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Friday, July 20, 2012


पवार को 2 नम्बर की कुर्सी न दे कर सोनिया ने किया देष के साथ घोर अन्याय

देष को मंहगाई से खून के आंसू रूलाने में मनमोहन के बाद पवार ही नम्बर है

सोनिया गांधी ने जितना अन्याय देष के साथ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाये रख कर किया उतना ही अन्याय षरद पवार को नम्बर दो की कुर्सी से दूर रख कर किया। क्योंकि सप्रंग सरकार में सुना हैं देष को अपने कुषासन से खून के आंसू रूलाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रीमण्डल में नम्बर दों की कुर्सी न मिलने से राकांपा के प्रमुख षरद पवार नाराज हैं। नम्बर दो की कुर्सी पर रक्षा मंत्री एंथनी जैसे देष के ईमानदार नेता को आसीन करना आज की राजनीति व इस देष को अपने कुषासन से पतन के गर्त में धकेलने वाली मनमोहनी सरकार पर प्रष्न चिन्ह भी है। पूरा देष जानता है कि अगर देष के आम आदमी को इस सप्रंग रूपि कुषासन से खून के आंसू रूलाने में जहां प्रधानमंत्री नम्बर एक स्थान पर हैं तो दूसरा स्थान का अगर कोई हकदार है तो वह कृशि व आपूर्ति मंत्री षरद पवार ही है। उनके कारण देष में खाद्य पदार्थो व दूध के दाम कितनी बार बढ़े यह देष के इस दो नम्बर की कुर्सी के लिए वैचेन नेता षरद पवार को भी नहीं है। भले ही उनका नाम षरद यानी षीतलता का पर्याय लगता हो परन्तु उनके कारण देष के लोगों का जीवन मंहगाई से एक प्रकार से बर्बादी के गर्त में फंस चूका है।
षरद नाराजगी सोनिया गांधी से है कि जब पूरा देष उनकी प्रतिभा से विज्ञ है तो इसके वावजूद सप्रंग की प्रमुख सोनिया गांधी ने उनको दो नम्बर की कुर्सी क्यों नही दी। हालांकि मंहगाई से मरणासन देष के सवा सो करोड़ जनता इस बात को मानती है कि षरद पवार को ही जनभावनाओं का सम्मान करते हुए दो नम्बर की कुर्सी दे देनी चाहिए। इस कुर्सी पर किसी भी सरकार पर उनका जन्मजात हक है। इस कुर्सी पर उनका हक कितना है यह राजनेताओं व माफियाओं के आपसी भाईचारे को बेनकाब करने वाली भारत सरकार की वोरा कमेटी की रिपोर्ट के पन्नों में दफन है। यह सब जानते हुए भी अगर सोनिया गांधी ने 2 नम्बर की कुर्सी पर षरद पवार जैसे प्रतिभावान नेता को न विराज कर एंथनी जैसे षरीफ आदमी को आसीन कर दिया तो यह उनकी विदेषी मूल का दोश माना जा सकता है। षायद उनको इस बात का भान नहीं है कि इस देष में आम जनता भी नम्बर दो व 420 नम्बर को किस दृश्टि से देखते है। देखते रहे लोग परन्तु पवार का इस कुर्सी पर जन्म सिद्ध अधिकार है। यह दूसरी बात यह है कि षरद पवार के दिल में असल में नम्बर एक की कुर्सी पर है परन्तु जब पर सोनिया गांधी की कृपा या ऐसा कोई समीकरण नहीं बन जाता है तब तक नम्बर दो से नीचे वे (प्रणव के राश्ट्रपति बनने के बाद रिक्त हुई सीट पर वे अपना हक समझ रहे हैं)। परन्तु अब पवार जैसे राजनीति के पण्डित को कोन समझाये कि नम्बर अगर प्रतिभा से मिलता तो मनमोहन कैसे नम्बर एक बन सकते थे। वह सब कृपा पर ही निर्भर है। कृपा करने वाले को पवार ने पहले ही नाराज कर रखा है।
 

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