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Tuesday, May 8, 2012



-यदि विजय बहुगुणा विधानसभा चुनाव हारे तो 
-सुरेन्द्रसिंह नेगी बन सकते हैं मुख्यमंत्री

अगर विजय बहुगुणा चंद महिनों के अंदर होने वाले विधानसभा चुनाव में पराजय हो गये तो कांग्रेस आलाकमान किसको प्रदेश का मुख्यमंत्री बनायेगी? यही सवाल इन दिनों देहरादून में ही नहीं अपितु दिल्ली सहित सभी उत्तराखण्डी  के जेहन में रह रह कर कुचालें मार रहा है। लोग कई नाम नामों पर कयास लगा रहे है। कोई हरीश रावत तो कोई सतपाल महाराज, कोई अन्य करीब आधा दर्जन लोगों के नाम इस दोड़ में सम्मलित किये हुए है। पर जो लोग राजनीति की जरा सी भी समझ रखते हैं वे जानते हैं कि कांग्रेस के लिए यह बहुत ही शर्मनाक स्थिति होगी। इसलिए पहले कांग्रेस ऐसी परिस्थितियां ना आये इसके लिए हर संभव प्रयास करेगी। इसके बाबजूद अगर विजय बहुगुणा भी खंडूडी की तरह मुख्यमंत्री रहते हुए अपना विधानसभा चुनाव हार जाते है तो फिर कोन बनेगा उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री? यह यक्ष प्रश्न कांग्रेस नेतृत्व के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। अब ऐसी स्थिति में जब प्रदेश की प्रबुद्ध जनता में ही नहीं अपितु कांग्रेस में भी विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री के रूप में थोपे जाने का भारी आक्रोश है, ऐसे में विजय बहुगुणा का विधानसभा चुनाव में हार जाना ही उत्तराखण्ड व कांग्रेस के हित में होगा। ऐसी स्थिति में जब विजय बहुगुणा के विधानसभा उपचुनाव में हार जाने के बाद अगर कांग्रेस आला नेतृत्व सांसदों को प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर साफ छवि का वरिष्ठ विधायक बनाया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में प्रदेश में वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्री व भाजपा के शीर्ष नेता भुवनचंद खण्डूडी को कोटद्वार विधानसभा चुनाव में धूल चटाने वाले जनप्रिय व साफ छवि के नेता सुरेन्द्रसिंह नेगी को मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी करनी चाहिए। परन्तु कांग्रेस आला नेतृत्व के आत्मघाती सलाहकार जिनकी आत्मघाती सलाह से वर्तमान विधानसभा चुनाव में साफ छवि के वरिष्ठ नेता हरीश रावत व सतपाल महाराज के बजाय विजय बहुगुणा की ताजपोशी करके जहां उत्तराखण्ड की जनभावनाओं के साथ खिलवाड किया वहीं पूरे देश में कांग्रेस नेतृत्व को उपहास का पात्र बनना पडा। ऐसे आत्मघाती सलाहकार  इंदिरा हृदेश का मुख्यमंत्री के रूप में थोप कर बची खुची कांग्रेस की साख जमीदोज करना चाहते है। सवाल प्रदेश में महिला पुरूष का नहीं अपितु अनुभवी व जनप्रिय नेता ही प्रदेश का मुख्यमंत्री होना चाहिए। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अगर सांसदों में से मुख्यमंत्री बनाना था तो विजय बहुगुणा को बनाने की जो शर्मनाक भूल कांग्रेस आला कमान ने की उसका खमियाजा जहां कांग्रेस ने अपनी जडों में मट्ठा डाल दिया है वहीं उत्तराखण्ड की लोकशाही के साथ अक्षम्य खिलवाड़ किया गया। विधानसभा चुनाव के बाद सोनिया जी को कांग्रेस व प्रदेश के हित में हरीश रावत या सतपाल महाराज में से एक को बनाना चाहिए था।

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