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Friday, July 27, 2012


-रोहित व उज्जवला के ही नहीं देश के भी गुनाहगार हैं तिवारी

-भगवान के घर अंधेर नहीं है तिवारी जी, 

-न्यायमूति रीवा खेत्रपाल के ऐतिहासिक फेसले से मजबूत हुआ आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास


आज अपने अवैध सम्बंधों से उत्पन्न पुत्र के बारे में न्यायालय का दो टूक फेसला आने पर तिवारी जी इस प्रकरण के आज भी अपने कुकर्मो पर माफी मांगने के बजाय लोगों को ही उनके व्यक्तिगत जीवन में दखल न देने की नसीहत देने की धृष्ठता करने वाला बयान दे कर अपनी कलुषित मानसिकता व अपनी ऊंची पंहुच की हनक का परियच दे रहे है। डीएनए की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से पहले तक इस मामले को सिरे से नकारने व न्यायालय को भी उसकी सीमाओं के अतिक्रमण का आईना दिखाने की निरंतर हरकत करते हुए इस सच्चाई पर पर्दा डालने की अंतिम समय तक कोशिशें करते रहे। श्री तिवारी जैसे नेताओं को बेनकाब करने वाली उज्जवला व उनके अधिवक्ता बेटे रोहित ने जिस अदम्य साहस का परिचय दे कर पूरे देश के सामने तिवारी के विकास पुरूष का असली चेहरा दिखाने का सराहनीय कार्य किया, इसके लिए उनको कोटी कोटी धन्यवाद। क्योंकि हमारे पुरूष प्रधान समाज में पुरूष के ऐसे गुनाहों को तो कटघरे में करने के बजाय महिलाओं पर ही अंगुली उठाने का काम होता है। ऐसे समाज में कितने सामाजिक ताने व उपहास सहने के बाद भी माॅं बेटा दोनों ने बहुत ही साहस से तिवारी जैसे बहुत ऊंची पंहुच रखने वाले कुटिल राजनेता को उनकी तमाम कुटिल चालों का मुहतोड़ जवाब दे कर लम्बी लड़ाई के बाद बेनकाब किया उसके लिए उन दोनों माॅं बेटा को कोटी कोटी नमन्। अगर आज सभी शोषित महिलायें ऐसा साहसिक कार्य करके ऐसे समाज में तथाकथित बडे नेताओं को बेनकाब कर दे तो यह देश की बहुत बड़ी सेवा होगी। मैने खुद रोहित जी की माता उज्जवला से कहा था कि आप भी तिवारी की तरह इस प्रकरण में दोषी हो परन्तु शेखर निर्दोष हैं, उनको हर हाल में न्याय मिलना ही चाहिए। इसके साथ आपने इस मुद्दे को उठा कर तिवारी को कटघेरे में खडा करके अपने कृत्यों का एक प्रकार से पश्चाताप ही कर दिया। तिवारी पर तरस खा कर पाक साफ बताने वाले लोगों से मेरा एक ही सवाल है कि क्या तिवारी ने मुख्यमंत्री या देश का मंत्री बनते हुए शपथ अवैध सम्बंधों को बनाने की ली थी या देश व प्रदेश को मजबूत बनाने की। तिवारी कुशल राजनेता, बुद्धिजीवी, स्वतंत्रता सैनानी होने के साथ महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों में देश के संविधान व मर्यादा की रक्षा करने के दायित्व को निर्वहन करने की आश देश की जनता उन्हीं से नहीं अपितु देश के सभी महत्वपूर्ण पदों पर आसीन व्यक्तियों से करती है। परन्तु तिवारी जैसे नेताओं ने देश के संसाधनों को अपने ऐसे ही सम्बंधों व प्यादों पर तबाह किये इस लिए वे न केवल शेखर का ही नहीं अपितु देश का भी अपराधी हैं। तिवारी जैसे हुक्मरानों के कारण ही देश की पूरी व्यवस्था पथभ्रष्ट हो जाती है। देश की प्रतिभाओं के बजाय ऐसे राजनेता अपने अनैतिक सम्बंधों व प्यादों पर ही देश के विकास के संसाधनों को पानी की तरह बहाते है। आज उत्तराखण्ड मात्र दस सालों में देश के सबसे भ्रष्टत्तम राज्य बन गया तो इसका काफी हद तक गुनाहगार तिवारी ही है। तिवारी के