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Tuesday, May 8, 2012


भ्रष्टाचार की जांच के नाम पर भाजपा की तरह जनता की आंखों में धूल झोंक रही है कांग्रेस सरकार

देहरादून(प्याउ)। किस प्रकार राजनैतिक पार्टियां एक दूसरे के भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल कर एक दूसरे को बचा कर जनता के आंखों में धूल झोंकती है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है वर्तमान उत्तराखण्ड की विजय बहुगुणा सरकार द्वारा अपने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के 419 भ्रष्टाचारों की मामलों की जांच के लिए बनाया गया भाटी आयोग। 13 अप्रैल को इस आयोग के गठन की अधिसूचना भी जारी हो गयी थी परन्तु इस पर सरकार कितनी ईमानदार है यह इस अधिसूचना के जारी होने के एक माह बाद इस एक सदस्यीय आयोग के अध्यक्ष केआर भाटी का प्रदेश के समाचार पत्रों में प्रमुखता से आया यह बयान की उनको कोई काम नहीं दिया गया है। उन्हें यह भी नहीं मालूम कि उन्हें किसी जांच आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। समाचार पत्रों में उन्होेंने जरूर पढ़ा था कि वे किसी आयोग के अध्यक्ष बनाये गये हैं, पर आज तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। ऐसे में किसी जांच का सवाल ही नहीं उठता। हाॅलांकि इस बयान पर प्रदेश सचिव सामान्य प्रशासन अजय नबियाल सरकारी पक्ष को रख रहे हैं। परन्तु यह सच्चाई है कि जब छह माह के निर्धारित अवधि के लिए गठित आयोग के अध्यक्ष को एक माह बाद भी अपने दायित्व का सरकार की तरफ विविवत बोध नहीं हुआ तो वे केसे 419 मामलों की जांच शेष पांच माह में करेगें। यह कुल मिला कर कांग्रेस सरकार का भी जनता की आंखों में पूर्ववर्ती खंडूडी व निशंक की भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेसी सरकार के अन्तर्गत हुए भ्रष्टाचारों की जांच के लिए बनाये गये आयोग की तरह ही धूल झोंकने का हथकण्डा लग रहा है। इससे साफ हो गया कि जनता की भावना का दोहन कर ये राजनैतिक दल भले ही वोटों का हरण कर लेते हैं परन्तु भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए कतई ईमानदार नहीं है। अगर होते तो इनके कारनामे इतने जगहंसाई वाले नहीं होते। भाजपा व कांग्रेस दोनों ने विपक्ष में रहते हुए सत्तासीन सरकार पर भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप लगाये परन्तु जब सत्तासीन हुए तो इन दोनों दलों ने जनता के आंखों में धूल झोंकने के अलावा कोई दूसरा काम किया ही नहीं।

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