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Sunday, May 6, 2012


पाॅल दिनाकर को खुली चुनौती 2014 में कांग्रेस को सत्तारूढ़ करके दिखाओ

पाखण्ड, अंध विश्वास व ईश्वर के नाम पर व्यापार चलाने वाले शैतान होते है-काला बाबा  


धर्म व भगवान की कृपा का व्यापार करने वाले पाॅल दिनाकरण व निर्मल बाबा आदि में अगर जरा सी भी ताकत है तो वे 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सोनिगा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस गठबंधन को फिर से सत्तासीन करके दिखाये। जो लोग निहित स्वार्थ के लिए परमशक्तियों का दुरप्रयोग या व्यापार करते हैं वे ईश्वर द्रोही ही नहीं समाज के भी दुश्मन है। मेरे जेहन में ये बात तब उभर कर आयी जब मैने सुना की ईसाई धर्म का प्रचारक पाॅल दिनाकरण जो खुद को ईसा मसीह से सीधे बात करने व उनकी कृपा से लोगों के भाग्य, कार्य व व्यापार आदि बनाने का दंभ भरते है। इसके साथ सुना है कि ये पाॅल बाबा सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेसी गठबंधन की सरकार बनाने व बचाने का भी दावा करते है। यही नहीं ये तथाकथित पाॅल दिनाकर व निर्मल बाबा दोनों अपने श्रद्धालुओं की श्रद्धा का पूरा दोहन करके अपने यहां आने वालों को हजारों रूपये की टिकट खरीदने के लिए मजबूर करता है। कोयंबटूर में एक इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी का मालिक पॉल कैसे चलाता है क्राइस्ट (ईसा ) की कृपा का कारोबार 5000 से 6000 करोड़ रूपये का कारोबार यह देख कर आप सबकी आंखे फटी की फटी रह जायेगी। यह ध्ंाधा इसको अपने पिता से मिला और अब इसकी पत्नी बेटी व बेटा इस कारोबार में इसका हाथ बंटाते है। संसार के 9 देशों में अपने टीबी चैनल के द्वारा संचालित इसका ईसा की दुआ का कारोबार एक प्रकार से पाखण्ड का अड्डा ही है। जो परमात्मा सभी जीवों को हवा, पानी, रोशनी, धरती, आसमान आदि सबको बिना भेदभाव के प्रदान करता है उसके नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले उसकी कृपा के सौदागर बन कर लोगों से उसकी भरपूर कीमत वसुल कर रहे है। ऐसे लोगो ंको मैं  ईश्वरी कृपा का वाहक नहीं अपितु ईश्वर के नाम पर लोगों को लुटने वाला सौदागर ही मानता हॅू। मेने अपने जीवन में साक्षात ऐसे महान शक्तियों से सम्पन्न काला बाबा जेसे उच्च कोटी के संतों को देखा और अनेकों महान संतों के बारे मे ंपड़ा, कभी किसी ने ईश्वर की कृपा का व्यापार नहीं किया अपितु जनहित के लिए वे अपनी शक्तियों का सदप्रयोग करते थे । महान ईश्वरीय शक्तियों के सम्पन्न काला बाबा ने वाजपेयी के शासनकाल में ही मेरे सामने करते हुए दो टूक कहा था कि अब अपने मक्कर में फंसा कर वाजपेयी से छह माह पहले ही लोकसभा भंग कराऊंगा और 350 सांसदों के समर्थन से सोनिया गांधी का शासन भारत में कराने की भविष्यवाणी की थी। यही नहीं बाबा ने साफ शब्दों में कहा था कि मै कांग्रेस का सपा व बसपा से किसी भी सूरत में चुनावी गठबंधन नहीं करने दूंगा। मैने प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्र के उसी समय के अंक में उनके मर्म को जरा सा न समझते हुए खबर प्रकाशित किया था कि ‘350 सांसदों के बहुमत से सोनिया को प्रधानमंत्री बनायेंगे काला बाबा’ जबकि बाबा ने बीना लाग लपेट से कहा था कि 350 सांसदों के समर्थन से भारत में सोनिया का राज चलाऊंगा। उस समय बाबा की भविष्यवाणी का भले ही कांग्रेसी विश्वास नहीं माने परन्तु इसके बाद सोनिया के साहयक माधवन भी दिल्ली के कनाट प्लेस स्थित बाल सहयोग के खण्डरों में सभी मौसम में धूनी में रमे रहने वाले काला बाबा से भैंट करने आये थे। यही नहीं उप्र की वर्तमान कांग्रेस अध्यक्षा व तत्कालीन रीता बहुगुणा भी काला बाबा को ढूंढते बाल सहयोग में आयी थी परन्तु बाबा से उनकी भैंट नहीं हो पायी थी। काला बाबा गांधी, नेहरू, सुभाष, इंदिरा, मुरारजी, हेमवती नन्दन बहुगुणा, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी, सरसुनिया, सहित देश के अधिकांश बडे नेताओं को करीबी रहे। इनकी कृपा रूपि आर्शीवाद के लिए ये तमाम नेता इनके चरणों में नतमस्तक रहते थे। इंदिरा गांधी को इंन्दु कहते थे,  राजीव व संजय उनकेा मामा कहते थे। उनके बारे में