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Sunday, July 1, 2012

सुरजीत व अबू जिंदाल  प्रकरण से बेनकाब हुए देश के हुक्मरान

पाक समर्थक आतंकी अबू जिंदाल की गिरफतारी से आक्रोशित पाक पलटा सरबजीत की रिहाई से 




इस पखवाडे दो भारतीय नागरिकों के कारण देश के हुक्मरान पूरी तरह से बेनकाब हो गये। पहला आतंकी अबू जिंदाल पकडा गया, जो देशद्रोही बन कर देश में पाक के इशारे पर मुम्बई पर हमले करने जैसे जघन्य गतिविधियों का सुत्रधार रहा । दूसरा सुरजीतसिंह जो पाक की जेल से 30 साल की सजा के बाद छूट कर भारत आया।
पाकिस्तान ने दो दशक से पाक जेल में बंद सरबजीत सिंह को राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान करके रिहा करने की घोषणा के मात्र 6 घण्टे के अंदर ही अपनी घोषणा से पलटते हुए पाकिस्तान ने कहा कि सरबजीत सिंह को नहीं अपितु पाक जेल में ही बंद दूसरे कैदी सुरजीत सिंह को रिहा करेगा। पाक की इस पलटी मार दाव के पीछे एक ही कारण है कि भारत द्वारा मुम्बई हमले के एक मास्टरमाइंड पाक समर्थक आतंकी अबू हमजा  को इसी सप्ताह दुबई से पकड़ कर मुम्बई हमले में पाक की संलिप्ता को बेनकाब करना रहा। खुद को बेनकाब होते देख कर आक्रोशित पाक ने यह पलटी दाव चलाया। गौरतलब है कि भारत ने भी एक पाक के दशकों से भारत की जैल में बंद केदी को गत माह रिहा किया था। पाकिस्तान ने भी इसी की उतर में सबरजीत को रिहा करने की अनौपचारिक सहमति दोनों देशों के बीच हो गयी थी। अब इस घटनाक्रम में आतंकी अबू हाजमा की गिरफतारी से बौखलाये पाक ने सरबजीत की रिहाई का ऐलान करने के बाद जिस प्रकार से पलटी मारी उससे उसकी विश्वसनीयता पर पूरे विश्व में प्रश्न चिन्ह लग गया है। वहीं जिस सुरजीत सिंह की रिहाई की बात कर रहे हैं वे 30 साल से पाक की जैल में आजीवन सजा को पूरी कर गये थे। उनको छोड़ने की बात करना पाक की मंशा को ही उजागर करती है । परन्तु जिस प्रकार से सुरजीत ने पाक की जेल से रिहा होने के बाद भारत में दाखिल होते ही खुद को भारत के लिए जासूसी करने की बात कह कर सरकार पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया उससे भारत सरकार की अपने हितों के प्रति संवेदनहिनता व कूटनीतिक कमजोरी को पूरी तरह से उजागर कर दिया। इससे साफ हो गया कि अपने निहित स्वार्थ में सत्तांध हुए देश के हुक्मरानों को देश के लिए अपनी व अपने परिवार की जिंदगी खतरे में डाल कर देश के हितों की रक्षा करने वाले देशभक्तों की कोई परवाह नहीं है।
 इस प्रकरण के बाद पाकिस्तानी जेल में आतंकी गतिविधियों के आरोप में मौत की सजा पाये हुए सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए सरबजीत की रिहाई के लिए कई दशकों से प्रयासरत सरबजीत की बहिन व परिजनों के अलावा  देश के विदेश मंत्री व पंजाब के मुख्यमंत्री से लेकर बाॅलीवुड के नायक सलमान खान सहित आम प्रबुद्ध लोगों ने पाक की सरकार व जनता से सरबजीत की रिहाई की खुली अपील की है। सरबजीत की रिहाई 14 अगस्त को पाक के स्वतंत्रता दिवस पर होगी या बाद में परन्तु इतना निश्चित है पाक में भारत का खुखार आतंकी के नाम से मौत की सजा पाये हुए सरबजीत का मामला उसके जुर्म से अधिक सियासी भंवर में फंस चूका है।
