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Wednesday, May 30, 2012



भाजपा की तरह टीम अण्णा को भी लगा डी फोर का ग्रहण


2014 में कांग्रेस होगी सत्ता से बाहर, भाजपा बनेगी तीसरे मोर्चे की सरकार की कहार

एक तरफ भारत में मनमोहन सिंह की जनविरोधी सरकार के मंहगाई व कुशासन के खिलाफ पूरे देश में विरोधी व समर्थक दल के कई घटकों के भारत बंद चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में भाजपा के वरिष्ट नेता यशवत सिंन्हा भाजपा की 2014 में ताजपोशी के लिए अमेरिका में भी समर्थन जुटाने में लगे हुए है। अभी मेरे अमेरिकी मित्र रयाला जी ने फेस बुक के द्वारा बताया कि भाजपा के नेता यशवंत सिन्हा अमेरिका डीसी के मिनेरवा रेस्टोरेंट में भाजपा समर्थकों के साथ आगामी 2014 में भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बारे में बता रहे है। करीब 100 करीब लोग हैं मेरा मित्र जो अमेरिका में उच्च पद पर आसीन है वो भी उनमें से एक है।  मेने उनको सलाह दी कि यशवंत सिन्हा से पूछा कि उनकी पार्टी 2014 में तीसरे मोर्चे में नितीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन देंगे या किसी अन्य को। क्योंकि 2014 में कांग्रेस को तो जनता उसके कुशासन के लिए सत्ता से बेदखल कर देगी, भाजपा को तो उसमें दशकों से काबिज गु्रप फोर व मोदी समर्थकों के आपसी द्वंद ही ले डुबेगा। इसलिए आगामी 2014 में कांग्रेस जहां सत्ता से बेदखल होगी वहीं भाजपा भी केवल तीसरे मोर्चे की सरकार को बाहर से समर्थन देने के लिए मजबूर होगी। तीसरे मोर्चे यानी भाजपा व कांग्रेस के अलावा। इस का प्रधानमंत्री नितीश आदि बन सकते हैं परन्तु मुलायम किसी भी कीमत पर नहीं बनेगे।
मेने अपने मित्र को बताया कि जिस प्रकार टीम अण्णा आज अपनी विश्वसनियता उसमें काबिज अण्णा के चार प्यारों अरविन्द केजरीवाल, प्रशांत, किरण व सिसोदिया के अलोकशाही प्रवृति के कारण जनता से दूर हो रही है वेसे ही भाजपा में आडवाणी के टीम के चार महारथी सुषमा, बैकटया, जेटली व अनंन्त जिनको डी फोर के नाम से भाजपा व संघ के मठाधीश पुकारते है, की अलोकतांत्रित चैधराहट के कारण पूरी भाजपा में तेजी से उभर रहे नरेन्द्र मोदी के विशाल छवि के कोन बनेगा प्रधानमंत्री के द्वंद के टकरावट के कारण आगामी 2014 के लोकसभाई चुनाव के दंगल के कारण सत्ता के दंगल से एक प्रकार से कांग्रेस की तरह बाहर हो गयी है। भाजपा केवल इतनी रहेगी कि वह बाहर से समर्थन देगी परन्तु सत्ता में सहभागिता नहीं करेगी। यानी उसकी स्थिति कांग्रेस से भी बदतर रहेगी। सत्तासीनों का मात्र कहार रहेगी, सत्ता का भोग भी न कर पायेगी परन्तु सत्ता के कुशासन का दण्ड अवश्य भोगेगी।



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