इंदिरा गांधी के सहायक रहे आर के धवन सहित वरिष्ट नेता अच्छी तरह से जानते थे। वे सदा अंध विश्वास, पाखण्ड, शोषण व गैरबराबरी के विरोधी रहे। काला बाबा हमेशा उपेक्षित, दलित, वंचित व शोषित लोगों के हितों के संरक्षक रहे। वे धर्म, विधा, राजनीति व चिकित्सा आदि के व्यापारीकरण के घोर विरोधी थे। वे नेताओं की सत्तालोलुपता से काफी व्यथित रहते थे। समय आने पर वे सत्तामद में चूर नेताओं को अपनी शक्तियों से करारा सबक सिखाते भी थे। उन्होंने इंदिरा जी के प्रधानमंत्री के रूप में रहते रहते बीपी सिंह व राव दोनों के प्रधानमंत्री बनाने का ऐलान कर दिया था। वे हर प्रकार के माया मोह से दूर सुविधाओं व प्रचार से दूर रहते थे। उनके अनन्य भक्तों में हेमवती नन्दन बहुगुणा, नरसिंह राव जैसे राष्ट्रीय नेता थे। इलाहाबाद में जन्मे कालाबाबा का एक आश्रम कानपुर के गोविन्दपुरी में नहर के  िकनारे था जिस पर आज बसपा व संघ समर्थकों ने विद्यालय संचालित कर रखे है। वे सदा कहते रहते देवी ये दो पांव का जानवर(आदमी) भले ही मेरी न माने परन्तु मै प्रकृति को डण्डा दे कर काम कराने की ताकत रखता हॅू। काला बाबा के पास जाने पर भी राजनेताओं आदि की कंपकपी छूटती थी। बाबा कब किसको श्राप दे दे। क्योंकि वे गलत आदमी को कभी सहते नहीं थे। वे अध विश्वास व पाखण्ड के खिलाफ सदैव इंसान को जागृत रहने की सलाह देते। यही नहीं वे पूजा पाठ या मंत्र तंत्र आदि से भी इंसान को दूर रह कर एक दूसरे के हित में काम करने की सीख देते थे। उनकी कृपा से हरियाणा के जीन्द क्षेत्र. से निर्दलीय विधायक के रूप में चर्चित रहे रेलू राम का उत्थान से पतन की पूरी कहानी काला बाबा की कृपा के आस पास ही घुमती है। चंन्द्रां स्वामी हो या जय गुरूदेव सतयुग आयेगा आदि सभी नामी आध्यात्म पुरूष भी उनकी महता का लोहा मानते थे। यही नहीं हरियाणा से सांसद रहे  शर्मा, उप्र के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष जगदम्बिका पाल हो या उत्तराखण्ड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान मंत्री हरीश रावत या सतपाल महाराज। नाम इतने अधिक हैं कि मैं लिखने में असमर्थ हॅू। उनके बारे में कांग्रेस सेवा दल के पूर्व राष्ट्रीय नेता उमेद सिंह राठी, जामा मस्जिद के ईमाम बुखारी के बिहार निवासी साढु भाई जो किस्सा कुर्सी के लिए चर्चित रहे,, उप्र के मिश्रित सीट से डेढ दशक तक पूर्व सांसद रहे संकटा प्रसाद के सुपुत्र वरिष्ठ चिकित्सक डा जय प्रकाश, बाल सहयोग के पूर्व सचिव व दिल्ली फाइन आर्ट कालेज के प्राद्यानाचार्य डा शर्मा ,दिग्गज राष्ट्रीय नेता जगजीवन राम के करीबी सहयोग टी एस गौतम , चित्रकुट स्थित राजकीय अस्पताल के चिकित्सक राव व दिल्ली महानगर निगम के होल्टीकल्चर के पूर्व डायरेक्टर शर्मा आदि सभी एक स्वर में बता सकते है कि काला बाबा की रहस्यमय शक्तियां। बाबा इस देह छोडने से पहले मुझे कहते थे देवी मेरे प्रयोग सीधे हैं तुम भी कर सकते हो, किसी भी अन्याय के खिलाफ मूक न रहना, कोई भी ताकत अन्यायी को बचा नहीं पायेगी। आज बाबा भले ही सदेह हमारे बीच न हो परन्तु उनका आर्शीवाद हमेशा साथ है। काला बाबा ने जिस अपार कृपा से सोनिया व कांग्रेस को सत्तासीन कराने में साथ दिया, परन्तु कांग्रेसी सत्तासीन होने के बाद बाबा को व जनहित को भूल गये, इस लिए मैने कई महिने पहले ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से छह माह पहले ही इसका ऐलान कर दिया था कि उत्तराखण्ड से भाजपा व उत्तर प्रदेश से माया का विधानसभा चुनाव में सफाया होगा तथा 2014 के लोकसभा चुनाव में जनविरोधी कांग्रेस का देश की सत्ता से सफाया होगा परन्तु कांग्रेस की कार्बन कापी बन गयी भाजपा को  भी सत्ता से दूर रहना होगा। अब इसमें इस समय मैं एक और रहस्य उजागर करना चाहता हॅॅॅॅॅू कि मुलायम सिंह भी प्रधानमंत्री नहीं बन सकेंगे। अब कांग्रेस को अपनी कृपा से बचाने का दंभ भरने वाले पाॅल बाबा को खुली चुनौती है कि वह 2012 में होने वाले लोकसभा चुनाव में फिर से सत्तासीन करा कर दिखायें। किसी भी कीमत पर कांग्रेस सत्तासीन नहीं हो पायेगी। देश व जनता को खून के आंसू रूलाने वालों से कोई मोह नहीं।

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