वहीं सउदी अरब में पकडे गये आतंकी अबू हमाजा के प्रकरण में एक ओर मोड़ उस समय आया जब सुरक्षा ऐजेन्सियों को पता चला कि जिस व्यक्ति को वे अबू हमाजा कह कर पाक को गरिया रहे हैं वह अबू हमाजा नहीं अपितु भारत के बीड़ का इलेक्ट्रिशयन अबू जिंदाल है। वह भी अबू हमाजा आदि के नाम से भी कुख्यात है परन्तु जिस अबू हमाजा की बात ऐजेन्सियां कह रही है वह दूसरा है। इसके साथ ही यह भी साबित हो गया कि अबू जिंदाल ही मुम्बई हमले के आतंकियों को पाक स्थित कंट्रोल कक्ष से मार्गदर्शन दे रहा था। गुजरात के बीड़ कस्बे का 32 वर्षीय जिंदाल चार बहिनों का इकलोता भाई व अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। देश का आम आदमी बढ़ती हुई मंहगाई व सामाजिक असुरक्षा में समाज व सरकार की संवेदनहीनता के कारण कौन व्यक्ति अपने क्षणिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए किसी असामाजिक व राष्ट्र विरोधी तत्वों के हाथों का मोहरा बन कर अपना व अपने परिवार के साथ देश का जीवन भी संकट में अबू जिंदाल की तरह डाल देगा यह कहा नहीं जा सकता। अबू जिंदाल को राष्ट्रविरोधी तत्वों ने उसे राष्ट्रद्रोही बना दिया परन्तु देश में कोई ऐसा व्यक्ति व संस्था ऐसी नहीं रही जो इन जजबातों में राष्ट्रद्रोही बनने वाले नौनिहालों को सहारा बन कर राष्ट्रभक्त बनाये। दुनिया की कोई सजा या जेल इंसान पथभ्रष्ट लोगों को सही राह पर नहीं ला सकती है परन्तु समाज व सरकार का सही सहारा रूपि मार्गदर्शन ऐसे व्यक्तियों को सही राह में लाने का महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है। आज आदमी इस देश के हुक्मरानों के कुशासन में खुद को इतना असहाय व असुरक्षित पाता है कि उसे कहीं दूर दूर तक समाज व सरकार में अपना हमदर्द या अपनापन ही नजर नहीं आता।
 सुरजीत वाले प्रकरण में सबसे हैरानी वाली बात यह है कि देश के हित में दुश्मन देश की जासूसी करने गया आदमी के वहां पकडे जाने पर, देश की सरकार को उसका व उसके परिवार का सहारा बनना चाहिए था परन्तु इस देश में देशहित के लिए खुद को कुर्वान करने वाले व्यक्ति व उसके परिवार को अपने हाल पर तिल तिल कर दम तोडने के लिए मजबूर करने के लिए छोड दिया। इस प्रकरण को देख समझ कर कौन व्यक्ति सुरजीत की तरह दुश्मन की मांद पर जा कर अपना जीवन दाव पर लगायेगा। सरकार को चाहिए था कि जो कोई भी व्यक्ति राष्ट्रप्रेम में बशीभूत हो कर जब दुश्मन देश में जा कर अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा दाव पर लगाने का काम सुरजीत सिंह की तरह करता है तो सरकार उसके व उसके परिवार को सहारा देने का काम करती। परन्तु सरकार ने उसको व उसके परिवार को सहारा देने के बजाय उनको अपने हाल पर छोड़ने की निकृष्ठत्तम कृत्य करने पर तुली हो तो उस देश के लिए कौन आदमी यह देख व सुन कर अपना जीवन कुर्वान करेगा। आज जरूरत है देश के हुक्मरानों को देश के प्रति अपने दायित्वों को निर्वाह करने के बारे में ईमानदारी से पुनर्विचार करने की। देश इन हुक्मरानों पर अरबों खरबों संसाधन इसी लिए झोंकता है कि ये हुक्मरान देश के हितों के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करे। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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