ने अपने विकास व संस्कृति को बचाने के लिए उप्र से अलग राज्य के लिए तमाम प्रकार के पुलिसिया दमन व लम्बा संघर्श करके राज्य हासिल किया था उस पर प्रदेष के हुक्मरानों ने प्रदेष की राजधानी देहरादून थोप कर एक प्रकार से बज्रपात किया।
प्रदेष की स्थाई राजधानी गैरसैंण को बनाने की मांग को लेकर उक्रांद (डी) विधानसभा सत्र के पहले दिन विधानसभा के समक्ष उपवास किया। उपवास के बारे में बताते हुए  उक्रांद (डी) के केंद्रीय अध्यक्ष बीडी रतूड़ी ने कहा कि गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाए जाने की घोषणा के बाद कयासबाजी का दौर चल रहा है। कुछ लोग गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में देख रहे है। इससे प्रदेश में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसलिए जरूरी है कि इस मुद्दे पर जनभावना के अनुरूप निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि स्थायी राजधानी के संबंध में जितने भी आयोग व समितियां गठित की गई, सभी ने गैरसैंण को उपयुक्त पाया।  प्रदेष की जनता प्रदेष की वर्तमान सरकार की इस दिषा में अन्य सरकारों से बेहतर कदम उठाने से प्रसन्न है। जनता को आषा है कि इस मांग को मंजिल तक पंहुचाने के लिए हरीष रावत, सांसद भगतसिंह कोष्यारी, सतपाल महाराज, प्रदीप टम्टा, भुवनचंद खण्डूडी सहित तमाम प्रांतीय नेता निजी अहं छोड कर प्रदेष के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से अविलम्ब प्रदेष की स्थाई राजधानी गैरसेंण बनाने के लिए कार्य करके  षहीदों को ईमानदारी से श्रद्धांजलि देंगे।

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