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Sunday, April 22, 2012


भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में कल कहीं अकेल न रह जायें अण्णा हजारे 
बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के सांझा आंदोलन न होने से मनमोहन सरकार ने राहत की सांस 


जिस प्रकार से आज टीम अण्णा से  टीम के वरिष्ठ सदस्य मौलाना मुफ्ती शमीन काजमी ने टीम अण्णा की कार्यप्रणाली से खिन्न हो कर टीम अण्णा से अपना नाता तोड़ दिया। वहीं टीम अण्णा ने अपनी बैठकों की मोबाइल फोन से गुप्त क्लीपिंग बनाने का आरोप मुफ्ती शमीन काजमी पर लगाते हुए, उनको टीम से बाहर करने का ऐलान किया। टीम अण्णा के मुताबिक मुफ्ती शमीन काजमी को भी टीम अण्णा के पूर्व सदस्य स्वामी अग्निवेश की तरह टीम की जासूसी के आरोप के कारण बाहर किया गया। टीम अण्णा इस बात से भी जिस प्रकार से भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्र व्यापी आंदोलन करने वाले स्वामी रामदेव से दूरी बनाने में जिस प्रकार लगी हुई है उससे लगता है कि टीम अण्णा में असुरक्षा का भय सता रहा है कि कहीं बाबा रामदेव अपने विशाल नेटवर्क व लाखों समर्थकों के होते हुए टीम अण्णा को अपने आगोश में तो न ले ले। सुत्रों के अनुसार 3 जून को दिल्ली में होने वाले बाबा रामदेव के प्रचण्ड जनांदोलन में अण्णा हजारे ने भाग लेने की सहमति दी तथा लोगों में ऐसा संदेश दिया गया कि बाबा रामदेव व अण्णा हजारे दोनों मिल कर अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जनांदोलन का संयुक्त रूप से मार्गदर्शन करेंगे। इससे शायद टीम अण्णा के बाकी सदस्यों को अपना अस्तित्व का खतरा महसूस होने लगा, क्योंकि बाबा रामदेव के साथ आंदोलन में टीम अण्णा के बाकी सदस्यों को ऐसी वरियता नहीं मिलेगी। शायद इसी कारण टीम अण्णा  ने बहाना बना कर सांझा आंदोलन करने के बजाय अपनी डफली अलग अलग बजाने में श्रेयकर समझा। दोनों में संयुक्त रूप से आंदोलन करने की घोषणा से जहां सरकार के हाथ पांव फूल गये थे वहीं देश के तमाम भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वालों को नयी ऊर्जा का संचार हो गया था। इस आशा की किरण को टीम अण्णा के सदस्यों ने अपने अस्तित्व के लिए अलग अलग आंदोलन चलाने की ढपली बना कर एक प्रकार से बुझा दिया है। इसके लिए भावी इतिहास अवश्य टीम अण्णा को कटघरे में रखेगा। टीम अण्णा के कई कदमों व बयानों से जनविश्वास पर एक प्रकार से कुठाराघात करने का काम किया है। प्रशान्त भूषण का कश्मीर विवाद वाला बयान हो या टीम अण्णा का उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूडी के कमजोर लोकपाल विधेयक की सराहना करना आदि प्रकरण से लोगों का भले ही अण्णा हजारे से विश्वास कम न हुआ हो परन्तु टीम अण्णा से जरूर कम हो गया है।
टीम अण्णा के अहं के कारण ही बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के बीच दूरियां बढ़ी। अण्णा हजारे जिनको बाबा रामदेव में रामलीला मैदान के अपने आंदोलन में प्रमुखता से स्थान दिया, कुछ माह बाद ही टीम अण्णा के अहंकार के कारण बाबा रामदेव के साथ मंच सांझा न करने जैसे दंभपूर्ण बयान दे कर टीम अण्णा ने देश की जनता की भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करने की आश पर एक प्रकार से बज्रपात ही किया। बाबा रामदेव व अण्णा अगर दोनों साथ आंदोलन करते तो न तो बाबा रामदेव का रामलीला मैदान में हुई त्रासदी का समाना करना पड़ता व नहीं अण्णा हजारे के आंदोलन से जनता का मोह भंग होने जेसी स्थिति का समाना करना पडता। अगर आज मीडिया का प्रचण्ड सहयोग न हो तो टीम अण्णा के आंदोलन में अब जो लोग रामलीला मैदान में पहली बार तिहाड़ से वापस आने के बाद जुडे थे उसका 10 अंश भी नहीं जुड़ता।
जिस प्रकार से टीम अण्णा के चंद सदस्य अपनी चैधराहट के खातिर बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के साथ मिल कर सांझा आंदोलन चलाने से कतरा रहे है। इससे उन लोगों को गहरा आघात लगा जिनको विश्वास है कि अगर बाबा रामदेव व अण्णा मिल कर सांझा आंदोलन करते तो पूरा देश उनके आंदोलन में कूद जाता, इससे सरकार व सभी राजनैतिक दल विवश हो जाते जनता की इच्छा के अनुसार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए। अब टीम अण्णा की हटधर्मिता के कारण लोगों को आशंका है कि टीम अण्णा के लोग अपनी चैधराहट के लिए एक दूसरे को अग्निवेश व काजमी की तरह आरोप प्रत्यारोप लगा कर बाहर करने में लगे रहेंगे और एक दिन इस टीम अण्णा में केवल अण्णा हजारे ही रह जायेगे।  दोनो ंके सांझा आंदोलन न होने की खबर से मनमोहन सरकार ने राहत की सांस ली वहीं देश के लोगों में गहरी निराशा छा गयी।

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