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Monday, July 16, 2012


इन्दू राणा का कत्ल से बेनकाब हुए दिल्ली के डाक्टर, मीडिया व राजनेता


नई दिल्ली(प्याउ)। एक पखवाडे के करीब अपनी मौत से संघर्ष करते हुए 17 वर्षीय बालिका इन्दू राणा ने आखिर शनिवार 14 जुलाई की सायं दिल्ली के लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में दम तोड़ दिया। उत्तराखण्ड के अग्रणी लोकगायक हीरासिह राणा की बेटी इस दिवंगत बेटी इन्दू राणा का अंतिम संस्कार रविवार के बजाय सोमवार 16 जुलाई को होने के बाद उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के निगम बोध घाट में सांय 5 बजे किया गया। दिवंगत इन्दू राणा की अंतिम यात्रा में निगम बांेध घाट पर उनके पिता हीरासिंह राणा सहित सैकड़ों की संख्या में उपस्थित शोकाकुल उत्तराखण्डियों ने अश्रुपूर्ण विदाई दी। पावन यमुना के तट पर अंतिम विदाई में सम्मलित म्यर उत्तराखण्ड संस्था के संस्थापक समाजसेवी मोहन बिष्ट के अनुसार सांसद प्रदीप टम्टा, समाजसेवी प्रताप शाही, श्री लखचैरा, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के सचिव हरिपाल रावत, देश के जनांदोलनों के अग्रणी आंदोलनकारी भूपेन्द्र रावत, पत्रकार अनिल पंत व अनैक उत्तराखण्डी कलाकारों के अलावा बड़ी संख्या में श्री राणा जी के प्रशंसक सम्मलित थे। गौरतलब है कि श्री राणा के अनुसार दिल्ली निवास पश्चिमी विनोद नगर स्थित एक नर्सिंग होम के डाक्टर ने रूपयों को खसोटने के लालच में शल्य चिकित्सा के नाम पर जिस प्रकार बिना बीमारी की सही जानकारी , एक्सरे इत्यादि जांच व शल्य चिकित्सा के अनुकुल चिकित्सा मानकों के ही मात्र अपने अनुमान के आधार पर सीधे पेट दर्द से कराह रही उनकी 17 वर्षीय बालिका इन्दू राणा के पेट का आप्रेशन कर दिया, और जब डाक्टर के अनुमान के अनुसार बीमारी नहीं निकली तो डाक्टर के हाथ पांव फूल गये, उसने आनन फानन में उसे वहां से सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए उनके परिजनों को कहा। इस नर्सिंग होम के मालिक डाक्टर ने न तो इस गंभीर स्थिति में छोडे मरीज को ले जाने के लिए कोई अपनी एम्बुलेंस ही दी व नहीं उचित कागज आदि बनाया।
इस प्रकरण के बाबजूद न तो दिल्ली की तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया व दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कोई सुध तक नहीं ली। एक पखवाडे तक इस डाक्टर की भयंकर लापरवाही से लोक नायक अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में इन्दू राणा मौत से जुझती रही परन्तु क्या मजाल दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्वी दिल्ली के सांसद व मुख्यमंत्री के पुत्र संदीप दीक्षित व दिल्ली के चिकित्सा मंत्री अशोक वालिया, दिल्ली में ही आये दिन चक्कर काटने वाले उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, केन्द्र सरकार मे राज्य मंत्री हरीश रावत व सांसद सतपाल महाराज को ही इस बात की सुध रही कि वो दो पल के लिए चिकित्सालय में जा कर इस बालिका की सुध लें। हाॅं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भगतसिंह कोश्यारी, दिल्ली के विधायक अनिल चैधरी जरूर अस्पताल में पीड़ित के परिजनों व मौत से जुझ रही इन्दू राणा को देखने आ कर राणा जी को ढाढ़स बढाया। इस पूरे प्रकरण में कातिल डाक्टर पर ही नहीं उदासीन जनप्रतिनिधियों पर उत्तराखण्ड की जनता को दिल्ली में ही नहीं उत्तराखण्ड में गहरा आक्रोश है। परन्तु जिस प्रकार से उत्तराखण्डी समाज के प्रबुद्ध जनों, समाजसेवियों ने आगे बढ़ कर चिकित्सालय व थाना तथा दिल्ली के चिकित्सामंत्री वालिया से निरंतर जा कर दवाब बनाया उससे समाज की एकजूटता प्रदर्शित हुई और पीड़ित राणा परिवार को ढाढ़श बंधा। समाजसेवी प्रताप शाही, सुरेश नोटियाल, के एम पाण्डे, दूरदर्शन के वरिष्ट पत्रकार श्री रावत, म्यर उत्तराखण्ड के मोहनसिंह रावत आदि तथा दिल्ली के विधायक अनिल चैधरी के हस्तक्षेप के दिल्ली के चिकित्सामंत्री डा वालिया ने जरूर लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल के चिकित्सकों व मेडिकल डाक्टरों का पेनल बनाने में पहल की परन्तु जिस प्रकार ने डा. वालिया ने अपने सचिवालय से चंद फलांग दूर पर स्थित लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में पीड़ित की सुध लेनी तक की नैतिकता नहीं दिखाई उससे लोगों में गहरा आक्रोश है।
17 वर्षीय इन्दू राणा के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए अग्रणी लोक गायक चन्द्रसिंह राही व नरेन्द्रसिंह नेगी, उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष व प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत, समाजसेवी उद्यमी के सी पाण्डे , गोपाल उपे्रेती, भाजपा नेता पी सी नैनवाल, बचन राम टम्टा, जगदीश भाकुनी, पत्रकार चारू तिवारी, प्रमोद पंत, युवा कांग्रेसी नेता शर्मा, म्यर उत्तराखण्ड,, रामेश्वर गोस्वामी, जगदीश भट्ट सहित तमाम अग्रणी समाजसेवियों ने गहरा शोक प्रकट किया और दोषी डाक्टर को कड़ी सी कड़ी सजा देने की मांग की। दोषी डाक्टर का दोष निर्धारण करने के लिए इंडियन मेडिकल काउंसिल का एक पैनल बनाया गया है उसकी ही देख रेख में मृतक का पोस्टमार्टम भी किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर किसी डाक्टर पर तभी केस दर्ज किया जा सकता है जब मेडिकल काउंसिल उसे दोषी ठहराये। इस काउंसिल की रिपोर्ट के बाद ही इस केस को दर्ज करते हुए डाक्टर को गिरफतार करने का आश्वासन दिल्ली पुलिस ने उत्तराखण्डी समाज को दिया। परन्तु जिस शर्मनाक ढ़ग से राष्ट्रीय मीडिया ने इस प्रकरण की उपेक्षा की उससे उसकी असलियत सामने आ गयी। वहीं पीड़ित परिवार ही नहीं पूरा समाज इसे डाक्टर द्वारा किया गया कत्ल मान कर दोषी डाक्टर को कड़ी सजा देने की मांग कर रहा है।
 

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