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Tuesday, May 1, 2012

भारत माता के महान सपूत डा कलाम को राष्ट्रपति

बनाने से घबरा रहे हैं सभी दल



लोकपाल से भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा केवल जेल भरेगी-


भारत के महान सपूत व देश के पूर्व राष्ट्रपति डा अब्दुल कलाम का कहना सच है कि सही लोगों को चुनने से ही व्यवस्था सुधरेगी न की लोकपाल बनाने मात्र से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। उनका कहना सही है कि लोकपाल आदि कानून जेलें तो भर सकती है परन्तु भ्रष्टाचार पर अंकुश तो सदचरित्र व्यक्तियों के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होने से ही लगेगा।
डा अब्दुल कलाम के इस विचार से मैं पूर्ण सहमत हूूॅ , मजबूत कानून तब तक प्रभावी नहीं हो सकते हैं जब तक उन पर ईमानदारी से अमल करने वाले अच्छे लोग महत्वपूर्ण पदों पर आसीन न हो। नहीं तो ये कानून केवल जल भरने का ही काम करेगी। अगर जेल में बंद करने से इंसान सुधरते या भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता तो अब तक इस देश से अधिकांश भ्रष्टाचार व अपराध खत्म हो जाते। क्योंकि जितने लोग अगर जेलों में बंद अभी तक हुए हैं वे तो सुधर जाते। परन्तु देखा यह जा रहा है कि जो एक बार जेल चला गया वह और बड़ा अपराधी व भ्रष्टाचारी बन कर वहां से बाहर आता है। जेल एक प्रकार अपराध व भ्रष्टाचार को और बढ़ाने का महाविद्यालय बन कर रह गया है। आज जेलों में अपराधियों का सम्राज्य चलता हे और जेल प्रशासन का व्यवहार भी अपराधियों के साथ उचित व सही इंसानों के साथ बहुत ही शर्मनाक होता है। इसी कारण जेल जा कर अधिकांश शरीफ आदमी भी जेल से छूटने के बाद प्रायः खुंखार अपराधी बन कर देश व समाज में अराजकता फेलाता है। आज देश में जरूरत है डा अब्दुल कलाम जेसे महान व्यक्तितव की जो दूसरों को उपदेश देने के बजाय अपने आचरण में पहले अंगीकार करता है। उनकी महानता को देखते हुए ही आज पूरे देश का आम जनमानस उनको फिर से राष्ट्रपति के रूप में देखना चाहता है। परन्तु उनकी देशभक्ति इतनी महान है कि वे किसी दल या व्यक्ति के बंधुआ मजदूर नहीं बन सकते इसी कारण सभी दल उनसे दूरी बनाये हुए है। नहीं तो अगर देश के राजनैतिक दलों में जरा सी भी देशभक्ति होती तो वे देश के अगले राष्ट्रपति के लिए डा कलाम को बनाने में इस प्रकार दुम नहीं दबाते। देश के सम्मुख इन सभी राजनैतिक दलों का मुखोटा बेनकाब हो गया है।

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