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Friday, December 28, 2012


सामुहिक दुराचार की पीडि़त लड़की की सिंगापुर में मौत से देश गहरे सदमें में
 

 16 दिसम्बर को दिल्ली में 23 वर्षीय पेरामेडिकल की जिस छात्रा से सामुहिक बलात्कार हुआ था उसका 29 दिसम्बर की प्रातः सवा दो बजे सिंगापुर के माउंट ऐलिजाबेथ अस्पताल में मृत्यु घोषित किया गया। इस खबर से पूरा देश गहरे सदमें में है। उसका पार्थिक शरीर 29 दिसम्बर दोपहर बाद 3-4 बजे भारत लाया जायेगा। इस पीडि़त लड़की मौत से जहां पूरा देश में शोक की लहर छा गयी। देश की जनता को चाहिए की वह शांति बना कर दिवंगत आत्मा का अपनी शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि दे और सरकार दमनकारी हथकण्डे छोड़ कर दोषियों को अविलम्ब मौत की सजा दिलाने के लिए कानून बना कर उनको दण्डित कराने का दायित्व निभाये। यहीं दामिनी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी । देश के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री सहित तमाम बडे नेता  जहां लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की वहीं सरकार ने ऐतिहात के तौर पर इंडिया गेट के आस पास के सभी दस मेट्रो स्टेशन आवागमन के लिए बंद कर दिये है। इंडिया गेट की तरफ जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिये गये हैं। नई दिल्ली क्षेत्र को एक प्रकार से सुरक्षा बलों की छावनी में तब्दील कर दिया है।  लम्बे समय से उसके जीवन के बारे में गंभीर अटकलें लगायी जा रही थी। हालांकि जिस गंभीर हालत में उसको देश से बाहर इलाज के लिए ले जाया गया उस पर भी न केवल आम आदमियों ने अपितु मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी सवाल खडे हुए थे।
इस काण्ड के बारहवें दिन बाद वह जिन्दगी की जंग हार गयी। दिल्ली के सफदरजंग चिकित्सालय के बाद उसको सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया जहां उसकी मौत 29 दिसम्बर की तडके 2.15 बजे हो गयी। दिल्ली में हुए सामुहिक दुराचार की घटना से पूरा देश आक्रोशित था। 22 व 23 दिसम्बर को जो विजय चैक से इंडिया गेट व जंतर मंतर पर व्यापक जनांक्रोश के रूप में फूटा। जिसको देख कर पूरी व्यवस्था सहम गयी। इलाज के दौरान दिल्ली में लड़की होश में थी और परिवारवालों से बात भी कर रही थी लेकिन अचानक 27 दिसम्बर को उसे दिल का दौरा पड़ने के बाद सिंगापुर के  माउंट ऐलिजाबेथ अस्पताल  भेजा गया था जहां 29 दिसम्बर की तडके उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अस्पताल के अनुसार अस्पताल के 8 डॉक्टरों की टीम उसकी देख रेख में जुटी थी परन्तु पीडि़त छात्रा के शरीर और दिमाग में बेहद गंभीर चोटें थीं लेकिन उसकी इच्छाशक्ति ने उसे जिंदा रखा और वो तमाम मुश्किलों के बावजूद बहादुरी से जिंदगी के लिए लड़ी मगर वो जीत नहीं पाई।

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