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Thursday, April 26, 2012


भगवान बचाये उत्तराखण्ड को ऐसे समर्थकों से 
यह उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य है कि एक तरफ सरकारें प्राकृतिक संसाधनों की भण्डार देवभूमि उत्तराखण्ड के जल, जमीन व जंगल तीनों को यहां पर सत्ता पर काबिज हुक्मरान अपने संकीर्ण निहित स्वार्थ के लिए विनाशकारी बडे बांधों से तबाह करने में तुली है वहीं दूसरी तरफ भूकम्प से संवेदनशील इस हिमालयी प्रदेश में कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी, समाजसेवी व पत्रकार जो कल तक खुद टिहरी बांध जैसे बांधों का पुरजोर विरोध कर रहे थे, वे आज प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं के नाम पर आनन फानन में बांध बनाये जाने का समर्थन कर रहे है। जबकी हकीकत यह है इस सीमान्त प्रदेश में ऊर्जा के नाम पर पूरी घाटी की घाटियां इन जल विद्युत परियोजनाओं के नाम पर डुबा कर बर्बाद करके प्रकृति से जहां खिलवाड़ कर महाविनाश का आमंत्रित किया जा रहा है, वहीं लाखों वृक्षों, करोड़ों जीवों की निर्मम जलसमाधि दे कर हत्या की जा रही है, इसी के साथ हजारों परिवारों को अपनी जड़ों से विस्थापित किया जा रहा है। प्रदेश को यहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन का हक है परन्तु यहां की भौगोलिक व प्राकृतिक तथा सामाजिक तानाबाना को नष्ट करके ंकदापि नहीं। आज सरकार का इरादा अगर प्रदेश को केवल ऊर्जा प्राप्त करना रहता या जनकल्याण का रहता तो यहां पर किसी भी सूरत में बडे बांधों को बनाने की बात तक नहीं करते। वे यहां पर छोटे हाइड्रो बांध बनाते वह भी यहां के स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से न की बाहर के माफिया टाइप के लोगों को इस सीमान्त प्रदेश में काबिज कर प्रदेश की शांति व्यवस्था व देश की सुरक्षा पर खतरा पैदा नहीं करते। जो विकास प्रदेश के विकास व देश की सुरक्षा को तबाह करे ऐसे विकास को किसी भी सूरत में हमारे देश व प्रदेश में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
मेरे लिए यह समझ से बाहर की बात है कि जो लोग अपने आप को उत्तराखण्ड के मान सम्मान व हक हकूकों के स्वयं भू ध्वजवाहक बनते हैं वे केसे मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले खलनायकों के हमदर्दो की स्तुतिगान व समर्थन कर रहे है। जिन लोगों के हाथ उत्तराखण्ड के खून से रंगे हों उनको अपने साथ रखने व उनको संरक्षण देने वाले के समर्थन में कैसे ये तथाकथित पत्रकार, समाजसेवी व बुद्धिजीवी खडे होने का शर्मनाक कृत्य कर रहे हे। जो लोग समाज की इस व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तम्भों को अपने कृत्यों से कलंकित कर चूके हैं उनका विरोध करना हर किसी जागरूक आदमी का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। जो लोग अपने निहित स्वार्थ के लिए इसके विपरित कार्य कर रहे हैं वे किसी भी सूरत में प्रदेश के हितैषी हो ही नहीं सकते।

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