कुशासन में प्रदेश की लोक मर्यादाओं, शासन व्यवस्थाओं व विकास के संसाधनों की किस प्रकार से रौंदा गया इसका प्रत्यक्ष उदाहरण रहा तिवारी कुशासन को कटघरे में खड़ा करने वाला ‘उत्तराखण्ड के महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी का नौछमी नारेण नामक गीत। आज तिवारी अगर चाहते तो उत्तराखण्ड में जनप्रतिनिधियों व शासन प्रशासन की सही दिशा रख सकते थे, उनमें प्रतिभा थी परन्तु उन्होंने उत्तराखण्ड के भविष्य को पतन के गर्त में डालने के अलावा कुछ नहीं किया। परन्तु इन सबके बाबजूद उन काठ के उल्लूओं को क्या कहा जा सकता जो तिवारी के कुशासन के कारण तबाह हो रहे उत्तराखण्ड की दुर्दशा पर आंसू बहाने के बजाय तिवारी के पक्ष में घडियाली आंसू बहा कर उनका यशोगान कर रहे हैं।
शेखर की पीड़ा व भावना का सम्मान करते हुए जिस मजबूती से उच्च न्यायालय की महान न्यायाधीश रीवा खेत्रपाल ने निष्पक्ष न्याय करके यह साबित कर दिया कि भारत में न्यायपालिका को अपनी सत्ता हनक से नहीं हांका जा सकता है। उसकी जितना भी प्रसंशा की जाय वह बहुत कम है। महान न्यायाधीश रीवा खेत्रपाल द्वारा दिये गये इस ऐतिहासिक फेसले से लोगों का विश्वास न्याय पालिका पर और मजबूत हो गया है।
देश के सबसे वरिष्ट व अनुभवी नेता नारायण दत्त तिवारी के कृत्यों के कारण उनकी मनोवृति इतनी पतित हो चूकी है कि उनको देश की संस्कृति, संवैधानिक मर्यादाओं व लोकलाज को अपने कृत्यों से शर्मसार करने वाले तिवारी के ये ही निहित स्वार्थी प्यादे उनसे अपने निहित स्वार्थो की पूर्ति कराने के लिए उनको विकास पुरूष कह कर भाट वृर्ति करके देश के संसाधनों की खुले आम लूट मचाते हुए अपनी तिजोरियां भरते रहे। अगर तिवारी के कार्यकाल व उनके साथ जुड़े हुए अधिकांश लोगों की सीबीआई से निष्पक्ष जांच की जाय तो पूरे देश की आंखें फट्टी की फट्टी रह जायेगी कि कैसे उनके करिबियों के लिए विकास के संसाधनों को लुटवाया गया।
दुसरों का जीवन बर्बाद करके, जिस संविधान के तहत देश व राज्य के विकास करने की कसमें खायी थी उसी संविधान की धज्जियां उडाते हुए तिवारी जैसे राजनेताओं ने जब अपने पद की गरीमा को ताउम्र हर कदम पर तार तार किया। आखिर बकरे की माॅं कब तक खेर मनाती, परमात्मा के घर अंधेर नहीं है तिवारी जी। दिल्ली व लखनऊ में ही नहीं देश के हर कोने कोने में घटित हुए तिवारी के किस्सों को लोग जिस चटकारा लेते हुए ठहाके लेते थे, उस तिवारी को जब सोनिया गांधी ने पावन देवभूमि उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बना कर आत्मघाती निर्णय लिया, वहां जिस प्रकार से तिवारी ने सत्ता का खुलेआम दुरप्रयोग जनांकांक्षाओं व विकास का गला घोंटने के लिए किया उससे पूरे प्रदेश में तिवारी व कांग्रेस की लोग थू थू करने लगे। परन्तु इसके बाबजूद दिल्ली स्थिति कांग्रेस के मठाधीश बने धृतराष्ट्र व गंधारी जैसे नेतृत्व ने जनता द्वारा कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंकने के बाबजूद सोनिया गांधी ने लोकलाज व संविधानिक संस्थाओं की पावनता की रक्षा करने के बजाय तिवारी जैसे जनता की आंखों के आगे पूरी तरह से बेनकाब हो चूके व्यक्ति को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाने का हिमाकत की। परन्तु भगवान तिरूपति ऐसे कुकृत्यों को करने वालों को कहां माफ करने वाले, तिवारी जी जिस ढ़ग से हेदारबाद राजभवन