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Tuesday, May 1, 2012


मंगला को चुनाव में उतारने की भाजपा नेताओं की 


मंशा से भाजपा व कांग्रेस में हडकंप

मंगला को उतार कर कांग्रेस को धूल चटाने की भाजपा की रणनीति की भनक लगते ही कांग्रेस में भी हडकंप


उत्तराखण्ड भाजपा के दिग्गज नेताओं द्वारा टिहरी लोकसभा सीट के लिएउत्तराखण्ड में समाजसेवा के क्षेत्र में बहुत ही कम समय में महत्वपूर्ण स्थान बनाने वाली आध्यात्म व समाजसेवी मंगला जी को उतारने की मंशा की भनक लगते ही भाजपा व कांग्रेस में हडकंप ही मच गया। हालांकि राजनीति में कूदने की संभावनाओ ं को भोले जी महाराज व उनकी धर्मपत्नी माता मंगला ही नहीं अपितु उनके करीबी लोग सिरे से नकार रहे है। परन्तु उत्तराखण्ड भाजपा के बडे दिग्गज कांग्रेसी सांसद विजय बहुगुणा द्वारा मुख्यमंत्री बन जाने के बाद यहां से रिक्त होने वाली इस टिहरी लोकसभा सीट पर माता मंगला को उतार कर कांग्रेस को चारों खाने चित करना चाहते है। गौरतलब है कि श्रीमती मंगला, कांग्रेसी दिग्गज नेता संासद सतपाल महाराज के छोटे भाई भोले जी महाराज की धर्मपत्नी है। टिहरी के प्रतिष्ठित सजवान परिवार में जन्मी मंगला जी ने अपने सामाजिक संगठन के कार्यों द्वारा उत्तराखण्डियों के बीच अपनी जगह बनायी उससे उनकी ख्याति पूरे प्रदेश में फेली हुई है। कुछ सालों से सतपाल महाराज व भोले जी महाराज के बीच चल रहे मतभेदों के कारण दोनों के बीच छत्तीस का आंकडा चल रहा है। उनकी तेजी से उभरी लोकप्रियता व आपसी द्वंद को हवा देते हुए कई राजनेता मंगला जी को भी राजनीति में उतारना चाहते है। सुत्रों के अनुसार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूडी, निशंक व कोश्यारी सहित कई दिग्गज नेता भी माता मंगला की समाजसेवा के कार्यो की मुक्त कंठो से सराहना करते है। वहीं कांग्रेस में वर्तमान केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत भी अपने दल के नेता सतपाल महाराज से भोले जी महाराज व माता मंगला के पारवारिक सम्बंधों में तनाव होने के बाबजूद कई बार उनके कार्यक्रमों में प्रमुखता से उपस्थित रहते है। सुत्रों के अनुसार हरीश रावत व सतपाल महाराज के बीच चल रही राजनैतिक तनातनी का यह भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। सतपाल महाराज इस कारण दुखी हे ंकि हरीश रावत उनके पारवारिक विवाद को हवा देने का काम कर रहे है। हालांकि हरीश रावत ही नहीं भोले जी महाराज व मंगला जी के कार्यक्रमों में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक व खण्डूडी के अलावा पूर्व सांसद मेजर जनरल तेजपाल सिंह रावत भी प्रमुखता से देखे गये। इस पारवारिक विवाद से हट कर राजनीति की डगर पर क्या माता मंगला उतरेगी, इसकी तमाम संभावना पर जब खुद मेने उनसे पूर्व में हुई एक मुलाकात में जब यह प्रश्न पूछा तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया था कि हमें समाजसेवा व आध्यात्म के अलावा किसी दूसरे क्षेत्र में जाने की सोच ही नहीं सकते। इसके बाबजूद भाजपा के कई उत्तराखण्डी नेताओं की मंशा है कि उनकी छवि को लाभ भाजपा उठा कर टिहरी महाराज के निधन के बाद हाथ से गयी टिहरी लोकसभा सीट को फिर से अपनी झोली में डाला जाय। अब सवाल भविष्य की गर्त में है कि मंगला जी टिहरी से भाजपा की प्रत्याशी बन कर लोकसभा चुनाव में उतरने की आश को पूरी करती या ठुकरा देती है परन्तु यह सत्य है कि भाजपा के नेता इस सीट पर हर हाल में कांग्रेस को पटकनी देना चाहते है। इसके लिए कई रणनीतिकार पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूडी को चुनाव मैदान में लोकसभा सीट के लिए उतारना चाहते थे, परन्तु खंडूडी द्वारा रूचि न लिये जाने से मजबूत प्रत्याशियों की खोज जारी है। इस सीट से पूर्व में रहे भाजपा प्रत्याशी जसपाल राणा के कांग्रेस में चले जाने से यहां पर एक प्रकार से मजबूत प्रत्याशियों का टोटा ही पड़ गया है। वेसे इस सीट पर टिहरी राजपरिवार का सबसे प्रबल दावेदारी है। महारानी को भी भाजपा चुनावी दंगल में उतार सकते है। इसके अलावा यहां पर ज्योति गैरोला, लाखी राम जोशी के अलावा दिल्ली में प्रथम विधायक रहे भाजपा नेता मुरारी सिंह पंवार का नाम भी संभावित दावेदारों में माना जा रहा है। परन्तु जिस प्रमुखता से मंगला जी को यहां से प्रत्याशी बनाने की भाजपा नेताओं की गुपचुप पहल उजागर हुई उससे यहां पर हडकंप ही मच गया है। सुत्रों के अनुसार भाजपा की इस पहल को प्रारम्भ करने वाले नेताओं को मंगला जी भले ही चुनावी दंगल में न उतरने की दो टूक बात कह चूकी है परन्तु उनके नाम उछलने से भाजपा व कांग्रेस के सियासी जगत में जबरदस्त हडकंप मच गया।

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