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Tuesday, January 15, 2013


उत्तराखण्ड भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में संघ व केन्द्रीय नेतृत्व की अग्नि परीक्षा


प्रदेश अध्यक्ष के लिए 19 को होगा मतदान

देहरादून (प्याउ)। कोश्यारी, खण्डूडी व निशंक यानी तीन गुटों में फंसी उत्तराखण्ड प्रदेश भाजपा में इन दिनों प्रदेश अध्यक्ष के लिए ऐसी कसमकस चल रही है कि उसने भाजपा के अनुशासित पार्टी होने की पूरी तरह हवा ही निकाल ली है। मोदी के विशाल कद के आगे बोने साबित होने के बाबजूद केसे बनेगे प्रधानमंत्री इसी हवाई सपनों व तिकडमों में खोये जनाधार विहिन गडकरी सुषमा, जेटली जैसे केन्द्रीय नेतृत्व को हिमाचल खोने के बाद भी उत्तराखण्ड की सुध लेने की फुर्सत ही नहीं है। यहां पर जमीनी व साफ छवि के मोहन सिंह ग्रामवासी जेसे वरिष्ट नेताओं के हाथों में भाजपा सोंप कर प्रदेश में चल रही आत्मघाती व दिशाहीन गुटबाजी को दूर करने के बजाय केन्द्रीय नेतृत्व अपने अपने प्यादे बने गुटवाज नेताओं को हवा ही दे रहे है। राष्ट्रीय स्तर पर किसी मजबूत जमीनी साफ छवि के वरिष्ठ नेता को अध्यक्ष बनाने के बजाय गडकरी के मोह में मोदी की ताजपोशी की राह को आसान बनाने के बजाय भाजपा का संविधान तक बदलकर मोदी को पुन्न अध्यक्ष पद पर आसीन करके  संघ व भाजपा के कर्णधारों ने मनमोहन के कुशासन से मुक्ति के लिए आक्रोशित देश की जनता व भाजपा कार्यकत्र्ताओं की आशाओं पर एक प्रकार का कुठाराघात ही कर दिया।
उत्तराखण्ड प्रदेश में भाजपा संगठनात्मक ढांचा कोश्यारी के हटने के बाद रसातल में चला गया है। अपने प्यादो ंको महत्वपूर्ण पद पर आसीन करने की अंधी ललक ने प्रदेश भाजपा को बेहद कमजोर कर दिया है। वर्तमान  अध्यक्ष विशनसिंह चुफाल का कार्यकाल सितम्बर में ही समापन हो गया परन्तु गुटबाजी व केन्द्रीय नेतृत्व के उदासीनता के कारण यहां पर भाजपा अब दो माह बाद अध्यक्ष के पद के चुनाव की तिथि घोषित कर पायी है। प्रदेश भाजपा को रसातल में पंहुचाने वालों में से एक रहे वर्तमान केन्द्रीय चुनाव अधिकारी थावर चंद गहलौत ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनावों की तिथि घोषित कर दी है। इसके तहत 18 को नामांकन और 19 को चुनाव होंगे। प्रदेश चुनाव प्रभारी केदार जोशी  को बनाया गया हैं भाजपा में सत्तासंघर्ष का यह आलम है कि भाजपा के कुल 22 संगठनात्मक जिलों में से केवल 17 के चुनाव हो पाये। 5 जनपदों में तमाम कोशिशों के बाबजूद कोई अध्यक्ष बना नहीं पाया।  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए मोहनसिंह ग्रामवासी, त्रिवेन्द्र रावत, तीरथ सिंह रावत, धनसिंह रावत , लाखी राम जोशी व नरेश बंसल का नाम चर्चाओं में है। प्रदेश के अधिकांश समर्पित कार्यकत्र्ताओं का ही नहीं वरिष्ट नेताओं की पहली पसंद मोहन सिंह ग्रामवासी जैसे मजबूत, साफ छवि के वरिष्ठ जमीनी तेजतरार नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना कर प्रदेश में चल रही आत्मघाती गुटबाजी पर अंकुश लगाने की है। प्रदेश में मोहन सिंह ग्रामवासी ही एक मात्र ऐसे नेता है जिन पर किसी गुट व नेता के गुट की छाप नहीं है। वही एक ऐसे नेता है जिसके आगे किसी गुटबाज नेताओं के दवाब में रह कर नहीं अपितु संगठन के हित के लिए काम करने की कुब्बत है। इसी लिए कोई भी गुटबाज नेता उनको अध्यक्ष के रूप में समर्थन करने का साहस तक नहीं कर पा रहा है। देखना यह है कि अब भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व गुटबाज नेताओं की सुनता है या पार्टी के हित में साफ छवि के जमीनी वरिष्ट बेदाग तेजतरार मोहन सिंह ग्रामवासी को अध्यक्ष बनाता है।

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