में पूरे देश के सामने बेनकाब हुए उसने तिवारी ही नहीं अपितु उसको संरक्षण देने वाले कांग्रेस नेतृत्व की पूरे देश में थू थू होने लगी। इसी कारण तिवारी ने यहायक राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे कर वापस आने का निर्णय लिया। परन्तु उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य यह रहा कि ताउम्र उत्तराखण्ड राज्य गठन का घोर विरोधी रहे तिवारी जी को जब लखनऊ व दिल्ली में अनुकुल माहोल की आश नहीं रही तो उन्होंने उत्तराखण्ड के देहरादून में कदम रखा। एक तरफ हेदराबाद में राजनिवास को पतित करने का आरोप लगाते हुए आंध्र प्रदेश के लोग उनको राजभवन से बर्खास्त करो के लिए आंदोलन कर अपनी संस्कृति व स्वाभिमान का परिचय दे रहे थे वहीं कुछ बेशर्म लोग देहरादून में उनकी हेदराबाद के बेशर्म काण्ड करने के बाद देहरादून बेंरंग आने पर स्वागत करके पूरे देश के सामने उत्तराखण्डी सम्मान की जग हंसाई करा रहे थे। इसके बाद भी प्रदेश के कुछ कांग्रेसियों ने विधानसभा चुनाव में तिवारी को असरदार बताते हुए कांग्रेस आलाकमान को फिर गुमराह करते हुए फिर से उनके कुछ प्यादों को विधानसभा की टिकटें तक झटक गये। उस समय भी हालत यह थी कि अपने पहले मुख्यमंत्री के कार्यकाल में व हेदारबाद प्रकरण में प्रदेश या देश का कोई भी सम्मानजनक आदमी या इज्जतदार आदमी तिवारी को अपने घर में ले जाने के लिए तैयार नहीं था। यह प्रदेश का शौभाग्य रहा व जनता की बुद्धिमता जो एक भी तिवारी समर्थक प्रदेश के विधानसभा की देहरी पर नहीं पंहुच पाया। हाॅं फिर दिल्ली में बैठे तिवारी के चंद दलालों ने कांग्रेस आला नेतृत्व को गुमराह करके प्रदेश के भविष्य को रौंदते हुए तिवारी के चेहते को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन करके प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश विधायकों व जनता दोनों को आक्रोशित कर दिया। प्रदेश की जनता हैरान इस बात से थी कि पहले तिवारी के कृत्यों व उनके शासन काल में प्रदेश में हुए 56 घोंटालों पर घडियाली आंसू बहा कर प्रदेश की सत्ता में आसीन हुए भाजपा के खण्डूडी व निशंक दोनों मुख्यमंत्री के कार्यकाल में तिवारी के राज में हुए 56 तथाकथित घोटालों में से पूरे पांच साल में एक भी घोटाले के दोषियों पर न गाज ही गिरी व नहीं इन काण्डों पर कोई त्वरित कार्यवाही ही की गयी। इससे शर्मनाक बात रही कि भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री खण्डूडी व निशंक के साथ मंचों पर तिवारी का विकास पुरूष बता कर स्वागत ही किया जाता रहा। भगवान राम के नाम को लेकर राजनीतिक रोटियां सेकने वाले भाजपा के नेताओं को यह भान तक नहीं रहा कि भगवान राम ने लोक लाज व जनमत का सम्मान करना प्रत्येक हुक्मरान के लिए सर्वोच्च कर्तव्य बताया था। इसका दण्ड जनता ने भाजपा को प्रदेश की सत्ता से दूर करके दिया। परन्तु फिर सोनिया गांधी ने तिवारी के प्यादों की आत्मघाती सलाह पर जिस तिवारी के पंसदीदा व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री बनाया उससे उत्तराखण्डी ठगे के ठगे रह गये। जीतने व मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस प्रकार मुख्यमंत्री तिवारी से मंत्रणा करने बार बार जाते है। परन्तु इसी को कहते हैं भगवान के घर कभी अन्याय नहीं होता।
 

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