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Wednesday, April 11, 2012

उत्तराखण्ड द्रोही राव-मुलायम बनने की धृष्ठता न करें बहुगुणा व इंदिरा


उत्तराखण्ड द्रोही राव-मुलायम बनने की धृष्ठता न करें बहुगुणा व इंदिरा/
भू माफियाओं से मिल कर उत्तराखण्ड को कश्मीर बनाने की धृष्ठता न करे बहुगुणा सरकार/


उत्तराखण्ड के थोपे गये मुख्यमंत्री  बहुगुणा व कबीना मंत्री इंदिरा हृदेश प्रदेश की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदेश की जनाकांक्षाओं व स्वाभिमान के प्रतीक राजधानी गैरसेंण में ही घोषित कर वहीं पर विधानसभा के भवन के निर्माण करें। उनको 88 करोड़ रूपये जो प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाने के नाम से आये हुए हैं उनको बंदरबांट करने के लिए हडबड़ी में देहरादून में ही बनाने की धृष्ठता न करें। इसके साथ ही उत्तराखण्ड में प्रदेश की वित्तमंत्री इंदिरा हृदयेश द्वारा भू अधिनियम में संशोधन कर उसकी सीमा 250 वर्गमीटर से बढ़ाकर 500 वर्गमीटर करने के सुझाव दिया है, वह भू माफियाओं के हाथों प्रदेश की जमीन को लुटाने का आत्मघाती  कदम होगा। जो चंद सालों में उत्तराखण्ड को भी कश्मीर जेसा अशांत प्रदेश बनाने वाला हिमालयी भूल साबित होगी। उससे साफ हो गया कि इंदिरा हृदेश को राज्य गठन आंदोलनकारियों व शहीदों की उस भावना का तनिक सा भी भान नहीं हैं जो प्रदेश को भू माफियाओं से बचाने के लिए लिए प्रदेश  में प्रदेश की जमीन खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लगाते हुए यहां पर धारा 371 को लागू करने की मांग कर रहे थे। देश के इस सीमान्त प्रदेश की संवेदनशीलता को ध्यान रखते हुए यहां पर किसी बाहरी व्यक्तियों को बसाना  देश की सुरक्षा से खिलवाड होगा। जिस प्रकार से राज्य गठन के बाद यहां पर अनैक विदेशी व खुंखार आतंकी पकड़े गये उससे साफ हो गया कि यहां पर आतंकियों की सबसे सुरक्षित शरणस्थली बन गयी है। इसका एक ही कारण हे कि यहां पर प्रदेश के हितों को रौंदने वाले हुक्मरानों व भूमाफियाओं की मिली भगत से यहां की जमीन को ऐरे गैरों को बेचने की होड़ सी लगी रही। यहां पर ऐसे संदिग्ध लोगों ने अपने अड्डे बना दिये है जो इन आतंकियों के लिए पनाह उपलब्ध करने में लिप्त हैं। इसी की आशंका के कारण यहां पर लोग राज्य गठन से पहले से ही यहां के आंदोलनकारियों व प्रबुद्ध जनों ने यहां पर धारा 371 के प्रावधान की पुरजोर मांग की थी।  
उत्तराखण्ड के गठन के लिए जनता ने शहादतें दी। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अमानवीय दमन सहे। इस संघर्ष से उपजे उत्तराखण्ड  राज्य की स्थाई राजधानी जनभावनाओं के अनरूप गैरसेंण बनाने के बजाय देहरादून में थोपने वालों को प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड द्रोही राव-मुलायम से अधिक गुनाहगार ही नहीं आस्तीन के सांप भी मानेगी। देवभूमि को अपनी संकीर्णता व सत्तालोलुपता के लिए रौंदने वालों को भगवान बदरीनाथ कभी माफ नहीं करता है। उनकी दुर्गति भी कोई नहीं टाल सकता है।

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