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Thursday, April 26, 2012


जल विद्युत परियोजनाओ ंके नाम पर बडे बांध न बनायें मुख्यमंत्री बहुगुणा


उत्तराखण्ड के बुद्धिजीवियों, पत्रकारों सहित तमाम प्रबुद्ध लोगों को चाहिए कि जिस तेजी से मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की सरकार प्रदेश के जल विद्युत ऊर्जा के नाम पर प्रदेश में बडी परियोजनाओं को संचालित करने के लिए दिन रात एक कर रही है उसका पुरजोर विरोध करे। ऐसा प्रतीत होता है कि निशंक सरकार की तरह ही  विजय बहुगुणा सरकार भी यहां की जल विद्युत परियोजना को बाहरी लोगों को देने का तानाबाना बुन रहे है।  उत्तराखण्ड की जनता को ऊर्जा का झुनझुना पकडाने के नाम पर यहां के जल, जंगल व जमीन को ओने पौने दामों पर राज्य गठन के बाद लुटाने का काम सरकारें करती रही है उस पर अविलम्ब अंकुश लगाया जाना चाहिए। विजय बहुगुणा सरकार बताये कि प्रदेश में प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसेंण, प्रदेश में निरंकुश व भ्रष्ट नौकरशाही पर अंकुश लगाना, मुजफरनगर काण्ड-94 के अभियुक्तों को दण्डित करने, प्रदेश में विकास की ठोस नीति बनाने आदि महत्वपूर्ण कार्यो को करने के बजाय केवल आनन फानन में जल विद्युत परियोजनाओं की ठोस नीति बनाये बिना इन परियोजनाओं को शुरू करने के लिए इतनी हायतौबा क्यों कर रहे हैं? गंगा यमुना की पावन अवतरण भूमि में गंगा की निर्मल व अविरल धारा को अवरूद्ध करना एक प्रकार से भारतीय संस्कृति व जीवन दर्शन से एक प्रकार का खिलवाड से कम नहीं है।
उत्तराखण्ड के हुक्मरानों को अब प्रदेश की प्रबुद्ध जनता सीधा सवाल करे कि वे दो टके के लिए उत्तराखण्ड को बांघ, बाघ और राष्ट्रीय पार्क व अभ्याहरण बना कर यहां के निवासियों व प्रदेश को उजाडना बंद करे। सीमान्त प्रदेश उत्तराखण्ड  जल विद्युत परियोजनाओं के नाम पर बडे बांघ बनाने के बजाय उत्तराखण्ड में स्थानीय ग्रामीणों व सरकार के सांझे प्रयास से छोटे हाईडो जल विद्युत परियोजनायें बनायी जाय। इससे प्रदेश का विनाश नहीं होगा, स्थानीय जनता को जहां विस्थापन नहीं अपितु रोजगार मिलेगा, वहीं इससे इस सीमान्त क्षेत्र में माफियाओं का शिकंजा नहीं जकडेगा।  परन्तु प्रदेश का दुर्भाग्य यह है कि यहां पर जो भी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने या सरकार रही उन्होने यहां के दूरगामी विकास के लिए न तो ठोस शासन प्रशासन की दिशा तय की व नहीं इस दिशा में कोई पहल ईमानदारी से ही किया।



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