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Saturday, April 21, 2012


-दुग्ध उत्पादको का शोषण कर रहे दुग्ध बिचोलियों के काले कारोबार को खुला संरक्षण क्यों
-हर माह दूध के बढ़ते दाम पर कांग्रेस-भाजपा की शर्मनाक चुप्पी


नई दिल्ली(प्याउ)। हर माह दुग्ध की कीमतों में बढ़ोतरी करके देश की जनता को ही नहीं अपितु दुग्ध उत्पादकों का शोषण करने वाले दुग्ध कम्पनियों  के खिलाफ आखिरकार दुग्ध उत्पादकों ने 21 अप्रैल को देशव्यापी आंदोलन का शंखनाद ससंद पर प्रदर्शन करके  किया। सैकडों की संख्या में हजारों लीटर दुग्ध के साथ राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर पंहुचे आक्रोशित देश के दुग्ध उत्पादकों ने सरकार व राजनैतिक दलों पर इन बिचोलियों की खुली लूट पर मूक रहने की कड़ी भत्र्सना की। दुग्ध उत्पादकों ने मांग की कि सरकार दुग्ध का मूल्य इन बिचोलियों के रहमोंकरम पर न छोड़ कर आम जनता व उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए खुद ही निर्धारित करे।
दुग्ध उत्पादक किसानों का यह भी आरोप था कि दुग्ध व्यापार मे ंलगे बिचोलिये जहां किसानों से 12 से 24 रूपये प्रति लीटर दुग्ध खरीद कर 40 रूपये प्रति लीटर बेच रही है।  वे न तो ये बिचोलिये दुग्ध कम्पनियां, किसानों को उनके दुग्ध का पिछला बकाया ही चूकता कर रहे हैं व नहीं उनको बढ़े रहे मूल्य का ही कुछ लाभ ही प्रदान करते है। किसानों ने दुग्ध बिचोलियों की खूली लूट  पर सरकार व राजनैतिक दलों की शर्मनाक चुप्पी के विरोध में जंतर मंतर पर हजारों लीटर दुग्ध ही होली खेल कर अपना आक्रोश प्रकट किया।
इस अवसर पर दुग्ध उत्पादकों ने दुग्ध व्यवसाय में लगे बिचोलियों व उनकी दुग्ध कम्पनी पर दुग्ध में मिलावट करने का आरोप लगाते हुए जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया। गौरतलब है कि देश में करोड़ों लीटर दुग्ध का हर दिन काला कारोबार नकली दुग्ध के नाम से किया जा रहा है। सुत्रों के अनुसार देश में वर्तमान समय में दुग्ध का उत्पादन 30 करोड़ लीटर हैं वहीं करोड़ों लीटर दुग्ध का प्रयोग हर दिन मिठाईयां, पनीर, खोया आदि बनाने में होता है। इसके बाबजूद देश में 35 करोड़ दुग्ध की खपत होने से देश में दुग्ध में मिलावट के आरोप न केवल लग रहे हैं अपितु इन आरोपों की उस समय पुष्टी हो रही है जब कभी इसको कसौटी में परखा जाता है। माना जा रहा है इस देश में कम से कम 5 करोड़ लीटर दुग्ध कहां से इस देश में आता जबकि देश में दुधारू  पशुओं की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। सरकार की उदासीनता से हर माह दुग्ध बेचने वाली कम्पनियां दुग्ध की कीमत बढ़ा कर लोगों का जीना दुश्वार कर रही हे।  परन्तु क्या मजाल है कि न तो ये दुग्य कम्पनियां इस के लिए दुग्ध उत्पादकों को बार बार बढाई जा रही कीमत का ही लाभ दिया जा रहा है।  इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए आम आदमियों को इस बात का भी गुस्सा था कि तेल की कीमतें बढ़ने पर जहां राजनैतिक दल आये दिन विरोध प्रदर्शन करते हैं वहीं दुग्ध की कीमतें बढाये जाने पर भी न तो सरकार ही इस पर अंकुश लगाने का काम करती हैं व नहीं कोई विरोधी राजनैतिक दल इसका विरोध ही करते है।

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