खुद को खुदा समझते है लोग,
खुदा की मेहर से भी खुद को खुदा समझते है लोग,
जरा सी दौलत मिले तो आसमां पर उडते है लोग
शौहरत मिले तो औकात भी अपनी भूल जाते हैं लोग
अपनो की दुआ के फूल को भी पत्थर समझते हैं लोग
नादान ही नहीं बदनसीब हैं जो खुदगर्ज बने हैं लोग
दो दिन के इस सफर में जो नफरत फेलाते हैं लोग
देवसिंह रावत
(रविवार 22 अप्रैल 2012 प्रातः 8.17 बजे)

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