Pages

Monday, April 2, 2012

नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बना पायी भाजपा !


नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बना पायी भाजपा !
देहरादून (प्याउ)।एक तरफ जहां उत्तराखण्ड में बुरी तरह से गुटों में बंटी कांग्रेस ने बड़ी मुश्किल से जगहंसाई कराकर जेसे तेसे प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर विजय बहुगुणा को बना दिया। परन्तु भाजपा इस प्रकरण में कांग्रेस को कोसने में लगी रही। उसे विश्वास था कि किसी भी प्रकार से कांग्रेस का असंतुष्ट गुट टूट कर उसकी गोद में बैठ कर उसकी पुन्न प्रदेश की सत्ता पर कुण्डली मारने की आशा को पूरी करेगा। परन्तु यह काम होते न देख कर भाजपा परेशान है। बाहर वह भले ही कांग्रेस के गुटीय झगडे का मजा लेते हुए उपहास उडा रही है। परन्तु झगडा भाजपा के अंदर भी कम नहीं है। कांग्रेस ने तो प्रदेश का मुख्यमंत्री किसी प्रकार से थोप ही नहीं दिया अपितु उस पर विधानसभा में बहुमत की मुहर भी लगवा दी। परन्तु भाजपा इतने दिन बाद भी नेता प्रतिपक्ष का नाम तक तय नहीं कर पायी। भाजपा के आला नेताओं के लिए प्रदेश की सत्ता से दूर पटकी गयी भाजपा के विधानमण्डल में नेता प्रतिपक्ष का चयन करना भी टेढ़ी खीर साबित हो रही है।
मामला इतना हल्का नहीं है। जितना भाजपाई समझ रहे है। यहां पर भाजपा दो गुटों में बंटी है, इस मामले मे। एक ताकतवर गुट जो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंण्डूडी व कोश्यारी के नेतृत्व में है वह किसी भी कीमत पर पूर्व मुख्यमंत्री निशंक को प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष नहीं देखना चाहता। वहीं दूसरा गुट निशंक का है जो हर संभव प्रयत्न कर रहे हैं नेता प्रतिपक्ष बन कर भाजपा के अंदर हारी हुई लडाई जीतने की। गौरतलब हे कि भाजपा में वर्तमान में ताकतवर गुट जो खंडूडी व कोश्यारी के नेतृत्व में काम कर रहा है वह किसी भी कीमत पर निशंक को प्रदेश भाजपा से बाहर करने में तुला है। वहीं दूसरा गुट जिसको निशंक समर्थकों का माना जा रहा है वह अपने दिल्ली के आकाओं के दम पर हर हाल में नेता प्रतिपक्ष निशंक को बना कर हारी हुई बाजी को फिर जीतना चाहते है। वहीं निशंक विरोधी गुट इस पद पर वरिष्ट विधायक अजय भट्ट को आसीन करना चाहते है। वहीं कुछ आला नेता इस पद पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरवंश कपूर व मदन कोशिक को इस पद पर आसीन करना चाहते है।
मामला कुछ भी हो निशंक की राह में अवरोध खडा करने में भले ही वर्तमान में ताकतवर गुट सफल न भी हो पर निशंक के दिल्ली के बडे नेताओं के साथ करीबी सम्बंधों के प्रभाव के कारण वे निशंक को भाजपा से बाहर करने में असफल रहे हे। चाहे भाजपा कितना ही सुशासन व रामराज की दुहाई दे परन्तु जिस प्रकार से निशंक को प्रदेश के मुख्यमंत्री हटाने के बाद आला नेताओं ने उनको केन्द्रीय उपाध्यक्ष बना कर पूरे देश को अचम्भित कर दिया। इसी से निशंक की आला नेतृत्व पर पकड़ का पता चलता है। अगर विधानसभा चुनाव का मामला नहीं होता तो भाजपा नेतृत्व किसी भी कीमत पर प्रदेश के मुखिया के रूप में निशंक को नहीं बदलते।

No comments:

Post a Comment