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Friday, January 11, 2013


प्रदेश में नहीं नेताओं के घर बह रही है विकास की गंगा


आज मुझे उत्तराखण्ड शासन के महत्वपूर्ण पद में आसीन मित्र ने उत्तराखण्ड में विकास की ऐसी गंगा की झलक दिखायी कि मैं भी दंग रह गया। मेरे मित्र ने कहा भई आप लोग बेकार ही हाय तौबा मचा रहे हैं कि उत्तराखण्ड में विकास नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा यहां के नेता जो भी शासन में आता है वह विकास के लिए काम करता है। देखा नहीं कांग्रेस की वर्तमान सरकार में सभी प्रदेश के बडे दिग्गज नेताओं ने खुद या अपने परिजनों का विकास कर ही दिया।
मैने एक पल के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार पर नजर फेरी तो देखा कि वर्तमान बहुगुणा सरकार में कांग्रेसी दिग्गज नेताओं ने भले ही प्रदेश का विकास करने के बजाय अपना व अपने परिवार का विकास तो कर ही दिया। कितना विकास कर लिया। स्वयं विजय बहुगुणा ने इतनी तिकड़म की कि वह भले ही कांग्रेसी अधिकांश विधायकों के समर्थन न होने के बाबजूद उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने का कीर्तिमान बनाया। यही नहीं उन्होंने विकास के कांग्रेसी राह का अनुशरण करते हुए सबसे पहले प्रदेश के वरिष्ट नेताओं को दरकिनारे लगाते हुए अपने बेटे को टिहरी संसदीय सीट से कांग्रेस का टिकट दिलाया। भले ही वह उन्हें सांसद न बना पाये परन्तु प्रदेश में कांग्रेस के भावी लोकसभा चुनाव के प्रबल दावेदार तो बना ही चूके है। यही नहीं मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार हरीश रावत ने भी अपने बेटे को प्रदेश युवक कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर स्थापित कर लिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री भले ही वे न बन पाये हों परन्तु वे देश के कबीना मंत्री तो बन ही गये। यहां विश्व में आध्यात्म जगत में अपना परचम फेहराने वाले सतपाल महाराज ने भी विकास की ंगंगा बहाने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी। वे देश के एक मात्र शीर्ष आध्यात्म गुरू हैं जो सांसद भी बने और देश के मंत्री भी बने। भले ही वे लाख कोशिशों के बाबजूद खुद को प्रदेश के मुख्यमंत्री न भी बना पाये परन्तु वे अपनी धर्मपत्नी को प्रदेश की विधायक ही नहीं कबीना मंत्री के पद पर आसीन करा कर विकास की गंगा बहा चूके है। पर वे अन्य नेताओं की तरह अभी अपने बेटे को शासन प्रशासन में भागेदार नहीं बना पाये । वहीं प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य भले मुख्यमंत्री न बन पाये परन्तु वे खुद को मंत्री व अपने बेटे को भी शासन प्रशासन में भागीदार बना ही चूके है। यही इंदिरा हृदेश भी मुख्यमंत्री न बन पायी हो परन्तु प्रदेश की वित्त मंत्री बनने के साथ अपने बेटे को भी शासन प्रशासन में आसीन कर चूकी है। मुझे लगा कि इन नेताओं को  जितनी चिंता अपने व अपने परिजनों के विकास की है उतनी प्रदेश की चिंता रहती तो प्रदेश की जनांकांक्षायें कब का साकार हो जाती।
कांग्रेस में इससे पहले भी विकास का यही राह रही होगी। हम तो चिल्लाते रहे कि देश व प्रदेश का विकास करें परन्तु ये लोग अपना, अपने परिजनों व चम्चों का विकास ही करते गये। चाहे तिवारी रहे या बहुगुणा की सरकार, इसी राह में हुए काम। जहां तिवारी के जमाने में आरेन्द्र से लेकर सैकडों प्यादों का विकास हुआ। वहीं बहुगुणा के जमाने में तो इन नेताओं ने अपने खुद की विकास की कोई कमी छोड़ना ही नहीं चाहते है। बाकी इन नेताओं को कभी प्रदेश के हितों, सम्मान व हक हकूकों की कोई चिंता नहीं रही।
ऐसा नहीं कि विकास की यह परंपरा केवल कांग्रेसी नेताओं में रही। प्रदेश की सत्ता में आसीन रहे भाजपाईयों का भी विकास की नयी परिभाषा गढ़ते रहे। जहां खण्डूडी के राज में सांरगी की तूती वेसे ही बोलती थी जैसे तिवारी के राज में आरेन्द्र की। खण्डूडी के राज में विकास की गंगा बही तो सारंगी से निशंक तक बही। परन्तु जब विकास की नौका के खेवया खुद निशंक बन गये तो उन्होंने प्रदेश में किसका विकास किया यह पौंटी प्रकरण के बाद ही खुलाशा हो पाया। वेसे प्रदेश के अन्य नेताओं की कथा कुछ कम नहीं है। अगर प्रदेश गठन के बाद यहां के विधायकों पर बरसी लक्ष्मी की कृपा की निष्पक्ष जांच की जाय या उनकी तब से अब की तस्वीर केवल एक झलक जनता के समक्ष रखी जाय तो विकास की गंगा कहां बह रही है इसका भान विकास के लिए तरस रही प्रदेश की आम जनता को भली भांति हो जायेगा। ऐसा नहीं कि उत्तराखण्ड की एकमात्र प्रांतीय दल होने का दंभ भरने वाली पार्टी उक्रांद के नेता इस दौड़ में पीछे रहे हों,उन्होंने भी विकास की इस बहती गंगा में जम कर हाथ साफ किया। प्रदेश भाजपा सरकार में मंत्री रहे फिल्ड मार्शल के नाम से ख्याति प्राप्त दिवाकर भट्ट ही नहीं लालबत्ती लिए शासन प्रशासन में आसीन रहे उक्रांद नेताओं ने भी इस विकास की गंगा में स्नान किया। अब बसपा वाले भी सरकार की इस विकास की गंगा में सहभागी है। कुछ मुलायम के कहार रहे नेता भी अब कांग्रेस की विकास की राह के अनुगामी बन कर अपने विकास के लिए समर्पित है। प्रदेश के नेताओं द्वारा प्रदेश के विकास की इस गंगा में प्रदेश के आम आदमी के लिए कहां स्थान है यह तो इनके विकास पर एक नजर फेरने के बाद आदमी खुद ही समझ जायेगा।

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