गैरसंेण राजधानी हर हाल में बनेगी, इसको रोकने वालों पर लगेगा तिवारी, खण्डूडी व निशंक की तरह देवभूमि का अभिशाप!

भगवान श्रीकृष्ण की अपार कृपा है, भगवान बदरीनाथ व केदरानाथ की पावन धरती है उत्तराखण्ड, यहां पर वही होगा जो परमात्मा को मंजूर होगा। जनहित के पावन संकल्प को रोकने की ताकत इन किसी माटी के माधो में नही है। इसीलिए मै तो इस विश्वास को मानने वाला हूॅ कि इन सत्ता लोलुपु मुर्दो में इतनी ताकत नहीं जो ये गैरसेंण राजधानी बनने से रोक दे ।  जो विरोध करेगा भगवान बदरीनाथ उसका हाल भी तिवारी, खण्डूडी व निशंक की तरह ही करेगा। हरीश रावत भी अगर दिल से गैरसेंण की बात को स्वीकार कर लेते तो उनका भी राजतिलक होता। अब भी समय है मैने तिवारी, खण्डूडी व निशंक से बार बार निवेदन किया परन्तु सत्तामद में ये नहीं समझ पाये उत्तराखण्ड की जनभावनाओं व भगवान बदरीनाथ की परमशक्ति को। कई बार आगाह करने के बाद भी हवा में उडाते रहे, इनकी तमाम राजनैतिक कोशिश, तिकडम, अपार जनसमर्थन सब महाकाल की एक थप्पेड से हवा में रेत की महल की तरह बिखर गया। अभी भी भगवान बदरीनाथ व देवभूमि के अभिशाप से बचने का समय है प्रदेश के राजनेताओं के पास, ईमानदारी से प्रदेश की राजधानी गैरसेंण बना दो, नहीं तो उनको अपने शर्मनाक पतन होने से कोई नहीं बचा पायेगा। कहां गये विकास पुरूष, कहां गये तथाकथित ईमानदार व कहां गये तिकडमी चकडेत। सब धरे के धरे रह गये । इन्होंने शायद महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी का अमर गीत नहीं सुना‘ जाग जाग हे उत्तराखण्उ, अे नरसिंह भैरों बजरंग....’ जो भी यहां जनहितों को रौंदेगा तिवारी, मुलायम व राव की तरह पतन की गर्त में गिरेगा। उत्तराखण्ड राज्य का गठन इन नेताओं की कृपा या इच्छा से नहीं अपितु भगवान की अपार शक्ति से ही संभव हुआ। नहीं तो ये सत्तालोलुपु कभी तेलांगना की तरह उत्तराखण्ड नहीं बनाते।

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