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Tuesday, April 17, 2012

देश की जनता का मनमोहन सरकार व कांग्रेस से मोह भंग


देश की जनता का मनमोहन सरकार व कांग्रेस से मोह भंग
-दिल्ली नगर निमग में भी कांग्रेस को जनता ने ठुकराया

दिल्ली के स्थानीय निकाय के चुनाव के तहत दिल्ली नगर निगम के चुनाव की 17 अप्रैल को हुई मतगणना में दिल्ली के तीन नगर निगमों में भाजपा ने बाजी मार ली है। महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों के चुनाव व पांच विधानसभा चुनाव परिणामों में मुंह की खाने के बाद कांग्रेस को दिल्ली नगर निमग चुनाव में आशा थी कि दिल्ली के लोग उसकी लाज रख देंगे। परन्तु जिस प्रकार से लोग प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नेतृत्व वाली कांग्रेस के कुशासन में भ्रष्टाचार, मंहगाई व आतंकवाद से त्रस्त है उससे लोग पूरे देश से कांग्रेस को उखाड फेंकने का मन बना चूके है। भले ही कांग्रेस के नेता अपनी नाक बचाने के लिए इसे मात्र स्थानीय निकायों का चुनाव बतायें परन्तु जिस प्रकार से पूरे देश में एक के बाद एक राज्यों में हो रहे चुनावों में जनता के रूझान का पता चल रहा है उससे साफ हो गया है कि जनता का अब पूरी तरह से कांग्रेस से मोह भंग हो गया है। कांग्रेस में इन चुनाव परिणामों से बडा वर्ग अब सोनिया गांधी अविलम्ब मनमोहन सिंह को बदल कर 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की डुबने वाली नौका को बचाने का प्रयास करने के लिए गुपचुप दवाब बनाने का मन बना चूके है। यह हार मात्र दिल्ली के नगर निगम चुनाव में स्थानीय नेताओं की नहीं अपितु यह हार कांग्रेस की मुखिया सोनिया गांधी की है जो मनमोहन सिंह जैसे जनहितों पर कुठाराघात करने वाले मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के पद से न हटा कर कांग्रेस व देश का रसातल में धकेलने के लिए गुनाहगार है।
गौरतलब है कि दिल्ली में भले ही केन्द्र व प्रदेश में कांग्रेस का शासन है परन्तु दिल्ली नगर निगम में वर्षो से भाजपा ही काबिज है। भाजपा की इसी पकड़ को तोडने के लिए इस बार कांग्रेस ने दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में बांटा था परन्तु 15 अप्रैल को हुए मतदान व 17 अप्रेल को इन चुनाव के परिणामों के उजागर होने के बाद यह साफ हो गया कि कांग्रेस को यह दाव भी जनता ने पुरी तरह से ठुकरा दिया।। दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में बांटने के बाद पहली बार नगर निगम के 272 सीटों यानी बार्डो के पार्षदों के चयन के लिए दिल्ली के 1 करोड़ 13 लाख 67 हजार 636 मतदाता इस चुनावी जंग में पार्षद बनने के लिए उतरे 2423 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 17 अप्रैल को 33 मतगणना केन्द्रों में मतगणना हुई। दिल्ली नगर निगम के तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसके तहत पूर्वी भाग में 64, पश्चिमी व उत्तरी भाग में 104-104 पार्षदों वाली नगर निगम होगी।
हालांकि दिल्ली की सत्ता में काबिज भाजपा व कांग्रेस दोनों तथाकथित राष्ट्रीय पार्टी में इनके जमीनी मजबूत नेताओं के बजाय केवल पैसें वाले लोगों को ही टिकट गलत ढ़ंग से दिया गया। इसके खिलाफ भाजपा व कांग्रेस दोनों में समाज सेवा में समर्पित लोग बडी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी बन कर चुनाव मैंदान में है।  जिस प्रकार से भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता जगदीश मंमगांई व हरीश अवस्थी सहित अनैक साफ छवि के जाने माने नेताओं की टिकट काट कर अपने प्यादों को टिकट दी है। उससे साफ हो गया कि दिल्ली में यहां के बहुसंख्यक उत्तराखण्डी, देहात, पूर्वांचल, बिहार आदि लोगों को नकार कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज नेता मात्र अपने लोगों को टिकट दे कर लोकशाही का ही गला घोंट रहे हे। जिस प्रकार से कांग्रेस से जमीनी जनाधार वाले नेताओं को हाशिये में डाल कर सोनिया गांधी के आत्मघाती सलाहकार अपने हवाई प्यादों को महत्वपूर्ण संवेधानिक पदों में आसीन कर रहे हैं तथा मनमोहन सिंह सरकार के कुशासन से जनता त्रस्त है उससे आक्रोशित जनता अब कांग्रेस को करारा सबक सिखाने के लिए चुनावों में कांग्रेस का सफाया कर रही है।

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