सच्चा उत्तराखण्डी कौन


सच्चा उत्तराखण्डी कौन
उत्तराखण्डी केवल वो नहीं जो उत्तराखण्ड में पैदा हुआ हो या उत्तराखण्डी मूल का हो,असल में उत्तराखण्डी वही है जो जनहित में समर्पित हो, जो अन्याय के खिलाफ सतत् संघर्षरत होते हुए ज्ञान, दया व धर्म को आत्मसात करते हुए सदाचारी हो। उत्तराखण्ड का अर्थ ही जो हमेशा समाधान स्वरूप हो। जो स्वयं अखण्ड समाधान हो। मैं उत्तराखण्डी उन लोगों को नहीं मानता हूूॅ जो उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलन को कुचलने वाले राव मुलायम के समर्थक थे, जो मुजफरनगर काण्ड के समय व उसके बाद भी मुलायम के बेशर्मी से समर्थक रहे। न हीं वे उत्तराखण्डी हें जिन्होंने मुजफरनगर काण्ड के हत्यारों को शर्मनाक संरक्षण देने की भूमिका निभाई। असली उत्तराखण्डी राज्य गठन का संकल्प लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र के समक्ष लेने वाले प्रधानमंत्री देवेगोड़ा । असली उत्तराखण्डी रहा मुजफरनगर काण्ड में उत्तर प्रदेश पुलिस की कलंकित भूमिका को धिक्कारते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देने वाले बहादूर सिपाई रमेश। असली उत्तराखण्डी तो मैं मुम्बई के उन साहित्यकार व कलाकारों को मानता हॅू जिन्होंने मुजफरनगर काण्ड में तत्कालीन उप्र के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की भारतीय संस्कृति व मानवता को कलंकित करने वाली भूमिका के विरोध में उनके द्वारा उनको दिये जाने वाले सम्मान राशि के साथ मिलने वाले पुरस्कार को ठुकराने का काम किया, वहीं पूरे समाज को शर्मसार करने वाला कृत्य  तो उस समय के उत्तराखण्ड समाज के तथाकथित नामी कलाकार व साहित्यकार तथा सामाजिक संस्थायें रही जो मुलायम के हाथों उस समय पुरस्कार ले कर अपने समाज की नाक कटाने का काम किया।
मैं तो असली उत्तराखण्डी उन सत्तालोलुपुओं को भी नहीं मानता हूूॅ जिन्होंने भाजपा व कांग्रेस का प्यादा बन कर पृथक राज्य गठन के बाद प्रदेश की सत्ता की बागडोर संभाल कर प्रदेश की जनांकांक्षाओं व सम्मान के प्रतीक स्थाई राजधानी गैरसेंण बनाने के बजाय जबरन देहरादून में थोपने का काम किया। वे भी किसी भी हालत में सच्चे उत्तराखण्डी नहीं हो सकते जिन्होंने राज्य गठन के बाद प्रदेश में जनसंख्या पर आधारित विधानसभाई परिसीमन थोप कर राज्य गठन की मांग करने वालों पर बज्रपात किया। नहीं प्रदेश को जातिवाद, क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार की गर्त में धकेलने का कृत्य करने वाले कुशासक ही सच्चे उत्तराखण्डी ही कहलाये जा सकते हे। कम से कम एक सच्चे ईमानवाले इंसान को मैं सच्चा उत्तराखण्डी मान सकता हॅू परन्तु ऐसे हुक्मरानों को नहीं मान सकता जिन्होंने तिवारी, खण्डूडी, निशंक की तरह उत्तराखण्ड के हक हकूकों और जनांकांक्षाओं को रोंदने का काम किया हो। प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से किसी प्रकार की आश रखना भी अपने आप में नासमझी होगी।

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